शिक्षक ही श्रेष्ठ नागरिक निर्माण का असली शिल्पकार : प्रो. गायत्री तिवारी
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रिपोर्ट - बबलू वेद, झाड़ोल

झाड़ोल। शिक्षा के बदलते दौर, शिक्षक की जिम्मेदारी और सरकारी विद्यालयों के भविष्य को लेकर उदयपुर में शिक्षकों का दो दिवसीय शैक्षिक महाकुंभ शुक्रवार को जोश और चिंतन के माहौल के साथ शुरू हुआ। रेजीडेंसी स्थित बालिका विद्यालय सभागार में जिलेभर से पहुंचे सैकड़ों शिक्षकों की मौजूदगी में शिक्षा की वर्तमान दशा-दिशा, विद्यार्थियों के सर्वांगीण विकास, संस्कार निर्माण, विद्यालयों में नामांकन बढ़ाने और तकनीकी बदलाव के बीच शिक्षक की बदलती भूमिका जैसे अहम मुद्दों पर व्यापक मंथन हुआ। सम्मेलन में वक्ताओं ने साफ संदेश दिया कि शिक्षक केवल पाठ्यक्रम पूरा करने वाला कर्मचारी नहीं, बल्कि समाज और राष्ट्र की नई पीढ़ी को गढ़ने वाला शिल्पकार है।


प्रदेशाध्यक्ष शेर सिंह चौहान की दो टूक—पहले खुद अनुशासित बनो, फिर व्यवस्था से आंख से आंख मिलाओ


राजस्थान पंचायती राज एवं माध्यमिक शिक्षक संघ के प्रदेशाध्यक्ष शेर सिंह चौहान ने शिक्षकों को उनके दायित्वों का आईना दिखाते हुए कहा कि शिक्षक को अपने कर्तव्य के प्रति शत-प्रतिशत प्रतिबद्ध होना होगा। उन्होंने कहा कि जब शिक्षक स्वयं अपने दायित्वों के प्रति ईमानदार और अनुशासित होगा, तभी किसी गलत व्यवस्था के खिलाफ उसकी आवाज प्रभावी ढंग से उठ सकेगी।


उन्होंने स्पष्ट कहा कि शिक्षक नौकर नहीं, बल्कि समाज का निर्माता है। युवा शिक्षकों को संगठन की ताकत समझाते हुए चौहान ने कहा कि शिक्षकों को संगठनों से दूर नहीं रहना चाहिए। उन्होंने कहा कि जनप्रतिनिधियों की गोद में बैठकर बालक और शिक्षक समाज का कभी भला नहीं किया जा सकता। संगठन से दूर रहने वाला शिक्षक कहीं भी इस्तेमाल किया जा सकता है, इसलिए युवा शिक्षक अपने अधिकारों और संगठन की शक्ति को पहचानें।


“बच्चों के पास आज गूगल है, आपके पास क्या है?”


मुख्य अतिथि प्रो. गायत्री तिवारी ने सम्मेलन को संबोधित करते हुए शिक्षकों के सामने बदलते तकनीकी युग की सबसे बड़ी चुनौती रखी। उन्होंने सवाल किया—“बच्चों के पास आज गूगल है, आपके पास क्या है?”


उन्होंने कहा कि आज का विद्यार्थी तकनीक के मामले में कई बार शिक्षक से भी आगे है। ऐसे समय में शिक्षक की भूमिका केवल किताब पढ़ाने तक सीमित नहीं रह सकती। शिक्षक को विद्यार्थी के भीतर संस्कार, संस्कृति, चरित्र, संवेदनशीलता और मानवीय मूल्यों का निर्माण करना होगा।


प्रो. तिवारी ने कहा कि शिक्षक का अपना व्यवहार ही विद्यार्थी के लिए सबसे बड़ी टेक्स्ट बुक है। शिक्षक जैसा आचरण करेगा, विद्यार्थी उसी से सीखने का प्रयास करेगा। उन्होंने सफल शिक्षक के लिए ABCDE FGH का मंत्र देते हुए जागरूकता, व्यवहार, प्रतिबद्धता, समर्पण, दक्षता, विश्वास और प्रसन्नता को शिक्षक के व्यक्तित्व का आधार बताया।


