रिपोर्ट - बबलू वेद, झाड़ोल
राजस्थान में पंचायतीराज चुनाव की प्रक्रिया के साथ ही ग्रामीण क्षेत्रों में राजनीतिक गतिविधियां तेज हो गई हैं। चुनाव कार्यक्रम घोषित होते ही संबंधित क्षेत्रों में आदर्श आचार संहिता लागू हो जाती है। इसका मुख्य उद्देश्य सभी प्रत्याशियों और राजनीतिक दलों को समान अवसर देना तथा सरकारी मशीनरी और संसाधनों के चुनावी दुरुपयोग को रोकना है। हालिया चुनावी निर्देशों में प्रचार, वाहन, लाउडस्पीकर, पोस्टर-बैनर और चुनावी खर्च को लेकर भी नियंत्रण रखा गया है।
सरकारी मशीनरी का चुनावी इस्तेमाल नहीं
आचार संहिता लागू होने के बाद सरकारी पद, कार्यालय, वाहन, भवन अथवा सरकारी संसाधनों का उपयोग किसी प्रत्याशी या दल के प्रचार के लिए नहीं किया जा सकता। सरकारी उपलब्धियों का प्रचार करने वाले ऐसे विज्ञापन या प्रचार सामग्री, जिनसे किसी दल या प्रत्याशी को चुनावी लाभ मिल सकता हो, उन पर भी निगरानी रहती है। सरकारी और सार्वजनिक संपत्तियों से पोस्टर, बैनर, होर्डिंग तथा दीवार लेखन हटाने की कार्रवाई भी चुनावी नियमों का हिस्सा है।
शिलान्यास और लोकार्पण पर रहेगी नजर
आचार संहिता के दौरान नए विकास कार्यों की घोषणा, नए शिलान्यास अथवा लोकार्पण जैसे कार्यक्रमों को लेकर निर्वाचन आयोग के निर्देश महत्वपूर्ण हो जाते हैं। पहले से स्वीकृत अथवा चल रहे कार्यों के संबंध में भी यह देखा जाता है कि उनका इस्तेमाल किसी प्रत्याशी के प्रचार या मतदाताओं को प्रभावित करने के लिए तो नहीं किया जा रहा। आचार संहिता लागू होने से पहले विकास कार्यों के लोकार्पण और शिलान्यास को लेकर प्रशासनिक स्तर पर गतिविधियां बढ़ने की रिपोर्ट भी सामने आई थी।
प्रचार में अनुमति और नियम जरूरी
प्रत्याशियों को प्रचार के दौरान वाहनों, लाउडस्पीकर, बैनर, पोस्टर, कटआउट और अन्य प्रचार सामग्री के संबंध में निर्वाचन आयोग के निर्देशों का पालन करना होगा। प्रचार वाहनों के इस्तेमाल के लिए निर्धारित अनुमति आवश्यक हो सकती है। उपलब्ध हालिया निर्देशों के अनुसार लाउडस्पीकर के इस्तेमाल पर समय संबंधी पाबंदी भी लागू है, जिसमें रात 10 बजे से सुबह 6 बजे तक लाउडस्पीकर पर प्रतिबंध बताया गया है।
जाति-धर्म के नाम पर माहौल बिगाड़ने से बचना होगा
चुनाव प्रचार में जाति, धर्म, संप्रदाय या समुदाय के आधार पर मतदाताओं को प्रभावित करने वाली अपील, भड़काऊ बयान, व्यक्तिगत आरोप और सामाजिक तनाव पैदा करने वाली गतिविधियां आचार संहिता की भावना के विपरीत हैं। प्रत्याशियों से अपेक्षा रहती है कि वे अपने प्रचार को मुद्दों और नीतियों तक सीमित रखें तथा विरोधी प्रत्याशियों के निजी जीवन को लेकर अनावश्यक आरोप-प्रत्यारोप से बचें।
मतदाताओं को प्रलोभन देना पड़ेगा भारी
मतदाताओं को नकद राशि, शराब, उपहार या किसी अन्य प्रकार का प्रलोभन देकर वोट प्रभावित करने की कोशिश चुनावी प्रक्रिया को प्रभावित करने वाली गंभीर गतिविधि मानी जाती है। इसी तरह मतदाताओं को डराना-धमकाना या दबाव बनाना भी स्वीकार्य नहीं है। चुनाव के दौरान प्रशासन और पुलिस ऐसी शिकायतों पर निगरानी रखती है।
