रिपोर्ट - बबलू वेद, झाड़ोल
झाड़ोल। शिक्षा केवल विद्यालय में प्रवेश पाने तक सीमित नहीं है, बल्कि प्रत्येक विद्यार्थी को सुरक्षित भवन, उचित रोशनी, स्वच्छ शौचालय और पढ़ाई के लिए आवश्यक सुविधाएं उपलब्ध कराना भी शिक्षा के अधिकार की भावना का महत्वपूर्ण हिस्सा है। विद्यार्थियों को उनके कानूनी अधिकारों के प्रति जागरूक करने और उन्हें एक जिम्मेदार नागरिक बनाने के उद्देश्य से मंगलवार को राजकीय उच्च माध्यमिक विद्यालय गोदाणा में विशेष विधिक जागरूकता शिविर का आयोजन किया गया। राजस्थान राज्य विधिक सेवा प्राधिकरण जयपुर एवं जिला विधिक सेवा प्राधिकरण उदयपुर के तत्वावधान में संचालित ‘परिवर्तनकारी मंगलवार’ पहल के अंतर्गत आयोजित इस कार्यक्रम में न्यायिक अधिकारी जफर अहमद कुरैशी ने विद्यार्थियों को शिक्षा के अधिकार अधिनियम की विस्तृत जानकारी देते हुए उनके अधिकारों और जिम्मेदारियों पर प्रकाश डाला।
कार्यक्रम की थीम ‘राइट टू एजुकेशन एक्ट’ यानी शिक्षा का अधिकार अधिनियम रही। न्यायिक अधिकारी जफर अहमद कुरैशी ने विद्यार्थियों को संबोधित करते हुए बताया कि निशुल्क एवं अनिवार्य शिक्षा बच्चों का मौलिक अधिकार है और इस अधिकार की सुरक्षा सुनिश्चित करना राज्य का दायित्व है। उन्होंने समझाया कि शिक्षा का अधिकार केवल विद्यालय में दाखिला दिलाने तक सीमित नहीं है, बल्कि बच्चों को ऐसा शैक्षणिक वातावरण उपलब्ध कराना भी आवश्यक है, जहां वे सुरक्षित रहकर गुणवत्तापूर्ण शिक्षा प्राप्त कर सकें।
सिर्फ प्रवेश नहीं, सुरक्षित शैक्षणिक वातावरण भी जरूरी
न्यायिक अधिकारी जफर अहमद कुरैशी ने शिक्षा के अधिकार की व्यावहारिक महत्ता को समझाते हुए कहा कि विद्यार्थियों को विद्यालय में सुरक्षित भवन, पर्याप्त रोशनी, स्वच्छ शौचालय और पढ़ाई के लिए जरूरी सुविधाएं मिलनी चाहिए। इन सुविधाओं का सीधा संबंध विद्यार्थियों की सुरक्षा, सम्मान और शिक्षा के अनुकूल वातावरण से है। यदि विद्यालय में किसी प्रकार की असुविधा या समस्या सामने आती है, तो विद्यार्थियों को उसे नजरअंदाज नहीं करना चाहिए।
उन्होंने विद्यार्थियों को प्रेरित किया कि यदि उन्हें विद्यालय भवन, रोशनी, शौचालय अथवा अन्य आवश्यक सुविधाओं से संबंधित कोई समस्या दिखाई देती है, तो वे इसकी जानकारी अपने संस्था प्रधान को अवश्य दें। जागरूकता और संवाद के माध्यम से समस्याओं को संबंधित स्तर तक पहुंचाना उनके समाधान की दिशा में महत्वपूर्ण कदम है।
न्यायिक अधिकारी ने अपने संदेश के माध्यम से यह स्पष्ट किया कि अधिकारों की जानकारी होना प्रत्येक विद्यार्थी के लिए जरूरी है। जब बच्चे अपने अधिकारों को समझेंगे, तभी वे आवश्यकता पड़ने पर उचित माध्यम से अपनी बात रख सकेंगे। इस तरह के जागरूकता कार्यक्रम विद्यार्थियों में कानूनी समझ विकसित करने के साथ उन्हें अपने आसपास की व्यवस्थाओं के प्रति सजग रहने के लिए भी प्रेरित करते हैं।
विधिक सेवा संस्थानों की भूमिका से भी कराया अवगत
शिविर के दौरान विद्यार्थियों को राजस्थान राज्य विधिक सेवा प्राधिकरण, जिला विधिक सेवा प्राधिकरण तथा तालुका विधिक सेवा समिति के कार्यों और उनकी भूमिका के बारे में भी जानकारी दी गई। इन संस्थानों के माध्यम से लोगों तक कानूनी जागरूकता पहुंचाने और पात्र व्यक्तियों को विधिक सहायता उपलब्ध कराने के प्रयास किए जाते हैं।
कार्यक्रम का उद्देश्य विद्यार्थियों को केवल कानून की जानकारी देना ही नहीं, बल्कि उन्हें यह समझाना भी रहा कि कानूनी अधिकारों से जुड़ी किसी समस्या की स्थिति में उचित संस्थान और संबंधित अधिकारी तक अपनी बात पहुंचाना महत्वपूर्ण है। विद्यालय स्तर पर आयोजित ऐसे शिविर बच्चों में कानून के प्रति समझ विकसित करने और उन्हें जागरूक नागरिक बनाने में सहायक होते हैं।
प्रधानाचार्य ने जताया आभार, विद्यार्थियों से जानकारी जीवन में अपनाने का आह्वान
कार्यक्रम के अंत में विद्यालय के प्रधानाचार्य यशवंत कुमार मीणा ने मुख्य अतिथि न्यायिक अधिकारी जफर अहमद कुरैशी का धन्यवाद ज्ञापित किया। उन्होंने विद्यार्थियों को शिविर में दी गई जानकारी को केवल सुनने तक सीमित नहीं रखने, बल्कि उसे अपने जीवन में अपनाने और एक जागरूक नागरिक के रूप में अपने अधिकारों एवं कर्तव्यों के प्रति सजग रहने के लिए प्रेरित किया।
‘परिवर्तनकारी मंगलवार’ पहल के तहत आयोजित यह शिविर विद्यार्थियों को शिक्षा के अधिकार, विद्यालय में आवश्यक सुविधाओं और विधिक सहायता से जुड़ी व्यवस्थाओं की जानकारी देने की दिशा में महत्वपूर्ण रहा। कार्यक्रम ने यह संदेश दिया कि शिक्षा का अधिकार तभी सार्थक बनता है, जब बच्चों को पढ़ने का अवसर मिलने के साथ सुरक्षित और सुविधाजनक शैक्षणिक वातावरण भी उपलब्ध हो तथा वे अपने अधिकारों के प्रति जागरूक रहें।
