रिपोर्ट - बबलू वेद, झाड़ोल
झाड़ोल। राजस्थान पंचायतीराज चुनाव 2026 को लेकर झाड़ोल, फलासिया और ओगणा पंचायत समिति क्षेत्र में चुनावी सरगर्मी अब निर्णायक दौर में प्रवेश कर चुकी है। धनतेरस पर्व को लेकर धार्मिक आस्था और जनभावनाओं को ध्यान में रखते हुए राज्य निर्वाचन आयोग ने चुनाव कार्यक्रम में संशोधन किया है। तारीखों में हुए इस बदलाव ने भले ही कैलेंडर को एक दिन आगे-पीछे किया हो, लेकिन ग्रामीण राजनीति में इसकी हलचल और बढ़ गई है। अब गांव की चौपालों से लेकर राजनीतिक बैठकों तक सबसे बड़ा सवाल यही है कि किस ग्राम पंचायत में कौन प्रत्याशी मैदान में उतरेगा और किसके पक्ष में स्थानीय समीकरण करवट लेंगे।
झाड़ोल, फलासिया और ओगणा की कुल 93 ग्राम पंचायतों में होने वाले चुनाव को लेकर अब दावेदारों की सक्रियता लगातार बढ़ रही है। तीनों पंचायत समितियों में कुल 242 मतदान केंद्र बनाए गए हैं। झाड़ोल में 34, फलासिया में 35 और ओगणा में 24 ग्राम पंचायतें चुनावी प्रक्रिया का हिस्सा हैं। ऐसे में यह चुनाव केवल पंच और सरपंच की कुर्सी का मुकाबला नहीं रहने वाला, बल्कि आने वाले वर्षों की ग्रामीण राजनीति में किस गुट की पकड़ मजबूत होगी, इसका भी बड़ा संकेत देगा।
एक दिन का बदलाव, लेकिन चुनावी समीकरणों में बड़ी हलचल
धनतेरस के चलते प्रथम, द्वितीय और तृतीय चरण के कार्यक्रम में संशोधन किया गया है। प्रथम चरण में अब 21 अक्टूबर को पोलिंग पार्टियां रवाना होंगी और 22 अक्टूबर को जिला परिषद एवं पंचायत समिति सदस्य पद के लिए मतदान होगा। इसके बाद 23 अक्टूबर को पंच-सरपंच पद के नामांकन तथा 24 अक्टूबर को मतदान होगा। 25 अक्टूबर को उपसरपंच का चुनाव कराया जाएगा।
कार्यक्रम में यह बदलाव प्रशासन के लिए भी महत्वपूर्ण है। मतदान दलों की रवानगी, मतदान केंद्रों की व्यवस्था, सुरक्षा इंतजाम, सामग्री वितरण और चुनावी तैयारियों को संशोधित कार्यक्रम के अनुसार अंतिम रूप देना होगा। दूसरी तरफ प्रत्याशियों को भी प्रचार, जनसंपर्क और बैठकों की अपनी रणनीति नए कार्यक्रम के हिसाब से तैयार करनी होगी।
13 अक्टूबर तक नामांकन, 14 को जांच और 15 को नाम वापसी
प्रथम चरण की जिला परिषद और पंचायत समिति सदस्य पद की चुनावी प्रक्रिया अब सबसे महत्वपूर्ण मोड़ पर है। 13 अक्टूबर नामांकन की अंतिम तारीख है। इसके बाद 14 अक्टूबर को नामांकन पत्रों की जांच होगी और 15 अक्टूबर को दोपहर 3 बजे तक नाम वापस लिए जा सकेंगे।
यही वह दौर होगा जब चुनाव की वास्तविक तस्वीर सामने आएगी। कई सीटों पर एक ही राजनीतिक खेमे से कई दावेदार सामने आने की स्थिति में अंतिम समय तक समझाइश और मान-मनौव्वल का दौर चल सकता है। नाम वापसी के बाद जब प्रत्याशियों को चुनाव चिन्ह मिलेंगे, तब साफ होगा कि कौन मुकाबले में मजबूती से डटा है और कहां मुकाबला आमने-सामने, त्रिकोणीय या बहुकोणीय बन गया है।
नामांकन में छोटी चूक भी बिगाड़ सकती है पूरा खेल
चुनावी मैदान में उतरने वाले प्रत्याशियों के लिए सबसे महत्वपूर्ण चरण अब नामांकन प्रक्रिया है। नामांकन पत्र भरते समय मतदाता सूची में नाम और क्रमांक, पहचान संबंधी दस्तावेज, आयु संबंधी प्रमाण, घोषणा-पत्र, फोटो तथा आरक्षित सीट होने पर संबंधित श्रेणी के प्रमाण-पत्र सहित आवश्यक दस्तावेजों की जांच बेहद सावधानी से करनी होगी।
