खबर का असर: झाड़ोल रेंजर के 7 वनरक्षकों के नाके बदलने के आदेश पर चला उच्चाधिकारियों का डंडा!
Total Views : 308
Zoom In Zoom Out Read Later Print

रिपोर्ट - बबलू वेद, झाड़ोल

झाड़ोल। झाड़ोल वन विभाग में सात वनरक्षकों के कार्यक्षेत्र और नाके बदलने को लेकर उठे सवालों के बीच अब मामले में बड़ा प्रशासनिक अपडेट सामने आया है। मामला सामने आने के बाद अब 24 अगस्त को क्षेत्रीय वन अधिकारी झाड़ोल की ओर से जारी सात वनरक्षकों की कार्यव्यवस्था बदलने वाला आदेश उच्चाधिकारी स्तर से निरस्त कर दिया गया है। उप वन संरक्षक, उदयपुर की ओर से जारी आदेश में संबंधित आदेश को तत्काल प्रभाव से निरस्त किए जाने की बात सामने आई है।

मामला सामने आने के बाद से ही झाड़ोल वन विभाग की कार्यप्रणाली और अधिकारियों के अधिकार क्षेत्र को लेकर सवाल खड़े हो रहे थे। एक तरफ प्रधान मुख्य वन संरक्षक एवं वन बल प्रमुख (हॉफ) के 26 जून 2024 के आदेश में अधीनस्थ कार्यालयों द्वारा कर्मचारियों के स्थानांतरण, पदस्थापन, प्रतिनियुक्ति अथवा कार्यव्यवस्था संबंधी आदेश जारी करने को लेकर स्पष्ट दिशा-निर्देश होने का दावा किया गया था, वहीं दूसरी ओर झाड़ोल रेंज कार्यालय से सात वनरक्षकों के नाके एवं कार्यक्षेत्र बदलने का आदेश जारी हुआ।

खबर के बाद सामने आया बड़ा प्रशासनिक एक्शन

24 अगस्त 2026 को जारी कार्यालय आदेश क्रमांक 510 में झाड़ोल रेंज के वन क्षेत्र में कार्य व्यवस्था एवं वन सुरक्षा के लिए सात वनरक्षकों की ड्यूटी और चार्ज में बदलाव किया गया था। कर्मचारियों को अलग-अलग नाकों एवं बीट की जिम्मेदारियां सौंपते हुए संबंधित वनरक्षकों से चार्ज लेने के निर्देश दिए गए थे।

लेकिन अब 3 सितंबर 2026 के उच्चाधिकारी आदेश ने इस पूरी कार्यव्यवस्था पर ब्रेक लगा दिया है। उप वन संरक्षक उदयपुर ने 24 अगस्त के उक्त आदेश को तत्काल प्रभाव से निरस्त कर दिया। आदेश की प्रतियां संबंधित उच्चाधिकारियों एवं झाड़ोल वन विभाग के अधिकारियों को भी भेजी गई हैं।

सात वनरक्षकों की बदली गई थी जिम्मेदारी

रेंजर कार्यालय के आदेश के तहत अंबालाल वड़ेरा को पालियाखेड़ा नाके की बीट, राकेश कुमार गदात को गोराणा नाके की बीट तथा यशवंत प्रजापत को नेनबारा नाके की जिम्मेदारी दी गई थी। रवि कुमार मीणा को टिंडोर बीट सौंपी गई थी।

इसी प्रकार योगेश मेघवाल को मगवास नाके के कीरट घाटा एवं मोहम्मद फलासिया वनखंड की जिम्मेदारी, सुरेश कुमार मीणा को दमाणा, पेरेड़ा पर्वत एवं ढीमड़ी की पश्चिमी ढाल तथा मनोहर लाल गोरणा को गोराणा नाके की कोटमाल एवं नारायणी बीट की जिम्मेदारी दी गई थी।

कई कर्मचारियों को दूसरे वनकर्मियों से चार्ज लेने के निर्देश दिए गए थे। अब उच्चाधिकारी स्तर से आदेश निरस्त होने के बाद यह पूरी व्यवस्था सवालों के घेरे में आ गई है।

“हॉफ से अनुमति नहीं ली”—रेंजर के बयान के बाद और गहराया मामला

पूरे प्रकरण में सबसे अहम बात यह सामने आई थी कि झाड़ोल रेंजर अभिषेक भटनागर ने स्वयं यह कहा था कि हॉफ से अनुमति नहीं ली गई थी। उनके अनुसार मामले की जानकारी डीएफओ को देकर अनुमति लेने की बात कही गई थी। वहीं वन मंडल दक्षिण के डीएफओ विजयशंकर पांडे ने मामले की जांच कराने की बात कही थी।

अब 24 अगस्त के आदेश का उच्चाधिकारी स्तर से निरस्त होना इस मामले को और गंभीर बना देता है। हालांकि उपलब्ध निरस्तीकरण आदेश में आदेश रद्द करने का विस्तृत कारण दर्ज नहीं है, इसलिए इसके पीछे किसी विशेष कारण या दोष का अंतिम निष्कर्ष जांच के बाद ही सामने आएगा।

अब सबसे बड़ा सवाल—किसके आदेश से बदले थे नाके?

सात वनरक्षकों के नाके और कार्यक्षेत्र बदलने के बाद अब आदेश निरस्त होने से विभाग के भीतर कई सवाल खड़े हो गए हैं। क्या यह कार्यव्यवस्था उच्चाधिकारियों की अनुमति के बिना जारी की गई थी? यदि अनुमति नहीं ली गई थी तो विभागीय नियमों के बावजूद आदेश जारी करने की जरूरत क्यों पड़ी? क्या सात कर्मचारियों की ड्यूटी बदलने से पहले सक्षम स्तर से अनुमोदन लिया गया था? और यदि नहीं लिया गया तो इसकी जिम्मेदारी किसकी होगी?

इन सवालों का जवाब अब जांच में सामने आने की उम्मीद है।

निरस्तीकरण आदेश ने बढ़ाई हलचल, अब जांच पर टिकी नजर

उप वन संरक्षक उदयपुर द्वारा 24 अगस्त के आदेश को तत्काल प्रभाव से निरस्त किए जाने के बाद झाड़ोल वन विभाग में इस मामले को लेकर हलचल तेज हो गई है। दस्तावेज में यह साफ है कि संबंधित कार्यव्यवस्था आदेश अब प्रभावी नहीं रहा, लेकिन निरस्तीकरण का विस्तृत कारण और किसी अधिकारी के खिलाफ कार्रवाई संबंधी कोई बात उपलब्ध आदेश में दर्ज नहीं है।

ऐसे में अब पूरे मामले की जांच महत्वपूर्ण हो गई है। जांच में यह स्पष्ट होगा कि सात वनरक्षकों की कार्यव्यवस्था बदलने के पीछे वास्तविक प्रशासनिक आवश्यकता क्या थी, आदेश जारी करने की प्रक्रिया में निर्धारित अनुमति ली गई थी या नहीं और यदि नियमों की अनदेखी हुई तो उसके लिए कौन जिम्मेदार है।

फिलहाल इतना तय है कि झाड़ोल रेंज में 24 अगस्त को जारी सात वनरक्षकों की कार्यव्यवस्था बदलने वाला आदेश उच्चाधिकारी स्तर से निरस्त हो चुका है। खबर के बाद हुए इस बड़े प्रशासनिक अपडेट ने वन विभाग की कार्यप्रणाली पर चल रही बहस को और तेज कर दिया है। अब सबकी निगाहें जांच के नतीजे और जिम्मेदारी तय होने पर टिकी हैं।