एनपी न्यूज 24/ गजेन्द्र लोहार, डेस्क
फलासिया। भारतीय संस्कृति में गुरु को ज्ञान, संस्कार और आध्यात्मिक जीवन का आधार माना गया है। गुरु पूर्णिमा के पावन अवसर पर राजस्थान सरकार प्रदेशभर के संत-महंतों का सम्मान कर उनकी आध्यात्मिक एवं सामाजिक सेवाओं का अभिनंदन करेगी। इस वर्ष आयोजित राज्य स्तरीय सम्मान समारोह में राजस्थान के विभिन्न जिलों से चयनित 517 संत-महंतों को सम्मानित किया जाएगा। इनमें उदयपुर जिले के फलासिया क्षेत्र के दो संतों का चयन होना पूरे क्षेत्र के लिए गौरव और सम्मान की बात मानी जा रही है।
सम्मानित होने वाले संतों में परम पूज्य संत श्री लक्षमण गिरीजी सीतारामजी (रेबाड़ी बावजी), टिलेश्वर महादेव, पानरवा (फलासिया) तथा परम पूज्य ब्रह्मचारी श्री गुरुजी गुलाबदास जी महाराज, सिनिया महादेव, माकड़ादेव धाम शामिल हैं। दोनों संत वर्षों से धार्मिक परंपराओं के संरक्षण, आध्यात्मिक मार्गदर्शन, सामाजिक समरसता और जनकल्याण के कार्यों से जुड़े हुए हैं। इनके आश्रमों में प्रतिवर्ष बड़ी संख्या में श्रद्धालु दर्शन एवं आशीर्वाद के लिए पहुंचते हैं।
राजस्थान सरकार द्वारा गुरु पूर्णिमा के अवसर पर आयोजित इस सम्मान समारोह का उद्देश्य संत परंपरा के प्रति सम्मान व्यक्त करना तथा समाज में आध्यात्मिक और नैतिक मूल्यों को मजबूत करने वाले संत-महंतों के योगदान को सार्वजनिक रूप से सम्मानित करना है। प्रदेश के विभिन्न जिलों से चयनित संतों का सम्मान उनके धार्मिक, सामाजिक और सांस्कृतिक योगदान को देखते हुए किया जाएगा।
फलासिया क्षेत्र के इन दोनों संतों का चयन होने की सूचना से श्रद्धालुओं और स्थानीय नागरिकों में खुशी का माहौल है। लोगों का कहना है कि यह सम्मान केवल दो संतों का नहीं, बल्कि पूरे फलासिया क्षेत्र की धार्मिक एवं सांस्कृतिक पहचान का सम्मान है। श्रद्धालुओं ने इसे क्षेत्र के लिए गौरवपूर्ण उपलब्धि बताते हुए दोनों संतों को शुभकामनाएं दी हैं।
गुरु पूर्णिमा भारतीय संस्कृति में गुरु के प्रति श्रद्धा, समर्पण और कृतज्ञता व्यक्त करने का पर्व है। इस अवसर पर संत-महंतों के सम्मान की परंपरा समाज में गुरु-शिष्य संबंधों की महत्ता को और अधिक सुदृढ़ करने का संदेश देती है। राजस्थान सरकार द्वारा 517 संत-महंतों का सम्मान किए जाने का निर्णय संत समाज के प्रति सम्मान और उनकी सेवाओं के प्रति सरकार की सकारात्मक सोच को भी दर्शाता है।