डिजिटल युग में डिजिटल बनना जरूरी : नवीन व्यास


प्रदेश उपाध्यक्ष नवीन व्यास ने सरकारी विद्यालयों में घटते नामांकन को गंभीर चुनौती बताते हुए शिक्षकों से सामूहिक प्रयास करने का आह्वान किया। उन्होंने कहा कि आज शिक्षा व्यवस्था डिजिटल दौर में प्रवेश कर चुकी है और शिक्षक को भी समय के साथ स्वयं को तकनीकी रूप से सक्षम बनाना होगा।


उन्होंने कहा कि “नामांकन बढ़ेगा तभी पद बचेंगे और पद बचेंगे तभी स्कूल बचेंगे।” सरकारी विद्यालयों में विद्यार्थियों और अभिभावकों का विश्वास मजबूत करने तथा नामांकन बढ़ाने के लिए शिक्षक समुदाय को मिलकर काम करना होगा।


कर्तव्य के प्रति ईमानदार शिक्षक को किसी से डरने की जरूरत नहीं : भेरूलाल कलाल


प्रदेश संगठन मंत्री भेरूलाल कलाल ने कहा कि जो शिक्षक अपने कर्तव्य के प्रति ईमानदार है और बालक व विद्यालय के प्रति पूरी तरह समर्पित है, उसे किसी से डरने की आवश्यकता नहीं है। उन्होंने शिक्षकों से कहा कि वे पूरी निष्ठा के साथ अपने दायित्वों का निर्वहन करें और विद्यालय को बेहतर बनाने में अपनी भूमिका निभाएं।


सम्मेलन भाषण का मंच नहीं, समाधान की प्रयोगशाला : कमलेश शर्मा


जिलाध्यक्ष कमलेश शर्मा ने कहा कि शैक्षिक महाकुंभ केवल भाषण और औपचारिकता तक सीमित नहीं है। यह शिक्षकों की समस्याओं, सुझावों और शिक्षा व्यवस्था से जुड़े मुद्दों पर समाधान तलाशने का मंच है। सम्मेलन में सामने आने वाले सुझावों को व्यवस्थित कर मांग-पत्र का रूप दिया जाएगा और सरकार तक पहुंचाया जाएगा, ताकि शिक्षा एवं शिक्षक हित से जुड़े मुद्दों पर ठोस पहल हो सके।


गुणवत्तापूर्ण शिक्षा और संस्कार निर्माण का लिया संकल्प


शैक्षिक महाकुंभ में शिक्षकों ने विद्यार्थियों के सर्वांगीण विकास, गुणवत्तापूर्ण शिक्षा, संस्कार निर्माण और विद्यालयों के शैक्षिक वातावरण को बेहतर बनाने के लिए पूरी निष्ठा से कार्य करने का संकल्प लिया। सम्मेलन में यह संदेश प्रमुखता से उभरा कि बदलते समय के साथ शिक्षक को भी बदलना होगा, लेकिन तकनीक के बीच शिक्षक की सबसे बड़ी ताकत उसके ज्ञान, व्यवहार, संस्कार और मानवीय संवेदना में ही रहेगी।


ये रहे मौजूद


कार्यक्रम में जिलाध्यक्ष कमलेश शर्मा, अरविंद डामोर, नवीन व्यास, सतीश जैन, चंद्रशेखर परमार, रूपलाल मीणा, प्रेमसिंह भाटी, लीला प्रजापत, गोपी कुमावत, निखिल मीणा, सुरेश गरासिया सहित संगठन के पदाधिकारी एवं जिलेभर से पहुंचे सैकड़ों शिक्षक मौजूद रहे। सम्मेलन का संचालन रणवीर सिंह राणावत ने किया।