रिपोर्ट - बबलू वेद, झाड़ोल
झाड़ोल। राजस्थान राज्य विधिक सेवा प्राधिकरण जयपुर एवं जिला विधिक सेवा प्राधिकरण उदयपुर के निर्देशन में झाड़ोल न्यायालय परिसर में राष्ट्रीय लोक अदालत का आयोजन किया गया। लोक अदालत में वरिष्ठ सिविल न्यायाधीश जफर अहमद कुरैशी की अध्यक्षता में झाड़ोल एवं कोटड़ा न्यायालय की संयुक्त बेंच ने विभिन्न प्रकरणों की सुनवाई करते हुए कुल 133 मामलों का निस्तारण किया। इनमें एक दशक से अधिक समय से लंबित चेक बाउंस का मामला भी शामिल रहा। लोक अदालत के माध्यम से पुराने विवादों के समाधान और पक्षकारों को आपसी सहमति से राहत दिलाने की दिशा में महत्वपूर्ण पहल देखने को मिली।
तालुका सचिव नेमाराम सुथार ने बताया कि राष्ट्रीय लोक अदालत की संयुक्त बेंच में वरिष्ठ सिविल न्यायाधीश जफर अहमद कुरैशी ने अध्यक्षता की। बेंच में झाड़ोल नायब तहसीलदार निर्मला मेनारिया एवं अधिवक्ता मंजू पालीवाल ने सदस्य के रूप में भूमिका निभाई। न्यायिक अधिकारियों एवं बेंच के सदस्यों की मौजूदगी में विभिन्न श्रेणियों के लंबित मामलों के निस्तारण की प्रक्रिया संपन्न हुई।
न्यायाधीश जफर अहमद कुरैशी की अध्यक्षता में पुराने मामलों के समाधान पर जोर
राष्ट्रीय लोक अदालत में वरिष्ठ सिविल न्यायाधीश जफर अहमद कुरैशी की अध्यक्षता में हुई सुनवाई आयोजन का प्रमुख पक्ष रही। न्यायालयों में लंबे समय से लंबित विवादों को आपसी सहमति के आधार पर सुलझाने में लोक अदालत की व्यवस्था महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है। इस आयोजन में दस वर्ष से अधिक पुराने चेक बाउंस प्रकरण का निस्तारण होना विशेष रूप से उल्लेखनीय रहा। यह मामला दर्शाता है कि लंबे समय से जारी कानूनी विवादों के समाधान के लिए लोक अदालत एक प्रभावी माध्यम बन सकती है।
लोक अदालत की विशेषता यह है कि इसमें पक्षकारों को आपसी सहमति से विवाद समाप्त करने का अवसर मिलता है। इससे अनावश्यक मुकदमेबाजी, समय और खर्च में कमी लाने के साथ पक्षकारों के बीच सौहार्दपूर्ण संबंध बनाए रखने में भी मदद मिल सकती है। हालांकि प्रत्येक मामले का निस्तारण उसकी प्रकृति और पक्षकारों की सहमति के आधार पर होता है।
झाड़ोल न्यायालय के 86 लंबित मामलों का निस्तारण
राष्ट्रीय लोक अदालत के दौरान झाड़ोल न्यायालय में लंबित कुल 86 प्रकरणों का निस्तारण किया गया। इनमें नियमित फौजदारी के 68, चेक बाउंस के 9, भरण-पोषण के 8 तथा सिविल श्रेणी का एक प्रकरण शामिल रहा। अलग-अलग श्रेणियों के मामलों का निस्तारण होने से लोक अदालत के माध्यम से विवाद समाधान की व्यापक भूमिका सामने आई।
चेक बाउंस और भरण-पोषण जैसे मामले सीधे तौर पर संबंधित पक्षकारों के आर्थिक एवं पारिवारिक हितों से जुड़े होते हैं। ऐसे मामलों में विधिक प्रक्रिया के तहत समाधान होने से संबंधित लोगों को लंबे समय तक मुकदमेबाजी में उलझे रहने से राहत मिलने की संभावना रहती है।
बैंकों और वित्तीय संस्थानों के 28 प्री-लिटिगेशन मामले भी निपटे
लोक अदालत में न्यायालयों में लंबित मामलों के साथ-साथ विभिन्न बैंकों एवं वित्तीय संस्थानों के 28 प्री-लिटिगेशन प्रकरणों का भी निस्तारण किया गया। इन मामलों में करीब 14 लाख रुपए के अवार्ड पारित हुए। प्री-लिटिगेशन मामलों का अर्थ ऐसे विवादों से है, जो नियमित न्यायालयी मुकदमे के रूप में लंबित होने से पहले ही समाधान के लिए प्रस्तुत किए जाते हैं।
इस व्यवस्था का उद्देश्य विवादों को शुरुआती स्तर पर ही सुलझाने का अवसर उपलब्ध कराना है, ताकि संबंधित पक्षों को लंबी न्यायिक प्रक्रिया से गुजरने की आवश्यकता कम हो। बैंक एवं वित्तीय संस्थानों से जुड़े मामलों में आपसी सहमति से समाधान होने पर संबंधित पक्षकारों को भी राहत मिल सकती है।
कोटड़ा न्यायालय के 19 प्रकरणों का भी हुआ निस्तारण
झाड़ोल एवं कोटड़ा न्यायालय की संयुक्त बेंच के माध्यम से आयोजित इस राष्ट्रीय लोक अदालत में कोटड़ा न्यायालय के कुल 19 प्रकरणों का भी निस्तारण किया गया। इस प्रकार झाड़ोल न्यायालय के 86 लंबित मामलों, बैंकों एवं वित्तीय संस्थानों के 28 प्री-लिटिगेशन मामलों तथा कोटड़ा न्यायालय के 19 प्रकरणों को मिलाकर कुल 133 प्रकरणों का निस्तारण हुआ।
लोक अदालत से न्यायिक प्रक्रिया को गति देने की पहल
राष्ट्रीय लोक अदालत का मूल उद्देश्य विवादों का त्वरित एवं सौहार्दपूर्ण समाधान उपलब्ध कराना है। इसकी प्रक्रिया में पक्षकारों की सहमति महत्वपूर्ण होती है और इसका उद्देश्य केवल मामलों की संख्या कम करना नहीं, बल्कि संबंधित लोगों को व्यावहारिक एवं स्वीकार्य समाधान उपलब्ध कराना भी है।
झाड़ोल में दस वर्ष से अधिक पुराने चेक बाउंस मामले का निस्तारण इस आयोजन की महत्वपूर्ण उपलब्धियों में शामिल रहा। वहीं, विभिन्न श्रेणियों के लंबित मामलों और वित्तीय संस्थानों से जुड़े प्रकरणों का समाधान लोक अदालत की उपयोगिता को रेखांकित करता है।
आयोजन के दौरान अधिवक्ता गण, रीडर गौरव सिंह, विभिन्न बैंकों के प्रतिनिधि तथा आमजन उपस्थित रहे। राष्ट्रीय लोक अदालत के माध्यम से झाड़ोल एवं कोटड़ा क्षेत्र के प्रकरणों का निस्तारण न्यायिक प्रक्रिया में सहमति आधारित समाधान की महत्वपूर्ण भूमिका को सामने लाता है।
