रिपोर्ट - बबलू वेद, झाड़ोल
झाड़ोल। उपखंड क्षेत्र के आवरड़ा गांव में मां चामुंडा माताजी के प्रति श्रद्धा और भक्ति का ऐसा अद्भुत संगम देखने को मिला, जहां देर रात तक पूरा मंदिर परिसर माता के जयकारों और भजनों की गूंज से भक्तिमय बना रहा। मां चामुंडा माताजी मंदिर प्रांगण में आयोजित विशाल भजन संध्या में हजारों श्रद्धालुओं ने भाग लेकर माता के दर्शन किए और सुख-समृद्धि, खुशहाली एवं परिवार की मंगलकामना के साथ आशीर्वाद प्राप्त किया। प्रख्यात भजन गायक भगवत सुथार की सुमधुर प्रस्तुतियों ने ऐसा समां बांधा कि श्रद्धालु भक्ति रस में डूबकर देर रात तक झूमते नजर आए।
भजन संध्या के दौरान मंदिर परिसर में श्रद्धालुओं की आवाजाही बनी रही। मां चामुंडा के जयकारों और भक्तिमय वातावरण ने पूरे आयोजन को विशेष बना दिया। जैसे-जैसे भजनों की स्वर लहरियां गूंजती गईं, वैसे-वैसे श्रद्धालुओं का उत्साह भी बढ़ता गया। माता की आराधना में लीन भक्तों ने भजनों के माध्यम से अपनी श्रद्धा व्यक्त की। आयोजन में ग्रामीण क्षेत्र की धार्मिक परंपराओं, सामूहिक आस्था और सामाजिक एकजुटता की झलक भी देखने को मिली।
भगवत सुथार के भजनों ने बांधा समां, देर रात तक झूमते रहे भक्त
भजन संध्या का मुख्य आकर्षण प्रख्यात भजन गायक भगवत सुथार रहे। उन्होंने अपनी मधुर आवाज और भावपूर्ण गायकी से मां चामुंडा की महिमा का गुणगान करते हुए एक से बढ़कर एक भजनों की प्रस्तुतियां दीं। उनकी प्रस्तुतियों ने उपस्थित श्रद्धालुओं को मंत्रमुग्ध कर दिया। भक्ति गीतों की गूंज के बीच श्रद्धालु माता की भक्ति में लीन होकर झूमते और जयकारे लगाते नजर आए।
मंदिर परिसर में देर रात तक भक्ति और उत्साह का माहौल बना रहा। श्रद्धालुओं के लिए यह आयोजन केवल मनोरंजन का अवसर नहीं, बल्कि मां चामुंडा के प्रति अपनी आस्था प्रकट करने और धार्मिक परंपराओं से जुड़ने का विशेष अवसर भी रहा। भजन संध्या के माध्यम से पूरे क्षेत्र में भक्तिमय वातावरण छाया रहा।
भजन गायक भगवत सुथार और उनकी टीम का किया सम्मान
धार्मिक आयोजन के दौरान मां चामुंडा के भोपाजी ने भजन गायक भगवत सुथार सहित उनकी पूरी टीम का पारंपरिक तरीके से स्वागत किया। माला, उपरना और साफा पहनाकर कलाकारों का सम्मान किया गया। इस दौरान कलाकारों के प्रति आभार व्यक्त करते हुए उनके योगदान की सराहना की गई।
राजस्थान की लोक एवं भक्ति संगीत परंपरा में साफा और उपरना पहनाकर सम्मान करना विशेष महत्व रखता है। आवरड़ा में भी इसी परंपरा के अनुरूप कलाकारों का अभिनंदन किया गया। भजन संध्या में उमड़ी श्रद्धालुओं की भीड़ और कलाकारों के प्रति सम्मान ने आयोजन की गरिमा को और बढ़ाया।
महाआरती और हवन के बाद विधि-विधान से हुआ ज्वारा विसर्जन
भजन संध्या के पश्चात सोमवार शाम 4 बजे मां चामुंडा माताजी मंदिर परिसर में महाआरती एवं हवन का आयोजन किया गया। धार्मिक अनुष्ठानों के दौरान श्रद्धालुओं ने माता की आराधना की और क्षेत्र में सुख-शांति, समृद्धि तथा खुशहाली की कामना की। महाआरती के दौरान भक्ति और श्रद्धा का वातावरण बना रहा।
हवन एवं अन्य धार्मिक अनुष्ठानों के पश्चात विधि-विधान से ज्वारा विसर्जन किया गया। इसके साथ ही धार्मिक आयोजन का समापन हुआ। पूरे कार्यक्रम में परंपरागत रीति-रिवाजों और धार्मिक मान्यताओं के प्रति श्रद्धालुओं की गहरी आस्था देखने को मिली।
आस्था, परंपरा और सामाजिक एकजुटता का प्रतीक बना आयोजन
आवरड़ा स्थित मां चामुंडा माताजी मंदिर में आयोजित इस धार्मिक कार्यक्रम ने एक बार फिर ग्रामीण अंचल में देवी आराधना की परंपरा और सामूहिक आस्था की मजबूत तस्वीर प्रस्तुत की। हजारों श्रद्धालुओं का माता के दर्शन के लिए पहुंचना इस आयोजन के प्रति लोगों की श्रद्धा को दर्शाता है।
भजन संध्या में जहां भक्ति संगीत ने श्रद्धालुओं को भावविभोर किया, वहीं महाआरती, हवन और ज्वारा विसर्जन ने धार्मिक आयोजन को पारंपरिक स्वरूप प्रदान किया। ऐसे आयोजन ग्रामीण समाज में धार्मिक परंपराओं को आगे बढ़ाने के साथ लोगों को एक मंच पर जोड़ने का माध्यम भी बनते हैं।
मां चामुंडा के जयकारों, भजनों की गूंज और श्रद्धालुओं की अटूट आस्था के बीच आवरड़ा का यह आयोजन भक्तिमय वातावरण की यादगार छाप छोड़ गया। हजारों श्रद्धालुओं ने माता के दर्शन कर आशीर्वाद लिया और सुख-समृद्धि की कामना के साथ अपने आराध्य के प्रति श्रद्धा व्यक्त की।
