​थोबावाड़ा में गूँजा 'भय प्रगट कृपाला': श्रीराम कथा में धूमधाम से मनाया गया राम जन्मोत्सव
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रिपोर्ट - प्रवीण वेद (बबलू) झाड़ोल

​झाड़ोल। उदयपुर जिले की झाड़ोल तहसील के ग्राम थोबावाड़ा में चल रही संगीतमय श्रीराम कथा के तीसरे दिन भक्ति, श्रद्धा और उल्लास का त्रिवेणी संगम देखने को मिला। कथा व्यास पूज्य श्री पुष्कर दास महाराज के मुखारविंद से प्रवाहित होती रामकथा की अमृतधारा में गोता लगाने के लिए बड़ी संख्या में श्रद्धालु उमड़ पड़े।

​'मान' का हनन करने वाला ही सच्चा 'हनुमान'

​महाराज श्री ने हनुमान जी के चरित्र पर प्रकाश डालते हुए जीवन का गूढ़ रहस्य समझाया। उन्होंने कहा:

​"हनुमान वही है जिसने अपने 'मान' (अहंकार) का हनन कर दिया हो। वे परम भाग्यशाली थे क्योंकि उन्होंने अपना संपूर्ण जीवन प्रभु की सेवा में समर्पित कर दिया।"

​उन्होंने श्रद्धालुओं को प्रेरित करते हुए कहा कि मनुष्य जन्म केवल भजन और सत्संग के लिए मिला है, अतः इस अमूल्य अवसर को व्यर्थ नहीं गंवाना चाहिए।

​सामाजिक कुरीतियों पर प्रहार: कन्या बचाओ का संदेश

​वर्तमान सामाजिक परिस्थितियों पर चिंता व्यक्त करते हुए कथा व्यास ने कन्या भ्रूण हत्या जैसी कुरीति पर कड़ा प्रहार किया। उन्होंने भावुक होते हुए कहा कि आज समाज में यह स्थिति आ गई है कि नवरात्रि पर पूजन के लिए नौ कन्याएँ मिलना भी मुश्किल हो रहा है। उन्होंने बेटियों की रक्षा को सबसे बड़ा पुण्य कार्य बताया।

​प्रभु की इच्छा सर्वोपरि: 'होई सोई जो राम रचि राखा'

​कथा के दौरान माता सती और शिव जी के प्रसंग के माध्यम से महाराज ने समझाया कि जब जीव भगवान की परीक्षा लेने की कोशिश करता है, तो उसे वियोग सहना पड़ता है। उन्होंने मनु-शतरूपा के तप और भगवान के विभिन्न अवतारों की व्याख्या करते हुए कहा कि जब-जब धरती पर पाप बढ़ता है, प्रभु सूक्ष्म या स्थूल रूप में भक्तों के उद्धार के लिए अवश्य आते हैं।

​नंद के आनंद भयो: झूम उठे श्रद्धालु

​कथा का मुख्य आकर्षण भगवान श्रीराम का जन्मोत्सव रहा। जैसे ही महाराज ने राम जन्म का प्रसंग सुनाया, पूरा पाण्डाल "भय प्रगट कृपाला, दीनदयाला" के जयकारों से गूँज उठा।

​बधाई गान: महिलाओं और पुरुषों ने भजनों पर जमकर नृत्य किया।

​खुशी का माहौल: भक्तों ने एक-दूसरे को राम जन्मोत्सव की बधाइयाँ दीं।

​महाआरती: कार्यक्रम के अंत में सामूहिक आरती उतारी गई और प्रसाद वितरण किया गया।

​महाराज ने अंत में संदेश दिया कि रामायण केवल एक ग्रंथ नहीं, बल्कि जीवन जीने की कला है। यह हर घर में होनी चाहिए और राम का जन्म हमारे हृदय में होना चाहिए।