एनपी न्यूज 24/ गजेन्द्र लोहार, डेस्क
एक वार्ड में 8+ दावेदार, 3 साल में 12 सचिव बदलने का दावा—चुनाव से पहले गरमाया माहौल
बिछीवाड़ा। पंचायतीराज चुनाव के बीच बिछीवाड़ा की राजनीति में तेजी से बदलते समीकरणों ने राजनीतिक हलचल बढ़ा दी है। गांव के मुख्य वार्ड में पंच पद के लिए 8 से अधिक उम्मीदवारों की दावेदारी सामने आने के बाद अब चुनावी गणित चर्चा का केंद्र बन गया है। वहीं, अभी कुछ संभावित दावेदारों की ओर से अपनी स्थिति स्पष्ट किया जाना बाकी बताया जा रहा है।
यदि एक ही वार्ड में उम्मीदवारों की संख्या इतनी अधिक रहती है और जीत-हार का अंतर 50 से कम वोटों तक रहता है, तो वोटों का बंटवारा चुनावी परिणाम में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकता है। इसी वजह से ग्रामीणों के बीच सवाल उठ रहा है कि इतनी बड़ी संख्या में दावेदारियां सामान्य चुनावी प्रतिस्पर्धा हैं या इसके पीछे कोई राजनीतिक रणनीति भी काम कर रही है?
12 सचिव बदलने का मुद्दा भी चर्चा में
इसी बीच पंचायत से जुड़ा एक दूसरा मुद्दा भी चुनावी चर्चा में उभर रहा है। ग्रामीण स्तर पर यह दावा किया जा रहा है कि पिछले करीब 3 वर्षों में पंचायत में 12 सचिव बदले गए।
यदि यह आंकड़ा आधिकारिक रिकॉर्ड से पुष्ट होता है, तो इतनी कम अवधि में बार-बार सचिव बदलने को लेकर पंचायत के प्रशासनिक कामकाज, विकास कार्यों की निरंतरता और व्यवस्था की स्थिरता पर सवाल उठना स्वाभाविक है।
ग्रामीणों के बीच सवाल है—
तीन साल में इतने सचिव क्यों बदले गए?
बार-बार बदलाव का कारण क्या रहा?
क्या इससे पंचायत के काम प्रभावित हुए?
और क्या इस मामले की कभी समीक्षा हुई?
इन सवालों पर संबंधित अधिकारियों और जनप्रतिनिधियों की स्पष्ट स्थिति सामने आना अभी बाकी है।
पक्ष-विपक्ष दोनों के लिए चुनौती
एक तरफ वार्डों में बढ़ती दावेदारियां और वोटों के संभावित बंटवारे का गणित है, तो दूसरी तरफ पंचायत की प्रशासनिक कार्यप्रणाली से जुड़े पुराने सवाल चर्चा में हैं। ऐसे में चुनावी मैदान में उतरने वाले सभी उम्मीदवारों के सामने जनता के सवालों का जवाब देने की चुनौती रहेगी।
यह चुनाव केवल उम्मीदवारों की संख्या का मुकाबला नहीं रह गया है। अब वोटों का गणित, पंचायत की कार्यप्रणाली, प्रशासनिक स्थिरता और पिछले वर्षों के कामकाज भी चर्चा का हिस्सा बनते जा रहे हैं।
हालांकि, 12 सचिव बदलने और इसके कारणों से संबंधित आंकड़ों की आधिकारिक पुष्टि पंचायत समिति/संबंधित विभाग के रिकॉर्ड से किया जाना आवश्यक है। इसी तरह वोटों के बंटवारे या किसी राजनीतिक रणनीति को लेकर चल रही चर्चाओं को फिलहाल केवल चुनावी अटकल और चर्चा के रूप में ही देखा जाना चाहिए।
बिछीवाड़ा में चुनावी तस्वीर अभी पूरी तरह साफ नहीं हुई है, लेकिन इतना तय है कि इस बार हर उम्मीदवार के सामने सिर्फ वोट मांगने की नहीं, बल्कि जनता के सवालों का सामना करने की भी चुनौती होगी।
