रिपोर्ट - बबलू वेद, झाड़ोल
झाड़ोल। किसानों की मेहनत, खेतों में खड़ी फसल और पशुधन के भविष्य से जुड़े झाड़ोल तालाब से नहर खोलने के मुद्दे ने अब जोर पकड़ लिया है। किसानों को सिंचाई के लिए समय पर पानी उपलब्ध करवाने की मांग को लेकर ग्राम पंचायत गोदाणा और ग्राम पंचायत आवरड़ा के सरपंच एकजुट होकर प्रशासन के सामने खड़े हो गए हैं। वहीं किसान संघ झाड़ोल ने भी इस मामले में मोर्चा खोलते हुए प्रशासन से तत्काल नहर खोलने की मांग की है। शुक्रवार को उपखंड आवास पर पहुंचकर किसानों एवं जनप्रतिनिधियों ने उपखंड अधिकारी चिमन लाल मीणा तथा तहसीलदार सीताराम बोलीवाल को ज्ञापन सौंपा।
ग्राम पंचायत गोदाणा के सरपंच कालूलाल चव्हाण और ग्राम पंचायत आवरड़ा की सरपंच रेखा देवी बोदरिया ने अलग-अलग ज्ञापन देकर स्पष्ट कर दिया कि किसानों की सिंचाई की समस्या को अब नजरअंदाज नहीं किया जाना चाहिए। दोनों सरपंचों ने किसानों के हितों को सर्वोपरि बताते हुए झाड़ोल तालाब से नहर खोलकर पानी उपलब्ध करवाने की मांग की है। किसान संघ की ओर से भी इस मांग को मजबूती से उठाया गया है। ज्ञापन में किसानों ने चेतावनी दी है कि यदि समय रहते उनकी मांग पर सकारात्मक निर्णय नहीं लिया गया तो किसानों के हित में आंदोलन का रास्ता अपनाया जाएगा।
पांच राजस्व गांवों की खेती का सवाल, आखिर कब खुलेगी नहर?
इस पूरे मामले का सीधा संबंध गोदाणा और आवरड़ा क्षेत्र के किसानों से है। ज्ञापन में बताया गया है कि गणेशपुरा, आवरड़ा, लीलावास, गोदाणा और महादेवजी का काड़ सहित संबंधित राजस्व गांवों में झाड़ोल तालाब से निकलने वाली नहर के माध्यम से सिंचाई की जाती है। इन गांवों के किसानों की खेती काफी हद तक समय पर मिलने वाले सिंचाई के पानी पर निर्भर है।
किसानों का कहना है कि फसल को जिस समय पानी की आवश्यकता होती है, उसी समय नहर से पानी उपलब्ध करवाना जरूरी है। यदि सिंचाई का समय निकल गया तो बाद में नहर खोलने का कोई विशेष लाभ नहीं मिलेगा। फसल की बढ़वार प्रभावित होने के साथ उत्पादन में कमी आने की आशंका भी बनी रहेगी। ऐसे में किसानों के सामने आर्थिक संकट खड़ा हो सकता है।
ग्रामीण किसानों के लिए खेती केवल एक व्यवसाय नहीं, बल्कि परिवार के भरण-पोषण और पूरे साल की आजीविका का आधार है। किसान बीज, खाद, जुताई और मजदूरी पर पहले ही खर्च कर चुका होता है। ऐसे में अंतिम समय पर सिंचाई का पानी नहीं मिलना उसकी पूरी मेहनत और पूंजी को जोखिम में डाल सकता है।
झाड़ोल तालाब में लीकेज की समस्या, मार्च-अप्रैल तक पानी बचा पाना मुश्किल!
