एनपी न्यूज 24/ गजेन्द्र मालवीय, डेस्क
तीन वर्षों से जूझ रहे ग्रामीण, मानसून से पहले नियंत्रण नहीं हुआ तो विकराल हो सकती है समस्या
उदयपुर । जिले की फलासिया तहसील के ग्राम बिछीवाड़ा में पिछले तीन वर्षों से किसानों और ग्रामीणों के लिए गंभीर समस्या बने अफ्रीकन घोंघा (जायंट अफ्रीकन स्नेल) के बढ़ते प्रकोप को लेकर अब राष्ट्रीय स्तर पर चिंता जताई गई है। कृषि विभाग राजस्थान सरकार की अनुशंसा तथा भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद (आईसीएआर) नई दिल्ली के महानिदेशक डॉ. एम.एल. जाट के संज्ञान में मामला आने के बाद विशेषज्ञ वैज्ञानिकों की टीम ने गांव पहुंचकर विस्तृत सर्वेक्षण किया।
सर्वे दल में आईसीएआर नई दिल्ली के वरिष्ठ वैज्ञानिक डॉ. श्रवण हलधर एवं डॉ. शशांक, महाराणा प्रताप कृषि एवं प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय (एमपीयूएटी) के क्षेत्रीय निदेशक अनुसंधान डॉ. श्रीधर लखावत, डॉ. हेमंत स्वामी तथा कृषि विभाग राजस्थान सरकार के कृषि अनुसंधान अधिकारी (कीट) डॉ. कुलदीप सुथार एवं कृषि अधिकारी गौरीशंकर शामिल रहे।
सर्वे के दौरान गांव के किसानों, महिलाओं एवं स्थानीय जनप्रतिनिधियों ने वैज्ञानिकों को पिछले तीन वर्षों से अफ्रीकन घोंघे के कारण हो रही परेशानियों से अवगत कराया। वैज्ञानिकों ने गांव के विभिन्न स्थलों, खेतों, नदी-नालों, घरों तथा जल निकासी मार्गों का निरीक्षण किया। निरीक्षण में बड़ी संख्या में अफ्रीकन घोंघे पाए गए, जो वर्तमान में सुषुप्त अवस्था में हैं। विशेषज्ञों के अनुसार मानसून की पहली बारिश के साथ ही ये घोंघे पुनः सक्रिय होकर पूरे क्षेत्र में फैल सकते हैं और किसानों की फसलों को भारी नुकसान पहुंचा सकते हैं।
ग्रामीणों ने बताया कि पिछले वर्ष घोंघों की संख्या इतनी अधिक हो गई थी कि सड़कों पर चलना और घरों में रहना तक मुश्किल हो गया था। खेतों में खड़ी मक्का, सब्जियों एवं अन्य फसलों को भारी नुकसान पहुंचा था। किसानों का कहना है कि यदि समय रहते प्रभावी नियंत्रण नहीं किया गया तो इस वर्ष स्थिति और अधिक गंभीर हो सकती है तथा कृषि उत्पादन पर व्यापक असर पड़ सकता है।
गौरतलब है कि ग्राम बिछीवाड़ा में अफ्रीकन घोंघा की समस्या पिछले तीन वर्षों से लगातार बनी हुई है। इस दौरान किसानों, ग्रामीणों एवं जनप्रतिनिधियों द्वारा विभिन्न स्तरों पर समस्या को उठाया जाता रहा है। अफ्रीकन घोंघा के बढ़ते प्रकोप के कारण न केवल कृषि फसलों को भारी नुकसान पहुंचा है, बल्कि ग्रामीणों का दैनिक जीवन भी प्रभावित हुआ है। बरसात के मौसम में इनकी संख्या अचानक बढ़ जाने से खेतों, बाड़ियों, घरों के आंगनों, सड़कों तथा सार्वजनिक स्थलों पर इनका व्यापक फैलाव देखने को मिला है। कई किसानों की मक्का, सब्जियों एवं अन्य फसलों को नुकसान पहुंचा, वहीं ग्रामीणों ने घरों के आसपास बड़ी संख्या में घोंघों की मौजूदगी के कारण परेशानी का सामना किया।
