रिपोर्ट - बबलू वेद, झाड़ोल
झाड़ोल। मानवता अभी जिंदा है—यह बात उस समय फिर साबित हुई, जब एक परिवार ने हादसे में अपना कमाऊ सदस्य खो दिया और उसके सामने जीवन-यापन का संकट खड़ा हो गया। विपत्ति की इस घड़ी में झाड़ोल क्षेत्र के समाजसेवी एवं अध्यापक नरेश लोहार ने आगे बढ़कर न केवल परिवार की तत्काल जरूरत पूरी की, बल्कि बच्चों की पढ़ाई को लेकर भी हरसंभव सहयोग का भरोसा देकर संवेदना को सार्थक रूप दिया।
उपखंड झाड़ोल क्षेत्र निवासी देवी लाल भाट अपने बेटे के साथ रामदेवरा यात्रा पर गए थे। यात्रा से लौटते समय मोटरसाइकिल दुर्घटना में उनकी दुखद मृत्यु हो गई। अचानक हुए इस हादसे ने परिवार से उसका मुख्य सहारा छीन लिया। देखते ही देखते खुशहाल परिवार पर दुख और आर्थिक परेशानी का दोहरा पहाड़ टूट पड़ा।
मुखिया गया तो नौ सदस्यों के सामने खड़ा हुआ जीवन का बड़ा सवाल
देवी लाल भाट परिवार के प्रमुख कमाने वाले सदस्य थे। उनके निधन के बाद पीछे पत्नी, छह बच्चे तथा माता-पिता सहित कुल नौ सदस्य रह गए। परिवार की रोजमर्रा की जरूरतों से लेकर बच्चों की पढ़ाई और भविष्य तक को लेकर चिंता गहरा गई। ऐसे समय में परिवार को सबसे ज्यादा जरूरत थी किसी ऐसे सहारे की, जो मुश्किल वक्त में उनके साथ खड़ा हो।
इसी जरूरत को समझते हुए समाजसेवी अध्यापक नरेश लोहार ने बिना किसी दिखावे के मदद का हाथ बढ़ाया।
नरेश लोहार ने पहुंचाया 4–5 माह का राशन
नरेश लोहार ने परिवार की स्थिति को देखते हुए गेहूं, आटा, चावल, शक्कर, तेल, घी, मसाले, विभिन्न प्रकार की दालें सहित रोजमर्रा में काम आने वाली आवश्यक खाद्य सामग्री उपलब्ध करवाई। उपलब्ध कराया गया राशन लगभग चार से पांच माह तक परिवार की खाद्य जरूरतों में सहायक रहेगा।
मुश्किल समय में मिली इस सहायता ने परिवार को तत्काल बड़ी राहत दी। जिस घर में अचानक भविष्य की चिंता और रसोई चलाने की परेशानी खड़ी हो गई थी, वहां यह मदद कुछ समय के लिए परिवार की सबसे बड़ी चिंता कम करने वाली साबित हुई।
सिर्फ राशन नहीं, बच्चों के भविष्य का भी लिया भरोसा
नरेश लोहार की पहल की खास बात यह रही कि उन्होंने सहायता को केवल खाद्य सामग्री उपलब्ध कराने तक सीमित नहीं रखा। उन्होंने परिवार के बच्चों की पढ़ाई को लेकर भी सहयोग का भरोसा दिया।
उन्होंने परिवार को आश्वस्त किया कि आर्थिक संकट के कारण बच्चों की शिक्षा प्रभावित नहीं होने दी जानी चाहिए और आवश्यकता पड़ने पर बच्चों की पढ़ाई में हरसंभव सहयोग किया जाएगा।
यह भरोसा उस परिवार के लिए महज मदद नहीं, बल्कि भविष्य को लेकर एक नई उम्मीद है।
“मुसीबत में परिवार के साथ खड़ा होना ही सच्ची मानवता”
समाजसेवी एवं अध्यापक नरेश लोहार का कहना है कि किसी परिवार पर अचानक विपत्ति आती है तो समाज का दायित्व है कि वह उसे अकेला महसूस नहीं होने दे। जरूरतमंद परिवार की सहायता केवल आर्थिक मदद नहीं होती, बल्कि संकट के समय उसे हिम्मत और भरोसा देने का माध्यम भी होती है।
उनकी इस पहल ने यह संदेश दिया कि समाजसेवा केवल मंचों और आयोजनों तक सीमित नहीं, बल्कि जरूरत की घड़ी में किसी परिवार के घर तक पहुंचकर उसका हाथ थामना ही वास्तविक सामाजिक सरोकार है।
नरेश लोहार की पहल बनी परिवार के लिए उम्मीद की किरण
देवी लाल भाट के निधन से परिवार के सामने भविष्य को लेकर कई सवाल खड़े हैं। खासकर छह बच्चों की पढ़ाई और परिवार के दैनिक खर्च को लेकर आने वाले दिन चुनौतीपूर्ण हैं। ऐसे समय में नरेश लोहार द्वारा पहुंचाई गई खाद्य सामग्री और बच्चों की शिक्षा में सहयोग का भरोसा परिवार के लिए बड़ी राहत बनकर सामने आया है।
झाड़ोल क्षेत्र में नरेश लोहार की इस पहल को मानवीय संवेदना, सामाजिक जिम्मेदारी और जरूरतमंद के साथ खड़े होने की मिसाल के रूप में देखा जा रहा है। उनकी पहल ने यह भी दिखाया कि किसी दुखी परिवार के लिए समय पर बढ़ाया गया मदद का हाथ उसके कठिन दौर में उम्मीद की सबसे मजबूत वजह बन सकता है।
दुख की घड़ी में संवेदना जताने वाले बहुत मिलते हैं, लेकिन जरूरत के समय परिवार का हाथ थामकर खड़े होने वाले कम होते हैं—नरेश लोहार ने इसी जिम्मेदारी को निभाकर समाजसेवा का मानवीय चेहरा सामने रखा।