किसानों और दोनों ग्राम पंचायतों के सरपंचों ने प्रशासन के सामने सबसे महत्वपूर्ण सवाल झाड़ोल तालाब में हो रहे लीकेज को लेकर उठाया है। ज्ञापन में बताया गया है कि तालाब में लीकेज होने के कारण मार्च-अप्रैल तक पानी सुरक्षित रख पाना मुश्किल है।
यही वह मुद्दा है जिस पर किसानों ने प्रशासन का ध्यान आकर्षित किया है। किसानों का तर्क है कि यदि तालाब में पानी लंबे समय तक सुरक्षित रहने की स्थिति नहीं है तो उपलब्ध जल का समय रहते उपयोग किसानों के हित में किया जाना चाहिए। पानी रिसाव के कारण कम होने की आशंका के बीच यदि किसानों को जरूरत के समय सिंचाई का लाभ नहीं मिलता है तो इसका नुकसान सीधे खेती और पशुपालन पर पड़ेगा।
किसानों का सवाल है कि जब तालाब का पानी मार्च-अप्रैल तक सुरक्षित रहने की गारंटी नहीं है, तो फिर किसानों की वर्तमान जरूरत को प्राथमिकता क्यों नहीं दी जा रही? आखिर पानी का उपयोग किसके लिए और किस समय किया जाएगा? प्रशासन को तालाब की वास्तविक जल स्थिति, लीकेज और नहर व्यवस्था का तकनीकी आकलन करवाकर किसानों के हित में निर्णय लेना चाहिए।
फसल के साथ मवेशियों के चारे पर भी संकट की आशंका
इस मांग का महत्व केवल खेतों की सिंचाई तक सीमित नहीं है। ग्रामीण क्षेत्रों में खेती और पशुपालन एक-दूसरे के पूरक हैं। खेतों में फसल अच्छी होगी तो किसानों को अनाज के साथ पशुओं के लिए चारा भी उपलब्ध होगा। यदि सिंचाई के अभाव में फसल प्रभावित होती है तो उसका असर पशुपालक परिवारों पर भी पड़ना तय है।
क्षेत्र के अनेक परिवार खेती के साथ पशुपालन पर निर्भर हैं। ऐसे में सिंचाई के पानी का समय पर उपलब्ध होना उनके लिए बेहद जरूरी है। किसानों ने प्रशासन को अवगत करवाया है कि नहर से समय पर पानी मिलने से फसल और पशुओं के चारे दोनों की जरूरत पूरी करने में मदद मिलेगी।
इसलिए किसानों की मांग को केवल पानी छोड़ने की मांग मानकर नहीं देखा जाना चाहिए, बल्कि यह ग्रामीण अर्थव्यवस्था, किसानों की आजीविका और पशुधन के संरक्षण से जुड़ा विषय है।
दोनों सरपंच किसानों के समर्थन में मैदान में, किसान संघ ने भी दिखाई एकजुटता
इस मामले में सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि अब किसानों की आवाज केवल व्यक्तिगत स्तर तक सीमित नहीं रही। ग्राम पंचायत गोदाणा के सरपंच कालूलाल चव्हाण और आवरड़ा की सरपंच रेखा देवी बोदरिया ने अपने-अपने स्तर पर प्रशासन को पत्र देकर किसानों की समस्या उठाई है।
दोनों जनप्रतिनिधियों ने किसानों के हित में एक साथ आवाज बुलंद करते हुए प्रशासन से नहर खोलने की मांग की है। वहीं किसान संघ झाड़ोल के पदाधिकारियों और किसानों ने भी उपखंड अधिकारी एवं तहसीलदार को ज्ञापन सौंपकर इस मांग को मजबूती प्रदान की है।
यह घटनाक्रम बताता है कि नहर खोलने का मुद्दा अब क्षेत्र के किसानों और जनप्रतिनिधियों के लिए प्राथमिकता का विषय बन चुका है। किसानों को उम्मीद है कि प्रशासन उनकी समस्या को गंभीरता से समझेगा और समय रहते आवश्यक कदम उठाएगा।
प्रशासन के सामने सीधी चुनौती, केवल आश्वासन नहीं चाहिए समाधान!