समस्या की गंभीरता को देखते हुए पिछले तीन वर्षों में इस विषय को विभिन्न जनमाध्यमों एवं सामाजिक मंचों के माध्यम से लगातार प्रमुखता से उठाया जाता रहा है। किसानों ने कई बार प्रशासन, कृषि विभाग एवं जनप्रतिनिधियों को ज्ञापन सौंपकर स्थायी समाधान की मांग भी की। लगातार प्रयासों, जनजागरूकता और ग्रामीणों की मांग के बाद अब भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद (आईसीएआर), नई दिल्ली तथा कृषि वैज्ञानिकों की टीम द्वारा क्षेत्र का विस्तृत सर्वेक्षण किया गया है। ग्रामीणों को उम्मीद है कि इस सर्वे के आधार पर शीघ्र प्रभावी कार्ययोजना बनाकर अफ्रीकन घोंघा की समस्या का स्थायी समाधान किया जाएगा, जिससे किसानों की फसलें सुरक्षित रह सकें और ग्रामीणों को राहत मिल सके।
सर्वे के बाद वैज्ञानिक दल ने अपनी रिपोर्ट महाराणा प्रताप कृषि एवं प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय तथा आईसीएआर नई दिल्ली को सौंप दी है। एमपीयूएटी के निदेशक अनुसंधान डॉ. आर.एल. सोनी ने बताया कि सर्वे रिपोर्ट राज्य सरकार एवं आईसीएआर को भेजी जा रही है। वहां से प्राप्त होने वाली तकनीकी एवं आर्थिक सहायता के आधार पर अफ्रीकन घोंघा नियंत्रण के लिए विशेष अभियान संचालित किया जाएगा।
दिल्ली से आए वरिष्ठ कीट वैज्ञानिक डॉ. श्रवण हलधर एवं डॉ. शशांक ने किसानों को घोंघा नियंत्रण के लिए मेटाएलडीहाईड 2.5 प्रतिशत, फेरीक फॉस्फेट 2.94 प्रतिशत, कॉपर सल्फेट एवं कैल्सियम ऑक्साइड (क्वीक लाइम) के वैज्ञानिक उपयोग की जानकारी दी। वहीं डॉ. श्रीधर लखावत ने किसानों से सामूहिक स्तर पर नियंत्रण अभियान चलाने का आह्वान किया।
डॉ. हेमंत स्वामी ने बताया कि मानसून से पहले घोंघों का नियंत्रण अत्यंत आवश्यक है, अन्यथा भविष्य में यह समस्या और विकराल रूप धारण कर सकती है। कृषि अनुसंधान अधिकारी डॉ. कुलदीप सुथार ने किसानों को खेतों की मेड़ों, नालियों एवं आसपास उगे खरपतवारों की सफाई कर सुषुप्त अवस्था में पड़े घोंघों को नष्ट करने की सलाह दी।
विशेषज्ञों का मानना है कि यदि समय रहते प्रभावी कदम नहीं उठाए गए तो आगामी बारिश के मौसम में अफ्रीकन घोंघा पूरे क्षेत्र में फैलकर किसानों को भारी आर्थिक नुकसान पहुंचा सकता है। इसलिए बिछीवाड़ा क्षेत्र में अब सभी की नजर सरकार और वैज्ञानिकों की आगामी कार्ययोजना पर टिकी हुई है।
इस दौरान कृषि विभाग के अधिकारी संजय भारद्वाज, अजय जोशी, वार्ड पंच मगनलाल पटेल, ग्रामीण खुमाणलाल भारद्वाज, किशन प्रजापत सहित बड़ी संख्या में ग्रामीण मौजूद रहे।
