एक तारा टूटने से आसमान सूना नहीं होता…“भजन गाते-गाते थम गई आवाज… धनराज जोशी का निधन”
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एनपी न्यूज 24/ गजेन्द्र मालवीय, डेस्क

उदयपुर। कभी-कभी मंच पर कहे गए शब्द समय के साथ एक अजीब सच्चाई बनकर सामने आ जाते हैं। हल्दीघाटी के पास सेमल गांव में गुरुवार रात सजी भजन संध्या में निर्गुणी भजन गायक धनराज जोशी ने जब भावुक होकर कहा— “एक तारा टूटने से आसमान सूना नहीं होता…” —तो किसी ने कल्पना भी नहीं की थी कि यह उनके जीवन की अंतिम प्रस्तुति और अंतिम संदेश साबित होगा।

भींडर के पास बड़वाई गांव के निवासी धनराज जोशी उस रात अपने पूरे रंग में थे। भगवा साफा और सफेद धोती में सजे जोशी ने जैसे ही मंच संभाला, माहौल भक्ति में डूब गया। “मेरा टिकट क्यों लेता…” और “ऐसा-ऐसा लगन लिखाया…” जैसे उनके लोकप्रिय भजनों ने पूरी रात श्रद्धालुओं को मंत्रमुग्ध कर दिया। कार्यक्रम “नेरामंड बावजी के नाम” आयोजित था, और देर रात तक गांव-गांव से आए लोग उनके सुरों में खोए रहे। किसी को आभास तक नहीं था कि यह भजन संध्या उनके जीवन की अंतिम संध्या बन जाएगी।

कार्यक्रम समाप्त होने के बाद धनराज जोशी अपने साथियों के साथ उदयपुर की ओर रवाना हुए। बताया जा रहा है कि उनके बेटे और कुछ साथी पहले ही रास्ते में उदयपुर उतर गए थे, जिससे वे सुरक्षित बच गए। लेकिन शुक्रवार सुबह करीब 5 बजे, दरौली और एयरपोर्ट के बीच उनकी कार अचानक अनियंत्रित होकर पलट गई। हादसा इतना भीषण था कि मेवाड़ के इस लोकप्रिय स्वर की मौके पर ही जीवन-लीला समाप्त हो गई।

इस दुर्घटना में वाहन चालक राजेंद्र सोनेरी गंभीर रूप से घायल हो गए, जिन्हें तुरंत उदयपुर के अस्पताल में भर्ती कराया गया, जहां उनका उपचार जारी है। घटना की खबर फैलते ही पूरे क्षेत्र में शोक की लहर दौड़ गई। जिस आवाज़ ने वर्षों तक भक्ति की अलख जगाई, वह अचानक खामोश हो गई।

धनराज जोशी केवल एक गायक नहीं थे, बल्कि लोक आस्था और भावनाओं के संवाहक थे। उनकी गायकी में एक सादगी, एक सच्चाई और एक आध्यात्मिक गहराई थी, जो सीधे लोगों के हृदय को छू जाती थी। मेवाड़ और मारवाड़ के सैकड़ों गांवों में उनके भजन गूंजते रहे हैं। आज भी अनेक घरों में उनके स्वर श्रद्धा के साथ सुने जाते हैं।

उनकी लोकप्रियता केवल मंच तक सीमित नहीं रही। सोशल मीडिया पर भी उनका बड़ा प्रभाव था। इंस्टाग्राम पर उनके करीब 3.79 लाख फॉलोअर्स थे, जो उनके भजनों और सरल जीवन शैली से जुड़ाव महसूस करते थे। साधारण शिक्षा—कक्षा 8वीं तक—के बावजूद उन्होंने अपनी प्रतिभा और मेहनत से भजन जगत में एक विशेष पहचान बनाई। बचपन में ही स्कूल के मंच पर पहली बार गाने का अवसर मिला और वहीं से उनके संगीत सफर की शुरुआत हुई।

उनकी भक्ति की जड़ें उनके परिवार से ही जुड़ी थीं। उनके नाना-नानी और उनकी मां भोली बाई भी भजन गायक थीं। चार बहनों के बीच वे इकलौते भाई थे। बहनें भी भजन गाती थीं, लेकिन जो पहचान और लोकप्रियता धनराज जोशी को मिली, वह उन्हें विशिष्ट बनाती है। उनके परिवार में दो बेटे—गणपत और सोनू—और एक बेटी किरण हैं, जो अब इस अपूरणीय क्षति के साथ जीवन आगे बढ़ाने को मजबूर हैं।

धनराज जोशी के निधन पर भजन जगत और उनके चाहने वालों में गहरा शोक है। इसी क्रम में भजन गायक जगदीश वैष्णव ने रात्रि सत्संग में उन्हें भावभीनी श्रद्धांजलि अर्पित की। सत्संग के दौरान उन्होंने भावुक होकर कहा—

“आज बुद्ध पूर्णिमा का पावन दिन है। ऐसे में धनराज जोशी जी का जाना अत्यंत दुःखद है। भगवान उनकी आत्मा को शांति प्रदान करें।”

उन्होंने आगे कहा कि जोशी जी का स्वर केवल संगीत नहीं था, बल्कि वह भक्ति का एक जीवंत रूप था, जो हमेशा लोगों के दिलों में गूंजता रहेगा। उनके अनुसार, यह क्षति भजन जगत के लिए अपूरणीय है और लंबे समय तक महसूस की जाएगी।

आज जब धनराज जोशी हमारे बीच नहीं हैं, तब उनके शब्द और उनके भजन ही उनकी पहचान बनकर रह गए हैं। सच ही कहा था उन्होंने— “एक तारा टूटने से आसमान सूना नहीं होता…” —लेकिन यह भी उतना ही सच है कि कुछ तारों की चमक हमेशा के लिए यादों के आकाश में बस जाती है।