रिपोर्ट - प्रवीण वेद (बबलू) झाड़ोल
उदयपुर से उठी आवाज, प्रधानमंत्री तक पहुंची मांग—संसद में संशोधन की तैयारी की अपील
उदयपुर। देश में महिला आरक्षण को लेकर चल रही सियासत के बीच उदयपुर से एक जबरदस्त और निर्णायक मांग सामने आई है। सर्व ओबीसी समाज महापंचायत ट्रस्ट उदयपुर ने केंद्र सरकार को सीधी चुनौती देते हुए कहा है कि यदि महिला आरक्षण में सामाजिक न्याय नहीं जोड़ा गया, तो यह अधूरा कानून साबित होगा।
ट्रस्ट के संस्थापक दिनेश माली और अध्यक्ष लोकेश चौधरी के नेतृत्व में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को भेजे गए पत्र में मांग की गई है कि कुल महिला आरक्षण में 50% हिस्सा एससी, एसटी और ओबीसी वर्ग की महिलाओं के लिए अनिवार्य किया जाए।
“सिर्फ आरक्षण नहीं, बराबरी का अधिकार चाहिए”
महामंत्री सूर्य प्रकाश सुहालका और सचिव राजेंद्र सेन ने स्पष्ट कहा कि 16 अप्रैल को प्रस्तावित विशेष सत्र में ‘नारी वंदन’ के तहत लाया जा रहा महिला आरक्षण बिल ऐतिहासिक जरूर है, लेकिन यदि इसमें पिछड़े, दलित और आदिवासी वर्ग की महिलाओं की हिस्सेदारी तय नहीं की गई तो यह सामाजिक संतुलन को बिगाड़ देगा।
उन्होंने जोर देकर कहा कि संविधान के अनुच्छेद 340, 341 और 342 पहले ही इन वर्गों को आरक्षण का अधिकार देते हैं, ऐसे में महिला आरक्षण में भी इन्हें बराबर का प्रतिनिधित्व मिलना जरूरी है।
“बिना हिस्सेदारी के विकास अधूरा”
ट्रस्ट पदाधिकारियों का कहना है कि देश के विकास की असली तस्वीर तभी बदलेगी, जब हाशिए पर खड़ी महिलाओं को संसद तक पहुंचने का पूरा अवसर मिलेगा।
उन्होंने चेतावनी देते हुए कहा कि अगर इस मांग को नजरअंदाज किया गया तो यह मुद्दा राष्ट्रीय स्तर पर बड़ा आंदोलन बन सकता है।
नेताओं और पदाधिकारियों की मौजूदगी
इस दौरान उपाध्यक्ष पी.एस. पटेल, महिला प्रदेशाध्यक्ष मणि बेन पटेल और महामंत्री शर्मिला माली सहित कई पदाधिकारी मौजूद रहे और सभी ने एक सुर में इस मांग का समर्थन किया।
अब नजर संसद पर
उदयपुर से उठी यह आवाज अब सीधे संसद के दरवाजे तक पहुंच गई है।
क्या सरकार महिला आरक्षण में सामाजिक न्याय का संतुलन बनाएगी या यह मांग बनेगी बड़ा राजनीतिक मुद्दा—इस पर देशभर की नजरें टिकी हैं।
