एनपी न्यूज 24/ गजेन्द्र मालवीय, डेस्क
“राजनीति से ऊपर, जनता के हक में – एनपी न्यूज 24 का पंचायतीराज चुनाव 2026 जागरूकता अभियान।”
जयपुर । राजस्थान में प्रस्तावित पंचायतीराज चुनाव 2026 को लेकर गांव-गांव में राजनीतिक सरगर्मियां तेज हो गई हैं। इस बार चुनाव सिर्फ प्रतिनिधि चुनने तक सीमित नहीं रह गया है, बल्कि यह जनता की जागरूकता, युवाओं की भागीदारी और पारदर्शी पंचायत व्यवस्था की परीक्षा भी माना जा रहा है।
ग्रामीण क्षेत्रों में चर्चा है कि यदि जनता जागरूक हो जाती है तो राजनीति के पुराने समीकरण अपने आप बदल जाते हैं। वर्षों से चली आ रही परंपरागत राजनीति, वादों और आरोप-प्रत्यारोप से आगे बढ़कर अब सवाल जवाबदेही, विकास और पारदर्शिता पर टिक रहा है।
चुनाव को लेकर एक बड़ा मुद्दा यह भी बन रहा है कि क्या इस बार पंचायतों में शिक्षित और सक्षम युवाओं को मौका मिलेगा या फिर वही पुराने चेहरे सत्ता में लौटेंगे। ग्रामीण स्तर पर यह बहस तेज है कि योजनाओं की समझ रखने वाले, पंचायत फंड का हिसाब रखने में सक्षम और अधिकारियों से संवाद करने वाले प्रतिनिधि ही गांव को डिजिटल और विकसित बना सकते हैं।
राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि यदि युवा वर्ग सक्रिय रूप से आगे आता है तो पंचायत की कार्यप्रणाली में पारदर्शिता बढ़ सकती है। पंचायत फंड, विकास कार्यों और योजनाओं की निगरानी में जनता की सीधी भागीदारी से भ्रष्टाचार पर अंकुश लगाना संभव है।
चुनाव से पहले कई सामाजिक संगठनों और जागरूक नागरिकों द्वारा यह संदेश भी दिया जा रहा है कि सही चुनाव पांच साल का विकास सुनिश्चित करता है, जबकि गलत चुनाव पूरे कार्यकाल का नुकसान साबित हो सकता है।
ग्रामीण राजनीति में यह भी देखने को मिल रहा है कि अब मतदाता केवल जातीय या व्यक्तिगत समीकरणों से आगे बढ़कर शिक्षा, ईमानदारी और जवाबदेही को प्राथमिकता देने की बात कर रहे हैं। “जागो, समझो, पूछो” जैसे संदेश गांवों में चर्चा का विषय बने हुए हैं।
राजस्थान पंचायतीराज चुनाव 2026 इस मायने में महत्वपूर्ण माना जा रहा है कि यह चुनाव तय करेगा कि पंचायतें कागजों में विकास दिखाएंगी या जमीन पर बदलाव दिखाई देगा। आने वाले महीनों में नामांकन, आरक्षण और प्रशासनिक तैयारियों के बीच सबसे बड़ी कसौटी यही होगी—क्या जनता जागरूक होकर अपना निर्णय लेती है और क्या युवा नेतृत्व को वास्तविक अवसर मिलता है।
अब नजरें इस बात पर टिकी हैं कि 2026 का यह चुनाव गांवों की राजनीति में नई दिशा और नई सोच लेकर आता है या फिर परंपरागत ढर्रे पर ही आगे बढ़ता है।
