एनपी न्यूज 24/ गजेन्द्र मालवीय, डेस्क
जयपुर। राजस्थान में प्रस्तावित पंचायतीराज चुनाव 2026 को लेकर राज्य निर्वाचन आयोग ने महत्वपूर्ण आदेश जारी किया है, जिसके तहत ग्राम पंचायत स्तर पर सरपंच और वार्ड पंच के चुनाव पारंपरिक मतपत्र (बैलेट पेपर) से कराए जाएंगे, जबकि पंचायत समिति सदस्य और जिला परिषद सदस्य के चुनाव इलेक्ट्रॉनिक वोटिंग मशीन (EVM) के माध्यम से संपन्न होंगे। आयोग के इस निर्णय के बाद चुनावी तैयारियों को लेकर प्रशासनिक गतिविधियां तेज हो गई हैं।
राज्य निर्वाचन आयोग द्वारा जारी आदेश में राजस्थान पंचायती राज (निर्वाचन) नियम, 1994 के नियम 35 का उल्लेख करते हुए यह स्पष्ट किया गया है कि आयोग को परिस्थितियों के अनुरूप मतदान की प्रक्रिया निर्धारित करने का अधिकार है। इसी अधिकार का प्रयोग करते हुए आयोग ने दोहरी प्रणाली अपनाने का निर्णय लिया है, ताकि ग्रामीण स्तर पर मतदान प्रक्रिया सरल और सुगम बनी रहे, वहीं उच्च स्तर के चुनावों में तकनीकी पारदर्शिता और गति सुनिश्चित की जा सके।
सूत्रों के अनुसार ग्राम पंचायत स्तर पर बड़ी संख्या में ग्रामीण मतदाता होते हैं, जिनमें बुजुर्ग और अशिक्षित मतदाता भी शामिल रहते हैं। ऐसे में बैलेट पेपर के माध्यम से मतदान करना कई बार उन्हें अधिक सहज लगता है। दूसरी ओर पंचायत समिति और जिला परिषद जैसे व्यापक क्षेत्रीय चुनावों में ईवीएम के उपयोग से मतगणना प्रक्रिया तेज होगी और परिणाम कम समय में घोषित किए जा सकेंगे।
इस आदेश के बाद जिला निर्वाचन अधिकारियों, पंचायत राज विभाग और संबंधित प्रशासनिक इकाइयों को आवश्यक व्यवस्थाएं सुनिश्चित करने के निर्देश दिए गए हैं। मतदान कर्मियों के प्रशिक्षण, मतदान केंद्रों की तैयारी, ईवीएम की उपलब्धता और सुरक्षा व्यवस्था को लेकर अलग-अलग स्तर पर योजनाएं बनाई जा रही हैं। आयोग ने यह भी संकेत दिया है कि चुनाव कार्यक्रम की विस्तृत घोषणा शीघ्र की जाएगी।
राजनीतिक दृष्टि से भी यह आदेश महत्वपूर्ण माना जा रहा है। पंचायतीराज चुनावों को ग्रामीण लोकतंत्र की नींव माना जाता है, क्योंकि यहीं से स्थानीय नेतृत्व उभरता है और विकास की दिशा तय होती है। सरपंच, पंचायत समिति सदस्य और जिला परिषद सदस्य सीधे तौर पर गांवों की सड़क, पानी, शिक्षा, स्वास्थ्य, मनरेगा, आवास योजनाओं और अन्य सरकारी योजनाओं के क्रियान्वयन से जुड़े होते हैं। ऐसे में मतदान प्रक्रिया को लेकर पारदर्शिता और विश्वास बनाए रखना आयोग की प्राथमिकता है।
विशेषज्ञों का मानना है कि मिश्रित प्रणाली अपनाने से जहां एक ओर परंपरा और तकनीक के बीच संतुलन बनेगा, वहीं दूसरी ओर मतदाताओं को भी अलग-अलग स्तर की चुनावी प्रक्रिया को समझने का अवसर मिलेगा। हालांकि मतदाताओं के लिए यह जरूरी होगा कि वे मतदान के दिन यह स्पष्ट समझ रखें कि किस पद के लिए किस प्रकार का मतदान किया जा रहा है।
राज्य में इस आदेश के बाद संभावित प्रत्याशियों की सक्रियता भी बढ़ गई है। गांवों में चुनावी चर्चाएं तेज हो गई हैं और राजनीतिक माहौल धीरे-धीरे गरमाने लगा है। आगामी पंचायतीराज चुनाव 2026 को लेकर यह आदेश चुनावी रणनीतियों और तैयारियों की दिशा तय करने वाला माना जा रहा है।
अब सभी की निगाहें राज्य निर्वाचन आयोग द्वारा जारी किए जाने वाले विस्तृत चुनाव कार्यक्रम पर टिकी हैं, जिसके बाद नामांकन, प्रचार और मतदान की प्रक्रिया औपचारिक रूप से शुरू होगी।
