एनपी न्यूज 24/ गजेन्द्र मालवीय, डेस्क
राजस्थान में पंचायतीराज चुनाव 2026 की आहट के साथ गांवों में राजनीतिक हलचल तेज हो चुकी है। चुनावी माहौल में उम्मीदवारों की सक्रियता बढ़ रही है। ऐसे समय में सबसे महत्वपूर्ण भूमिका मतदाता की है। क्योंकि एक दिन का निर्णय आने वाले पांच वर्षों की दिशा तय करता है।
चुनाव के दिनों में कई नेता घर-घर पहुंचते हैं, हाथ जोड़ते हैं, सम्मान और वादों की भाषा बोलते हैं। लेकिन सवाल यह है कि क्या यही व्यवहार पूरे पांच साल दिखाई देता है? चुनाव के समय की नम्रता और जीत के बाद की दूरी – यह अंतर गांव की राजनीति का पुराना सच रहा है। इसलिए जरूरी है कि मतदाता भावनाओं या तात्कालिक प्रभाव में नहीं, बल्कि सोच-समझकर निर्णय लें।
गांव में सड़क, नाली, पानी, स्कूल, अस्पताल, स्वच्छता और योजनाओं का सही क्रियान्वयन – ये मुद्दे चुनाव की असली कसौटी होने चाहिए। केवल व्यक्तिगत संबंध, जातीय समीकरण या छोटे-मोटे लाभ के आधार पर लिया गया फैसला अक्सर गांव के विकास को पीछे धकेल देता है। पांच साल तक वही पंचायत काम करती है जिसे जनता चुनती है। इसलिए यह समझना जरूरी है कि वोट केवल व्यक्ति को नहीं, पूरे प्रशासनिक तंत्र को जिम्मेदारी सौंपता है।
विशेषज्ञों का मानना है कि जागरूक मतदाता लोकतंत्र की असली ताकत होते हैं। जब जनता सवाल पूछती है, हिसाब मांगती है और विकास को प्राथमिकता देती है, तब पंचायत मजबूत होती है। लेकिन जब वोट लालच, दबाव या भ्रम में दिया जाता है, तब भ्रष्टाचार और लापरवाही को बढ़ावा मिलता है।
पंचायतीराज चुनाव 2026 केवल एक चुनाव नहीं, बल्कि गांव के भविष्य की परीक्षा है। मतदाता को यह देखना होगा कि कौन उम्मीदवार पांच साल तक गांव के बीच रहकर काम करेगा, किसका विकास का स्पष्ट विजन है और कौन जवाबदेही निभाने की क्षमता रखता है।
अंततः यह याद रखना होगा कि चाय, नाश्ता या तात्कालिक लाभ एक दिन का होता है, लेकिन गलत निर्णय का असर पूरे पांच साल तक रहता है। सही प्रतिनिधि का चयन ही गांव को मजबूत, पारदर्शी और विकासशील बना सकता है।
उपशीर्षक:
लालच नहीं, विकास को चुनें – जागरूक मतदाता ही मजबूत पंचायत की पहचान
सही फैसला – गांव का उज्ज्वल कल।
