रुकी पेंशनों को मिली नई जिंदगी, शिविर में मिनटों में हुआ समाधान
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रिपोर्ट - बबलू वेद, झाड़ोल

चौखलाबारा ग्रामीण सेवा शिविर बना मिसाल: बुजुर्ग दंपती की वर्षों पुरानी परेशानी दूर, विधवा को मौके पर मिला पीपीओ, जरूरतमंदों के चेहरों पर लौटी मुस्कान

झाड़ोल/ओगणा।

राजस्थान सरकार की जनकल्याणकारी योजनाओं का लाभ अंतिम व्यक्ति तक पहुंचाने के उद्देश्य से आयोजित ग्रामीण सेवा शिविर चौखलाबारा में उस समय संवेदनशील प्रशासन और सुशासन की अनूठी तस्वीर देखने को मिली, जब वर्षों से रुकी पेंशनों का मौके पर ही समाधान कर लाभार्थियों के चेहरों पर खुशी लौटा दी गई। शिविर में प्रशासनिक तत्परता, विभागीय समन्वय और जनसेवा के प्रति प्रतिबद्धता का ऐसा उदाहरण सामने आया, जिसने ग्रामीणों का शासन-प्रशासन पर विश्वास और मजबूत कर दिया। 

शिविर का शुभारंभ विकास अधिकारी जितेन्द्र सिंह राजावत ने किया। उन्होंने ग्रामीणों को शिविर के उद्देश्यों एवं राज्य सरकार की विभिन्न जनकल्याणकारी योजनाओं की जानकारी दी। कार्यक्रम में मुख्य अतिथि के रूप में राजस्थान सरकार के जनजाति कैबिनेट मंत्री बाबूलाल खराड़ी उपस्थित रहे। उन्होंने कहा कि सरकार की सर्वोच्च प्राथमिकता है कि कोई भी पात्र व्यक्ति तकनीकी कारणों से किसी भी योजना के लाभ से वंचित न रहे। 

वर्षों से रुकी पेंशन, शिविर में मिली राहत

शिविर में पहुंचे बुजुर्ग मंगलाराम (पिता सवा) और उनकी पत्नी लालीबाई लंबे समय से सामाजिक सुरक्षा पेंशन बंद होने से परेशान थे। जब उन्होंने अपनी समस्या शिविर प्रभारी एवं विकास अधिकारी जितेन्द्र सिंह राजावत के समक्ष रखी तो तत्काल जांच करवाई गई। जांच में सामने आया कि जनआधार कार्ड में मोबाइल नंबर एवं वार्षिक आय का अपडेट नहीं होने के कारण उनका भौतिक सत्यापन नहीं हो पा रहा था और इसी वजह से पेंशन रुकी हुई थी।

शिविर में मौजूद सांख्यिकी विभाग, पंचायतीराज विभाग एवं सामाजिक न्याय एवं अधिकारिता विभाग के अधिकारियों ने टीमवर्क का परिचय देते हुए जनआधार में आवश्यक संशोधन किए तथा मौके पर ही ऑनलाइन सत्यापन पूरा कर पेंशन बहाल कर दी। वर्षों से चली आ रही समस्या का कुछ ही मिनटों में समाधान होते देख बुजुर्ग दंपती की आंखें खुशी से भर आईं। 

मोताबाई की भी शुरू हुई बंद पेंशन

इसी प्रकार मोताबाई (पत्नी प्रेमसिंह) भी लंबे समय से पेंशन नहीं मिलने के कारण आर्थिक तंगी से जूझ रही थीं। बढ़ती उम्र के कारण उनका बायोमेट्रिक सत्यापन एवं फेस ऑथेंटिकेशन संभव नहीं हो पा रहा था। शिविर प्रभारी ने संवेदनशीलता दिखाते हुए नियमानुसार ओटीपी के माध्यम से उनका भौतिक सत्यापन करवाया और बंद पड़ी पेंशन को पुनः शुरू करवा दिया। इस त्वरित कार्रवाई से मोताबाई को बड़ी राहत मिली। 

विधवा पेंशन हुई स्वीकृत, मौके पर मिला पीपीओ

ग्रामीण सेवा शिविर केवल रुकी हुई पेंशनों को बहाल करने तक सीमित नहीं रहा, बल्कि नए पात्र लोगों को भी तत्काल लाभ प्रदान किया गया। गांव की दितलीबाई (पत्नी शंकरलाल) के विधवा पेंशन आवेदन को शिविर में प्राप्त होते ही स्वीकृत कर दिया गया। कैबिनेट मंत्री बाबूलाल खराड़ी एवं अधिकारियों ने उन्हें मौके पर ही पेंशन भुगतान आदेश (पीपीओ) सौंपकर सरकारी योजनाओं का लाभ तत्काल उपलब्ध कराया। 

"तकनीकी बाधाएं नहीं रोक सकतीं जनता का हक"

कैबिनेट मंत्री बाबूलाल खराड़ी ने कहा कि मुख्यमंत्री के नेतृत्व में राज्य सरकार का एकमात्र लक्ष्य अंतिम छोर पर बैठे व्यक्ति तक बिना किसी परेशानी के योजनाओं का लाभ पहुंचाना है। उन्होंने कहा कि चौखलाबारा का यह शिविर इस बात का प्रमाण है कि यदि प्रशासनिक इच्छाशक्ति मजबूत हो तो कोई भी तकनीकी बाधा जनता के अधिकारों के बीच दीवार नहीं बन सकती। 

शिविर में पंचायत प्रसार अधिकारी चेतन कलाल सहित विभिन्न विभागों के अधिकारी-कर्मचारी, जनप्रतिनिधि एवं बड़ी संख्या में ग्रामीण उपस्थित रहे। लाभार्थियों ने राज्य सरकार की जनहितकारी सोच, ग्रामीण सेवा शिविर की प्रभावी व्यवस्था तथा प्रशासन की संवेदनशील कार्यशैली की सराहना करते हुए आभार व्यक्त किया। चौखलाबारा का यह शिविर ग्रामीणों के लिए सुशासन और त्वरित समाधान का जीवंत उदाहरण बन गया।