सोशल मीडिया पर चल रही किसी भी अनधिकृत चेकलिस्ट को अंतिम मानने के बजाय प्रत्याशियों को संबंधित रिटर्निंग ऑफिसर से निर्धारित फॉर्म और दस्तावेजों की आधिकारिक पुष्टि करनी चाहिए। नामांकन प्रक्रिया में छोटी तकनीकी गलती भी बाद में गंभीर परेशानी खड़ी कर सकती है। इसलिए अंतिम समय की जल्दबाजी के बजाय दस्तावेजों की पहले से जांच करना दावेदारों के लिए सबसे सुरक्षित रणनीति होगी।
93 ग्राम पंचायतों में शुरू होगी स्थानीय राजनीति की असली परीक्षा
झाड़ोल की 34, फलासिया की 35 और ओगणा की 24 ग्राम पंचायतें अब चुनावी गतिविधियों का मुख्य केंद्र बनने जा रही हैं। गांव-गांव बैठकों, घर-घर संपर्क और सामाजिक स्तर पर समर्थन जुटाने का दौर तेज होगा।
पंचायत चुनाव की खासियत यह है कि यहां बड़े राजनीतिक मुद्दों से ज्यादा स्थानीय पकड़, व्यक्तिगत संपर्क, परिवार का प्रभाव, सामाजिक समीकरण, गांव में छवि और पुराने संबंध निर्णायक भूमिका निभाते हैं। यही कारण है कि कई जगह राजनीतिक दलों से ज्यादा प्रत्याशी की व्यक्तिगत स्वीकार्यता चुनाव का परिणाम तय कर सकती है।
कहीं दो मजबूत दावेदारों के बीच सीधा मुकाबला बन सकता है तो कहीं तीसरा प्रत्याशी पूरे समीकरण को बदल सकता है। कई सीटों पर अंतिम समय में होने वाले समझौते और नाम वापसी भी चुनावी परिणाम की दिशा तय करने में महत्वपूर्ण साबित हो सकते हैं।
आरक्षित और महिला सीटों पर भी बढ़ेगी सियासी सक्रियता
आरक्षित सीटों और महिला सीटों पर भी राजनीतिक खेमों की रणनीति महत्वपूर्ण रहेगी। यहां प्रत्याशी चयन के साथ-साथ पूरे पंचायत क्षेत्र के सामाजिक समीकरणों को साधना चुनौती होगी।
कई जगह प्रत्याशी का चेहरा सामने आने से पहले परिवार, समाज और स्थानीय प्रभावशाली लोगों के बीच बातचीत शुरू हो चुकी है। चुनावी राजनीति में यह देखा जाना दिलचस्प होगा कि कौन सा गुट किस चेहरे को आगे करता है और कौन प्रत्याशी व्यापक समर्थन जुटाने में सफल रहता है।
पंचायत समिति सदस्य का चुनाव भी बनेगा प्रतिष्ठा की लड़ाई
ग्राम पंचायत स्तर पर सरपंच का चुनाव सबसे ज्यादा चर्चा में रहता है, लेकिन पंचायत समिति सदस्य का चुनाव भी राजनीतिक रूप से बेहद महत्वपूर्ण है। पंचायत समिति स्तर पर प्रभाव बनाने के लिए प्रत्याशी को एक से अधिक गांवों और बड़े मतदाता क्षेत्र में अपनी पकड़ साबित करनी होगी।
यही वजह है कि संभावित पंचायत समिति सदस्य प्रत्याशियों ने भी अपने संपर्क मजबूत करने शुरू कर दिए हैं। पंचायत समिति के भीतर किस गुट की संख्या मजबूत होगी, इसका असर आगे स्थानीय विकास कार्यों और राजनीतिक निर्णयों पर भी दिखाई दे सकता है।
जिला परिषद चुनाव पर भी टिकी निगाहें
जिला परिषद सदस्य का चुनाव स्थानीय राजनीति को और व्यापक आयाम देता है। जिला परिषद की सीट जीतने के लिए प्रत्याशियों को कई ग्राम पंचायतों में संपर्क और संगठन खड़ा करना पड़ता है। ऐसे में जिला परिषद चुनाव में मजबूत प्रदर्शन करने वाला राजनीतिक खेमा ग्रामीण क्षेत्र में अपनी व्यापक पकड़ का संदेश दे सकता है।
यहां भी पार्टी संगठन के साथ प्रत्याशी की व्यक्तिगत छवि, स्थानीय नेटवर्क और विभिन्न गांवों में समर्थन सबसे महत्वपूर्ण कारक होंगे।
झाड़ोल–फलासिया–ओगणा में किसका चलेगा सिक्का?
