रिपोर्ट - बबलू वेद, झाड़ोल
झाड़ोल। आदिवासी अंचल में संविधान की समझ, अधिकारों की जागरूकता और लोकतांत्रिक भागीदारी की अलख जगाने वाले संवैधानिक गरिमा फेलो धनराज गरासिया के उल्लेखनीय कार्यों को एक बार फिर सम्मान मिला है। पंचायत समिति फलासिया क्षेत्र में मिशन कथौडी—आदिवासी स्वशासन एवं संवैधानिक जागरूकता के तहत निरंतर सक्रिय धनराज गरासिया को उनके सराहनीय कार्यों के लिए आस्था संस्थान, उदयपुर की ओर से सम्मानित किया गया। संस्थान की ओर से भंवर सिंह चदाना एवं फेलो समन्वयक डॉ. भरत श्रीमाली ने उन्हें संविधान के प्रतीक अशोक स्तंभ भेंट कर सम्मानित किया।
धनराज गरासिया लंबे समय से आदिवासी समुदाय के बीच संविधान के मूल्यों, मौलिक अधिकारों, लोकतांत्रिक प्रक्रियाओं और शासन व्यवस्था की समझ विकसित करने के लिए लगातार काम कर रहे हैं। उनका प्रयास केवल जागरूकता तक सीमित नहीं है, बल्कि गांव-ढाणी के लोगों की समस्याओं और जनहित के मुद्दों को संवैधानिक एवं लोकतांत्रिक तरीके से शासन-प्रशासन तक पहुंचाने की दिशा में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहा है।
सम्मान पर सम्मान, काम की लगातार पहचान
धनराज गरासिया के कार्यों की गंभीरता और प्रभाव का अंदाजा इसी से लगाया जा सकता है कि इससे पूर्व स्वतंत्रता दिवस के अवसर पर झाड़ोल में आयोजित उपखंड स्तरीय समारोह में भी उन्हें सम्मानित किया जा चुका है। लगातार मिल रहे सम्मान उनके क्षेत्र में किए जा रहे जागरूकता कार्यों की पहचान बनते जा रहे हैं।
धनराज गरासिया ने बताया कि संविधान संदर्भ केंद्र बोबरावाडा के माध्यम से मीरा गरासिया के सहयोग से आदिवासी क्षेत्र में संविधान और संवैधानिक अधिकारों को लेकर निरंतर जागरूकता गतिविधियां संचालित की जा रही हैं। विशेष रूप से मिशन कथौडी जनजाति संवैधानिक जागरूकता अभियान के जरिए कथौडी समुदाय को उनके अधिकारों, शासन व्यवस्था और जनहित से जुड़े विषयों के प्रति जागरूक किया जा रहा है।
अब अपने हक की बात लोकतांत्रिक तरीके से रख रहा समुदाय
जागरूकता अभियान का असर अब धरातल पर भी दिखाई देने लगा है। कथौडी समुदाय के लोगों में अपनी समस्याओं, आवश्यकताओं और मांगों को शासन एवं प्रशासन के सामने लोकतांत्रिक तरीके से रखने की समझ और पहुंच मजबूत हुई है। शिक्षा, रोजगार, मूलभूत सुविधाएं, विकास और अन्य जनहित के मुद्दों को जिम्मेदार अधिकारियों एवं सरकार तक पहुंचाने में अभियान महत्वपूर्ण माध्यम बन रहा है।
युवाओं में संविधान की समझ पैदा करने की मुहिम
धनराज गरासिया क्षेत्र के युवाओं के साथ भी लगातार संवाद कर रहे हैं। संविधान, लोकतांत्रिक अधिकार, नागरिक कर्तव्य और जनहित के मुद्दों पर युवाओं को जागरूक करने के साथ उन्हें लोकतांत्रिक प्रक्रिया में सक्रिय भागीदारी के लिए प्रेरित किया जा रहा है। स्वतंत्र पत्रकारिता के माध्यम से आदिवासी क्षेत्र के ज्वलंत एवं महत्वपूर्ण मुद्दों को सामने लाने का कार्य भी उनके प्रयासों का हिस्सा है।
उन्होंने टाइगर जागरूकता अभियान, महात्मा गांधी रोजगार गारंटी योजना में 200 कार्य दिवस की मांग, संविधान गौरव यात्रा सहित विभिन्न जनजागरूकता अभियानों के जरिए आमजन को अपने अधिकारों और लोकतांत्रिक भागीदारी के प्रति जागरूक किया है।
“संविधान अंतिम व्यक्ति तक पहुंचे, यही लक्ष्य”
सम्मान मिलने पर धनराज गरासिया ने कहा कि संविधान केवल एक दस्तावेज नहीं, बल्कि समानता, न्याय, स्वतंत्रता और लोकतांत्रिक अधिकारों का आधार है। आदिवासी समाज के अंतिम व्यक्ति तक संविधान की जानकारी पहुंचाना, लोगों को उनके अधिकारों के प्रति जागरूक करना और उन्हें लोकतांत्रिक तरीके से अपनी आवाज उठाने के लिए सक्षम बनाना ही संवैधानिक जागरूकता अभियान का मूल उद्देश्य है।
धनराज गरासिया को मिले इस सम्मान को आदिवासी अंचल में संवैधानिक चेतना की मुहिम को मजबूती देने वाले प्रयासों की सराहना के रूप में देखा जा रहा है।