चुनावी खर्च का हिसाब रखना अनिवार्य
प्रत्येक प्रत्याशी को चुनाव प्रचार में किए गए खर्च का निर्धारित तरीके से हिसाब रखना होगा। हालिया पंचायत चुनाव संबंधी निर्देशों में खर्च सीमा में बदलाव तथा चुनाव परिणाम घोषित होने के बाद निर्धारित अवधि में खर्च का विवरण जमा करने की व्यवस्था बताई गई है।
सोशल मीडिया भी निगरानी के दायरे में
अब चुनाव प्रचार केवल गांव की चौपाल या सभा तक सीमित नहीं है। फेसबुक, व्हाट्सऐप, इंस्टाग्राम और अन्य सोशल मीडिया माध्यमों पर किए जाने वाले चुनावी प्रचार पर भी नियम लागू हो सकते हैं। प्रत्याशियों और समर्थकों को फर्जी खबर, भ्रामक सूचना, आपत्तिजनक सामग्री अथवा बिना अनुमति प्रचार सामग्री प्रसारित करने से बचना होगा।
आचार संहिता का मतलब विकास कार्य पूरी तरह बंद होना नहीं
सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि आचार संहिता लागू होने का अर्थ यह नहीं कि आम जनता के रोजमर्रा के सरकारी काम बंद हो जाते हैं। आवश्यक प्रशासनिक कार्य और जनसेवाएं चलती रहती हैं। प्रतिबंध मुख्य रूप से ऐसे सरकारी निर्णयों, घोषणाओं और गतिविधियों पर होता है जिनसे चुनाव में किसी दल या प्रत्याशी को अनुचित लाभ मिल सकता है। राजस्थान में निकाय चुनाव के दौरान भी सरकार की ओर से इस संबंध में अलग-अलग कार्यों पर लागू छूट को स्पष्ट किया गया था।
ग्रामीण क्षेत्रों में प्रशासन की जिम्मेदारी बढ़ेगी
पंचायतीराज चुनाव सीधे गांवों की राजनीति और स्थानीय प्रशासन से जुड़े होते हैं। ऐसे में जिला निर्वाचन अधिकारी, उपखंड अधिकारी, तहसीलदार, विकास अधिकारी, पुलिस प्रशासन और संबंधित चुनाव अधिकारी की जिम्मेदारी बढ़ जाती है। शिकायत मिलने पर प्रचार सामग्री, सरकारी संसाधनों के इस्तेमाल, चुनावी खर्च, वाहनों और कानून-व्यवस्था से जुड़े मामलों की जांच की जा सकती है।
निष्पक्ष चुनाव की कसौटी बनेगी आचार संहिता
पंचायतीराज चुनाव में सरपंच, पंचायत समिति सदस्य, जिला परिषद सदस्य और पंच पदों के लिए होने वाली चुनावी गतिविधियों में आचार संहिता सभी पक्षों के लिए समान नियम तय करती है। इसका मूल उद्देश्य यही है कि चुनाव सरकारी प्रभाव, धनबल, दबाव या अनुचित प्रचार के बजाय निर्धारित चुनावी प्रक्रिया के तहत संपन्न हो। राजस्थान में चुनाव संबंधी आधिकारिक सूचनाएं राज्य निर्वाचन आयोग की व्यवस्था के माध्यम से जारी होती हैं।
निष्कर्ष: पंचायतीराज चुनाव के दौरान प्रत्याशी और समर्थक प्रचार जरूर कर सकते हैं, लेकिन सरकारी संसाधनों का इस्तेमाल, बिना अनुमति प्रचार गतिविधियां, मतदाताओं को प्रलोभन या धमकी, नियमों के विरुद्ध प्रचार सामग्री तथा निर्धारित सीमा से अधिक चुनावी खर्च जैसी गतिविधियां जांच और कार्रवाई के दायरे में आ सकती हैं। चुनाव की तारीख और स्थानीय स्तर पर लागू विशेष निर्देशों के अनुसार अंतिम नियम संबंधित निर्वाचन अधिकारी के आदेश से देखे जाने चाहिए।
