राजस्थान में पंचायतीराज निकाय चुनाव का स्पेस खत्म: 23 सितंबर से बजेगा पंचायत चुनाव का बिगुल, 17 अगस्त से निकाय चुनाव की शुरुआत; 15 नवंबर तक पूरी होगी चुनावी प्रक्रिया, गांव-गांव जमेगी राजनीति की चौपाल
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एनपी न्यूज 24/ गजेन्द्र लोहार, डेस्क

जयपुर। राजस्थान में लंबे समय से पंचायत राज संस्थाओं और नगरीय निकाय चुनाव का इंतजार कर रहे लाखों मतदाताओं, जनप्रतिनिधियों और संभावित उम्मीदवारों के लिए बड़ी खबर सामने आई है। राजस्थान हाईकोर्ट में राज्य सरकार की ओर से प्रस्तुत प्रस्तावित चुनाव कार्यक्रम ने प्रदेश की राजनीति में नई हलचल पैदा कर दी है। यदि राज्य निर्वाचन आयोग इसी कार्यक्रम पर अंतिम मुहर लगाता है तो 17 अगस्त से निकाय चुनाव और 23 सितंबर से पंचायत चुनाव की प्रक्रिया शुरू हो जाएगी। इसके साथ ही करीब तीन महीने तक पूरा राजस्थान चुनावी रंग में रंगा रहेगा।

करीब डेढ़ साल से पंचायतों और निकायों के चुनाव टलने के कारण प्रदेशभर में राजनीतिक गतिविधियां धीमी पड़ी हुई थीं। लेकिन अब चुनावी कार्यक्रम सामने आने के बाद गांवों से लेकर शहरों तक राजनीतिक चर्चाओं का दौर तेज हो गया है। चाय की थड़ियों, गांव की चौपालों, खेत-खलिहानों और बाजारों में अब विकास कार्यों से ज्यादा चर्चा इस बात की हो रही है कि इस बार किसे टिकट मिलेगा, कौन चुनाव लड़ेगा और किसकी जीत तय मानी जा रही है।

राजस्थान हाईकोर्ट ने चुनाव में हुई देरी को गंभीरता से लेते हुए राज्य सरकार और राज्य निर्वाचन आयोग से चुनाव कराने की समय-सीमा मांगी थी। इसके बाद सरकार ने अदालत के समक्ष पंचायत और निकाय चुनाव का विस्तृत प्रस्तावित कार्यक्रम प्रस्तुत किया। इसी कार्यक्रम के आधार पर अब पूरे प्रदेश में चुनाव की तैयारियां शुरू होने की संभावना जताई जा रही है।

प्रस्तावित कार्यक्रम के अनुसार सबसे पहले नगरीय निकाय चुनाव होंगे। 17 अगस्त को चुनाव की घोषणा प्रस्तावित है। इसके बाद 22 अगस्त को अधिसूचना जारी होगी। 27 अगस्त तक नामांकन पत्र दाखिल किए जाएंगे। 29 अगस्त को नामांकन पत्रों की जांच होगी। 31 अगस्त को नाम वापसी होगी तथा 1 सितंबर को चुनाव चिन्ह आवंटित किए जाएंगे। इसके बाद 6 सितंबर और 9 सितंबर को दो चरणों में मतदान कराया जाएगा। 11 सितंबर को मतगणना होगी, जबकि 19 सितंबर को अध्यक्ष और 20 सितंबर को उपाध्यक्ष पद का चुनाव प्रस्तावित है।

निकाय चुनाव की प्रक्रिया पूरी होते ही पंचायत चुनाव का बिगुल बज जाएगा। प्रस्तावित कार्यक्रम के अनुसार 23 सितंबर को पंचायत चुनाव की घोषणा होगी। 28 सितंबर को अधिसूचना जारी होगी। 1 अक्टूबर तक नामांकन पत्र जमा किए जाएंगे। 3 अक्टूबर को नामांकन पत्रों की जांच होगी और 5 अक्टूबर को नाम वापसी के साथ चुनाव चिन्हों का आवंटन कर अंतिम प्रत्याशियों की सूची जारी कर दी जाएगी। इसके बाद गांव-गांव चुनाव प्रचार पूरे शबाब पर पहुंच जाएगा।

