रिपोर्ट - बबलू वेद, झाड़ोल
सोमरंजन फाउंडेशन की अनूठी पहल, 600 से अधिक विद्यार्थियों ने सीखे फ़िल्म मेकिंग और डिजिटल स्किल्स के गुर
'फ़िल्म-इन-एजुकेशन' से ग्रामीण प्रतिभाओं को मिली नई उड़ान, उदयपुर के सरकारी स्कूलों में डिजिटल क्रांति की शुरुआत
झाड़ोल /उदयपुर।
शिक्षा अब केवल किताबों तक सीमित नहीं रही, बल्कि रचनात्मकता, तकनीक और आत्मविश्वास का माध्यम बन रही है। इसी सोच को साकार करते हुए सोमरंजन फाउंडेशन ने बुबुगाओ कम्युनिकेशन (वीवो राजस्थान) के सीएसआर सहयोग से उदयपुर जिले के ग्रामीण क्षेत्रों में 'फ़िल्म-इन-एजुकेशन स्किल डेवलपमेंट प्रोग्राम' का सफल आयोजन किया। इस अभिनव पहल ने दूर-दराज़ के सरकारी विद्यालयों के 600 से अधिक विद्यार्थियों को पहली बार मोबाइल फ़िल्म मेकिंग और डिजिटल कंटेंट क्रिएशन की दुनिया से परिचित कराया।
यह कार्यक्रम केवल प्रशिक्षण नहीं, बल्कि ग्रामीण प्रतिभाओं को आधुनिक तकनीक से जोड़कर उन्हें भविष्य के अवसरों के लिए तैयार करने की एक दूरदर्शी पहल साबित हुआ। बच्चों ने अपने हाथों में मोबाइल कैमरा थामा, कहानियाँ गढ़ीं, अभिनय किया और सीखा कि एक साधारण मोबाइल भी उनके सपनों को नई पहचान दे सकता है।
ग्रामीण स्कूलों में पहुँची फ़िल्म मेकिंग की क्लास
जुलाई माह के दौरान यह विशेष प्रशिक्षण तीन सरकारी विद्यालयों में आयोजित किया गया—
राजकीय उच्च प्राथमिक विद्यालय, कीरट
महात्मा गांधी राजकीय विद्यालय, मगवास
स्वामी विवेकानंद राजकीय मॉडल स्कूल, झाड़ोल
इन विद्यालयों के विद्यार्थियों ने पूरे उत्साह के साथ प्रशिक्षण में भाग लेकर अपनी रचनात्मक प्रतिभा का परिचय दिया।
जयपुर के विशेषज्ञों ने सिखाए फ़िल्म निर्माण के आधुनिक गुर
कार्यशाला में जयपुर से आए अनुभवी फ़िल्म विशेषज्ञों ने विद्यार्थियों को व्यावहारिक प्रशिक्षण दिया।
मुख्य प्रशिक्षक रहे—
नवीन शर्मा (फ़िल्म निर्माता एवं अभिनेता)
मौलश्री (फ़िल्म निर्माता एवं अभिनेत्री)
सुनाक्षी (प्रशिक्षक)
दिव्यांश (प्रशिक्षक)
विशेषज्ञों ने बच्चों को कैमरे के सामने और पीछे दोनों भूमिकाओं का अनुभव कराया।
मोबाइल से सीखी आधुनिक डिजिटल स्किल्स
वीवो कैमरा फ़ोन के माध्यम से विद्यार्थियों को—
मोबाइल फ़िल्म मेकिंग
कैमरा संचालन एवं फ्रेमिंग
वीडियो शूटिंग तकनीक
कैमरा एक्टिंग
स्टोरीटेलिंग
कंटेंट क्रिएशन
पब्लिक स्पीकिंग
विज़ुअल कम्युनिकेशन
रचनात्मक सोच एवं इमैजिनेशन
जैसी आधुनिक डिजिटल स्किल्स का व्यावहारिक प्रशिक्षण दिया गया।
डॉ. बेला मलिक ने दिया आत्मविश्वास और नेतृत्व का मंत्र
सोमरंजन फाउंडेशन की डायरेक्टर डॉ. बेला मलिक ने विशेष मेडिटेशन सत्र आयोजित करते हुए विद्यार्थियों को मानसिक मजबूती, आत्मविश्वास, सकारात्मक सोच और नेतृत्व क्षमता विकसित करने के लिए प्रेरित किया। उन्होंने कहा कि आज के दौर में किताबों के साथ डिजिटल और रचनात्मक कौशल भी सफलता की मजबूत नींव हैं।
ग्रामीण शिक्षा में नई क्रांति
600+ विद्यार्थियों को मिला आधुनिक डिजिटल प्रशिक्षण।
पहली बार ग्रामीण बच्चों ने सीखी मोबाइल फ़िल्म मेकिंग।
सरकारी विद्यालयों में पहुँची फ़िल्म निर्माण की शिक्षा।
कैमरा, अभिनय और कंटेंट क्रिएशन का मिला व्यावहारिक अनुभव।
डिजिटल इंडिया के सपनों को ग्रामीण अंचल तक पहुँचाने की सफल पहल।
"गांव की प्रतिभा को यदि सही मंच और आधुनिक तकनीक मिले तो वही बच्चे भविष्य के सफल फ़िल्मकार, कंटेंट क्रिएटर और डिजिटल उद्यमी बन सकते हैं।"
— डॉ. बेला मलिक, डायरेक्टर, सोमरंजन फाउंडेशन
सहयोग का सराहनीय उदाहरण
इस कार्यक्रम को सफल बनाने में वीवो टीम के मनीष जोशी और विकास कुलश्रेष्ठ का विशेष सहयोग रहा। भाग लेने वाले विद्यालयों के प्राचार्यों और शिक्षकों ने सोमरंजन फाउंडेशन, वीवो राजस्थान और सभी प्रशिक्षकों का आभार व्यक्त करते हुए इसे ग्रामीण शिक्षा के क्षेत्र में एक मील का पत्थर बताया।