चुनाव का सबसे बड़ा सवाल अब यही है कि 93 ग्राम पंचायतों में किस राजनीतिक खेमे का प्रभाव सबसे अधिक दिखाई देगा। हालांकि अभी नामांकन और नाम वापसी की प्रक्रिया पूरी नहीं हुई है, इसलिए किसी भी सीट पर अंतिम अनुमान लगाना जल्दबाजी होगी।
लेकिन इतना तय है कि आने वाले दिनों में हर ग्राम पंचायत की अपनी अलग चुनावी कहानी होगी। कहीं पुराने राजनीतिक रिश्ते काम आएंगे, कहीं परिवारों की प्रतिष्ठा दांव पर होगी और कहीं नए चेहरे पुराने समीकरणों को चुनौती देते नजर आएंगे।
विशेष रूप से निर्दलीय प्रत्याशी भी कई सीटों पर निर्णायक भूमिका निभा सकते हैं। पंचायत चुनाव में मजबूत स्थानीय उम्मीदवार यदि वोटों को एक दिशा में ले जाता है तो वह स्थापित राजनीतिक समीकरणों को भी प्रभावित कर सकता है।
द्वितीय और तृतीय चरण की तारीखें भी बदलीं
संशोधित कार्यक्रम का असर आगे के चरणों पर भी पड़ा है। द्वितीय चरण में 27 अक्टूबर को पोलिंग पार्टियां रवाना होंगी, 28 अक्टूबर को जिला परिषद एवं पंचायत समिति सदस्य पद का मतदान, 29 अक्टूबर को पंच-सरपंच पद के नामांकन, 30 अक्टूबर को मतदान तथा 31 अक्टूबर को उपसरपंच का चुनाव होगा।
इसी तरह तृतीय चरण में 2 नवंबर को पोलिंग पार्टियां रवाना होंगी, 3 नवंबर को जिला परिषद एवं पंचायत समिति सदस्य पद का मतदान, 4 नवंबर को पंच-सरपंच पद के नामांकन, 5 नवंबर को मतदान और 6 नवंबर को उपसरपंच का चुनाव कराया जाएगा।
अब हर दिन महत्वपूर्ण, हर गांव में बदलेगा चुनावी गणित
झाड़ोल–फलासिया–ओगणा का चुनावी क्षेत्र अब पूरी तरह चुनावी मोड में प्रवेश कर चुका है। नामांकन से लेकर नाम वापसी तक प्रत्येक दिन राजनीतिक दृष्टि से महत्वपूर्ण रहने वाला है। कौन मैदान में उतरता है, कौन पीछे हटता है, कौन किसके साथ खड़ा होता है और अंतिम समय में कौन सा गुट किस प्रत्याशी को समर्थन देता है—इन सभी घटनाक्रमों पर ग्रामीणों की निगाह रहेगी।
धनतेरस के चलते चुनाव कार्यक्रम में बदलाव जरूर हुआ है, लेकिन चुनावी गर्मी कम होने के बजाय और बढ़ती नजर आ रही है। 93 ग्राम पंचायतें, 242 मतदान केंद्र और हजारों मतदाताओं के बीच होने वाली यह चुनावी जंग झाड़ोल–फलासिया–ओगणा की आगामी ग्रामीण राजनीति की दिशा तय करने वाली साबित हो सकती है।
अब गांव की चौपाल से लेकर पंचायत समिति मुख्यालय तक एक ही चर्चा है—कौन उतरेगा मैदान में, किसके साथ जाएगा गांव और किसके सिर सजेगा सरपंची का ताज? आने वाले दिनों में नामांकन, नाम वापसी और चुनाव चिन्ह आवंटन के बाद इस सवाल का जवाब तस्वीर की तरह साफ होता जाएगा।