अब सबसे बड़ा सवाल उपखंड प्रशासन और संबंधित जल संसाधन विभाग की भूमिका को लेकर है। किसानों ने अपनी समस्या लिखित रूप में प्रशासन तक पहुंचा दी है। दो ग्राम पंचायतों के सरपंचों ने भी आधिकारिक पत्रों के माध्यम से मांग रख दी है। ऐसे में अब प्रशासन की जिम्मेदारी है कि तालाब में उपलब्ध पानी, लीकेज की स्थिति, नहर की क्षमता और सिंचाई की वास्तविक जरूरतों का तत्काल आकलन करवाए।
प्रशासन को चाहिए कि संबंधित अधिकारियों की टीम मौके पर भेजकर तालाब और नहर व्यवस्था का निरीक्षण करवाए तथा किसानों को स्पष्ट बताए कि नहर कब खोली जाएगी और कितने समय तक पानी उपलब्ध करवाया जा सकता है।
किसानों को केवल आश्वासन नहीं, बल्कि जमीन पर दिखाई देने वाला समाधान चाहिए। खेती का समय निकल जाने के बाद दिया गया आश्वासन उनकी फसल और आर्थिक नुकसान की भरपाई नहीं कर सकता।
आंदोलन की चेतावनी से गरमाया मामला, अब फैसले का इंतजार
गोदाणा सरपंच कालूलाल चव्हाण और आवरड़ा सरपंच रेखा देवी बोदरिया ने किसानों के हितों को लेकर आंदोलन की चेतावनी दी है। किसान संघ ने भी ज्ञापन के माध्यम से अपनी मांग प्रशासन के सामने रखी है।
किसानों का स्पष्ट संदेश है कि झाड़ोल तालाब का पानी किसानों की जरूरत और जनहित को ध्यान में रखते हुए उपयोग में लिया जाना चाहिए। यदि समय पर नहर नहीं खोली गई और किसानों की समस्या का समाधान नहीं हुआ तो आंदोलन के माध्यम से अपनी आवाज बुलंद की जाएगी।
अब प्रशासन के पास किसानों की समस्या को गंभीरता से लेकर समय रहते समाधान करने का अवसर है। यदि मांग पर सकारात्मक कार्रवाई होती है तो इससे क्षेत्र के किसानों को बड़ी राहत मिल सकती है। वहीं निर्णय में देरी होने पर यह मुद्दा और व्यापक रूप ले सकता है।
सबसे बड़ा सवाल : तालाब में लीकेज है तो पानी बचाने की चिंता के साथ किसानों की वर्तमान जरूरत को प्राथमिकता क्यों नहीं?
झाड़ोल तालाब से नहर खोलने की मांग अब प्रशासन के लिए एक महत्वपूर्ण जनहित का विषय बन चुकी है। एक तरफ किसान अपनी फसल और पशुओं के चारे को लेकर चिंतित हैं, दूसरी तरफ तालाब में लीकेज के कारण भविष्य में पानी सुरक्षित रहने को लेकर सवाल खड़े हो रहे हैं।
ऐसे में प्रशासन को किसानों की मांग पर संवेदनशीलता दिखाते हुए तकनीकी तथ्यों के आधार पर जल्द निर्णय लेना चाहिए। पानी का उचित प्रबंधन ऐसा होना चाहिए जिससे उपलब्ध जल संसाधन का अधिकतम जनहित में उपयोग हो और किसानों को उनके जरूरत के समय सिंचाई का लाभ मिल सके।
फिलहाल निगाहें उपखंड अधिकारी चिमन लाल मीणा और संबंधित जल संसाधन विभाग पर टिकी हैं। अब देखना यह है कि किसानों की आवाज पर प्रशासन कब तक ठोस निर्णय लेता है। क्या झाड़ोल तालाब से किसानों के लिए नहर खुलेगी या फिर अपने हक की मांग को लेकर किसानों को आंदोलन के मैदान में उतरना पड़ेगा?
NP NEWS 24 | सच का सारथी
किसानों के हक, गांवों की आवाज और जनहित के मुद्दों पर हमारी नजर लगातार बनी रहेगी। क्योंकि सवाल सिर्फ तालाब के पानी का नहीं, बल्कि किसान की मेहनत, उसकी फसल और उसके परिवार की आजीविका का है।