प्रशासनिक व्यवस्था को देखते हुए पंचायत चुनाव चार चरणों में कराने का प्रस्ताव रखा गया है। जिला परिषद और पंचायत समिति सदस्यों के लिए 13 अक्टूबर, 23 अक्टूबर, 29 अक्टूबर और 3 नवंबर को मतदान होगा। पंच एवं सरपंच पद के लिए 14 अक्टूबर, 24 अक्टूबर, 30 अक्टूबर और 4 नवंबर को मतदान कराया जाएगा। उपसरपंच का चुनाव 15 अक्टूबर, 25 अक्टूबर, 31 अक्टूबर और 5 नवंबर को कराया जाएगा।

मतदान से पहले मतदान दलों का प्रस्थान भी चार चरणों में होगा। पहले चरण के लिए 12 अक्टूबर, दूसरे चरण के लिए 22 अक्टूबर, तीसरे चरण के लिए 28 अक्टूबर और चौथे चरण के लिए 2 नवंबर को मतदान दल रवाना होंगे। जिला प्रशासन, पुलिस और निर्वाचन विभाग इन तिथियों के अनुसार अपनी तैयारियां पूरी करेगा।

मतदान समाप्त होने के बाद 12 नवंबर को पंचायत समिति और जिला परिषद सदस्यों की मतगणना जिला मुख्यालयों पर होगी। इसके बाद 14 नवंबर को प्रधान एवं जिला प्रमुख तथा 15 नवंबर को उपप्रधान एवं उप जिला प्रमुख का निर्वाचन कराया जाएगा। यानी यदि कार्यक्रम में कोई बदलाव नहीं हुआ तो 15 नवंबर तक पूरे राजस्थान में नई पंचायत सरकारें अस्तित्व में आ जाएंगी।

चुनावी कार्यक्रम सामने आते ही गांवों का माहौल पूरी तरह बदलने लगा है। जो लोग अब तक सामाजिक कार्यक्रमों तक सीमित थे, वे अब सक्रिय होकर जनसंपर्क में जुटने लगे हैं। संभावित उम्मीदवार घर-घर पहुंच रहे हैं। पुराने राजनीतिक समीकरण फिर से बन रहे हैं। जातीय, सामाजिक और स्थानीय स्तर पर बैठकों का दौर शुरू हो चुका है। गांवों में शाम ढलते ही चौपालों पर चुनावी चर्चाएं शुरू हो जाती हैं। कौन सरपंच बनेगा, कौन वार्ड पंच, किसे पंचायत समिति भेजा जाएगा और जिला परिषद में किसकी दावेदारी मजबूत रहेगी—ऐसे सवाल हर चौपाल पर सुनाई देने लगे हैं।

राजनीतिक दलों ने भी संगठन को सक्रिय करना शुरू कर दिया है। भाजपा, कांग्रेस सहित अन्य दल संभावित उम्मीदवारों की सूची तैयार करने में जुट गए हैं। स्थानीय नेताओं के दौरे बढ़ गए हैं और संगठनात्मक बैठकों का दौर तेज हो गया है। पंचायत चुनाव को आगामी विधानसभा चुनाव का सेमीफाइनल भी माना जा रहा है, इसलिए सभी दल इसे प्रतिष्ठा का चुनाव मानकर तैयारी कर रहे हैं।

चुनाव कार्यक्रम जारी होते ही संबंधित क्षेत्रों में आदर्श आचार संहिता लागू हो जाएगी। इसके बाद सरकार नई योजनाओं की घोषणा, शिलान्यास, उद्घाटन, नई स्वीकृतियां और तबादले जैसे निर्णय नहीं ले सकेगी। यही कारण है कि विभिन्न विभागों में लंबित प्रस्तावों और विकास कार्यों को जल्द पूरा करने की कवायद भी तेज हो गई है।

हालांकि यह पूरा कार्यक्रम राज्य सरकार द्वारा हाईकोर्ट में प्रस्तुत प्रस्तावित समय-सारिणी पर आधारित है। अंतिम और वैधानिक चुनाव कार्यक्रम राजस्थान राज्य निर्वाचन आयोग द्वारा आधिकारिक अधिसूचना जारी होने के बाद ही प्रभावी माना जाएगा। यदि आयोग इसी कार्यक्रम को मंजूरी देता है तो अगस्त से नवंबर तक राजस्थान में लोकतंत्र का सबसे बड़ा उत्सव देखने को मिलेगा और गांव-गांव में फिर से राजनीति की चौपाल सजती नजर आएगी।