पर्युषण पर्व के छठे दिन गूंजा उत्तम संयम धर्म का संदेश, धर्म आराधना के साथ खेल-कूद और सांस्कृतिक कार्यक्रमों ने बांधा समां
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रिपोर्ट - बबलू वेद, झाड़ोल

झाड़ोल। पर्युषण महापर्व के छठे दिन उत्तम संयम धर्म की आराधना श्रद्धा, भक्ति और उत्साह के साथ की गई। श्री 1008 श्रेयांसनाथ दिगम्बर जैन मंदिर, थोबावाड़ा में दिनभर धार्मिक अनुष्ठानों का दौर चला। मंदिर परिसर में श्रद्धालुओं ने विधि-विधान के साथ पूजा-अर्चना कर भगवान के समक्ष अपनी आस्था प्रकट की और उत्तम संयम धर्म के संदेश को जीवन में आत्मसात करने का संकल्प लिया।


पर्युषण महापर्व के दौरान संयम को आत्मशुद्धि और आध्यात्मिक उन्नति का महत्वपूर्ण मार्ग माना जाता है। इसी भाव के साथ मंदिर में आयोजित धार्मिक कार्यक्रमों में श्रद्धालुओं ने उत्साहपूर्वक भाग लिया। पूजा-पाठ एवं धार्मिक अनुष्ठानों से पूरा मंदिर परिसर भक्तिमय वातावरण से सराबोर रहा। श्रद्धालुओं ने धर्म आराधना के साथ आत्मसंयम, सदाचार और धार्मिक संस्कारों को अपने जीवन में उतारने का संदेश दिया।


आरती के बाद सजा मनोरंजन और ज्ञानवर्धक कार्यक्रमों का मंच


सायंकाल आरती के पश्चात मंदिर परिसर में बच्चों, महिलाओं, पुरुषों एवं बुजुर्गों के लिए विभिन्न मनोरंजक, ज्ञानवर्धक एवं सांस्कृतिक कार्यक्रम आयोजित किए गए। जैन धर्म से संबंधित क्विज प्रतियोगिता ने जहां प्रतिभागियों के धार्मिक ज्ञान को परखा, वहीं नींबू रेस और कुर्सी रेस जैसी प्रतियोगिताओं ने माहौल में उत्साह और उमंग भर दी।


इसके साथ ही नाटक सहित विभिन्न सांस्कृतिक प्रस्तुतियों ने उपस्थित समाजजनों का खूब मनोरंजन किया। प्रतियोगिताओं में बच्चों से लेकर बुजुर्गों तक ने बढ़-चढ़कर हिस्सा लिया। प्रतिभागियों के उत्साह और दर्शकों की तालियों से कार्यक्रम स्थल देर शाम तक जीवंत बना रहा।


धर्म के साथ संस्कार और सामाजिक एकजुटता का संदेश


पर्युषण पर्व के अवसर पर आयोजित इन कार्यक्रमों की खास बात यह रही कि धार्मिक आयोजनों के साथ समाज के प्रत्येक वर्ग को जोड़ने का प्रयास किया गया। बच्चों के लिए ज्ञानवर्धक प्रतियोगिताओं से लेकर महिलाओं, पुरुषों और बुजुर्गों के लिए मनोरंजक गतिविधियों तक सभी को सहभागिता का अवसर मिला। इससे धार्मिक वातावरण के साथ पारिवारिक मेलजोल और सामाजिक सहभागिता का भी संदेश सामने आया।


कार्यक्रम में समाजजनों की सक्रिय भागीदारी ने आयोजन को और अधिक प्रभावशाली बना दिया। मंदिर परिसर में दिनभर जहां पूजा-अर्चना और धार्मिक अनुष्ठानों से आध्यात्मिक वातावरण बना रहा, वहीं शाम को खेल एवं सांस्कृतिक कार्यक्रमों ने उत्सव में नई ऊर्जा भर दी।


राहुल सेठ ने बताया कि पर्युषण महापर्व केवल धार्मिक आराधना का पर्व नहीं, बल्कि आत्मसंयम, संस्कार, आपसी प्रेम, सहभागिता और सद्भाव को मजबूत करने का अवसर भी है। पर्व के माध्यम से समाज की नई पीढ़ी को धार्मिक संस्कारों और जैन धर्म के मूल सिद्धांतों से जोड़ने के साथ ही सामाजिक एकता और भाईचारे को बढ़ावा देने का प्रयास किया जा रहा है।


उत्तम संयम धर्म के अवसर पर आयोजित कार्यक्रम ने यह संदेश दिया कि धार्मिक पर्व केवल पूजा-पाठ तक सीमित नहीं रहते, बल्कि समाज को संस्कार, अनुशासन, आत्मसंयम और आपसी सौहार्द से जोड़ने का माध्यम भी बनते हैं। थोबावाड़ा में आयोजित कार्यक्रम इसी धार्मिक भावना और सामाजिक सहभागिता का जीवंत उदाहरण बना।