गोरण, आवरड़ा, देवड़ावास, गरणवास और बागपुरा में ग्रामीण परेशान, बिछीवाड़ा में 15 से अधिक हेडपंपों की मरम्मत के लिए भेजा गया प्रस्ताव
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एनपी न्यूज 24/ गजेन्द्र मालवीय, डेस्क

भीषण गर्मी में झाड़ोल-फलासिया क्षेत्र में पेयजल संकट गहराया, कई गांवों के हेडपंप वर्षों से बंद

गजेन्द्र मालवीय डेस्क। गर्मी का पारा लगातार बढ़ने के साथ ही झाड़ोल-फलासिया क्षेत्र में पेयजल संकट भी गहराने लगा है। क्षेत्र की कई ग्राम पंचायतों में सार्वजनिक हेडपंप लंबे समय से खराब पड़े हैं, जिससे ग्रामीणों को पेयजल के लिए भारी परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है। कई गांवों में लोग आज भी पानी के लिए दूर-दूर तक भटकने को मजबूर हैं, जबकि कुछ स्थानों पर जिम्मेदार विभागों की ओर से अब तक कोई ठोस कार्रवाई नहीं हो सकी है।

झाड़ोल फलासिया क्षेत्र के विभिन्न गांवों से प्राप्त जानकारी के अनुसार ग्राम पंचायत गोरण की मेघवाल बस्ती में सार्वजनिक हेडपंप पिछले करीब तीन वर्षों से बंद पड़ा हुआ है। यह हेडपंप बस्ती के लोगों के लिए पेयजल का प्रमुख स्रोत था, लेकिन खराब होने के बाद से ग्रामीणों को अन्य स्रोतों पर निर्भर रहना पड़ रहा है। कई बार शिकायतें करने के बावजूद समस्या का समाधान नहीं हो पाया है।

इसी प्रकार बागपुरा पेट्रोल पंप के सामने स्थित सार्वजनिक हेडपंप भी लंबे समय से खराब पड़ा है। यह हेडपंप आसपास के ग्रामीणों के साथ-साथ राहगीरों के लिए भी पानी का महत्वपूर्ण साधन था। हेडपंप बंद होने से लोगों को गर्मी के मौसम में परेशानी झेलनी पड़ रही है।

ग्राम पंचायत आवरड़ा के कटारा फला एवं कालबेलिया बस्ती में भी हेडपंप खराब होने से करीब 40 परिवार प्रभावित हैं। ग्रामीणों का कहना है कि क्षेत्र में वैकल्पिक जल स्रोत सीमित होने के कारण उन्हें काफी दूर से पानी लाना पड़ रहा है। महिलाओं और बच्चों को सबसे अधिक कठिनाई का सामना करना पड़ रहा है।

वहीं ग्राम पंचायत देवड़ावास के शिशवी गांव में एकमात्र सार्वजनिक हेडपंप करीब दो वर्षों से खराब पड़ा हुआ है। इस हेडपंप पर लगभग 50 परिवार निर्भर थे, लेकिन लंबे समय से मरम्मत नहीं होने के कारण ग्रामीणों की परेशानी लगातार बढ़ रही है। गांव के लोगों का कहना है कि कई बार विभागीय अधिकारियों को अवगत कराने के बावजूद कोई स्थायी समाधान नहीं निकला।

ग्राम पंचायत गरणवास के भामटी हाईवे बाईपास चौराहे पर स्थित सार्वजनिक हेडपंप भी पिछले तीन माह से खराब पड़ा है। इस हेडपंप से आसपास के करीब 15 परिवारों की पेयजल आवश्यकता पूरी होती थी। वर्तमान में ग्रामीणों को दूसरे स्रोतों से पानी लाना पड़ रहा है, जिससे समय और श्रम दोनों की बर्बादी हो रही है।

हालांकि इन समस्याओं के बीच एक सकारात्मक पहल भी सामने आई है। ग्राम पंचायत बिछीवाड़ा में पेयजल संकट को देखते हुए ग्राम विकास अधिकारी भैरूलाल मेघवाल ने पंचायत क्षेत्र में खराब पड़े 15 से अधिक हेडपंपों की मरम्मत करवाने के लिए विकास अधिकारी, पंचायत समिति फलासिया को लिखित आवेदन प्रस्तुत किया है। आवेदन में मुख्य बाजार, आयुर्वेद अस्पताल, पटवार मंडल कार्यालय सहित विभिन्न सार्वजनिक स्थानों पर खराब पड़े हेडपंपों को शीघ्र दुरुस्त करवाने की मांग की गई है।

ग्रामीणों का कहना है कि यदि बिछीवाड़ा की तरह अन्य ग्राम पंचायतों में भी समस्याओं को गंभीरता से लेते हुए प्रस्ताव भेजे जाएं और विभाग समय पर कार्रवाई करे, तो हजारों लोगों को राहत मिल सकती है। वर्तमान में झाड़ोल-फलासिया क्षेत्र के अनेक गांवों में पेयजल संकट लोगों की सबसे बड़ी चिंता बना हुआ है।

NP NEWS 24 के "समस्या बताओ, समाधान पाओ" अभियान के तहत लगातार सामने आ रही इन समस्याओं ने ग्रामीण क्षेत्रों की वास्तविक स्थिति उजागर कर दी है। जहां एक ओर लोग वर्षों से खराब पड़े हेडपंपों के कारण परेशान हैं, वहीं दूसरी ओर कुछ पंचायतों द्वारा समाधान की दिशा में उठाए गए कदम उम्मीद की नई किरण लेकर आए हैं।