जनगणना में ओबीसी कॉलम नहीं: उदयपुर में उबाल, कलेक्ट्रेट घेरकर गरजा समाज — “अबकी बार आर-पार की लड़ाई”
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रिपोर्ट - प्रवीण वेद (बबलू) झाड़ोल

उदयपुर। जनगणना प्रपत्र में अन्य पिछड़ा वर्ग (ओबीसी) का अलग कॉलम नहीं होने के मुद्दे ने अब उग्र रूप ले लिया है। मंगलवार को सर्व ओबीसी समाज महापंचायत ट्रस्ट (रजि.) उदयपुर के बैनर तले सैकड़ों लोगों ने कलेक्ट्रेट के बाहर जोरदार धरना-प्रदर्शन किया। नारेबाजी से पूरा क्षेत्र गूंज उठा और प्रशासन के खिलाफ भारी आक्रोश देखने को मिला। समाज के 40 से अधिक जातियों के अध्यक्ष, पदाधिकारी और बड़ी संख्या में महिला-पुरुष इस आंदोलन में शामिल हुए।

“ओबीसी को नजरअंदाज करना बंद करे सरकार”

प्रदर्शन का नेतृत्व कर रहे संस्थापक दिनेश माली ने सरकार पर सीधा हमला बोलते हुए कहा कि देश की सबसे बड़ी आबादी में शामिल ओबीसी वर्ग को जनगणना में अलग पहचान न देना “सामाजिक अन्याय” है।

उन्होंने कहा—

“अगर इस बार भी ओबीसी की अलग से जनगणना नहीं करवाई गई, तो आंदोलन सड़कों से संसद तक जाएगा। यह लड़ाई अब निर्णायक होगी।”

33 कॉलम में नहीं ओबीसी का जिक्र, बढ़ा आक्रोश

माली ने बताया कि केंद्र सरकार द्वारा करवाई जा रही जनगणना में 33 कॉलम के जरिए परिवार की जानकारी ली जा रही है, लेकिन इनमें ओबीसी का अलग कॉलम नहीं है।

इससे ओबीसी समाज की वास्तविक जनसंख्या सामने नहीं आ पाएगी, जिससे भविष्य की नीतियों, योजनाओं और आरक्षण में बड़ा नुकसान होगा।

उन्होंने सवाल उठाया कि जब अनुसूचित जाति (SC) और अनुसूचित जनजाति (ST) के लिए अलग कॉलम है, तो ओबीसी के साथ यह भेदभाव क्यों?

“हक छीनने की साजिश बर्दाश्त नहीं”

धरने में मौजूद नेताओं ने कहा कि जनसंख्या के आधार पर ही सरकारें शिक्षा, रोजगार, आर्थिक योजनाएं और राजनीतिक प्रतिनिधित्व तय करती हैं।

ओबीसी की सही गिनती न होने देना उनके अधिकारों को कमजोर करने की साजिश है, जिसे किसी भी कीमत पर स्वीकार नहीं किया जाएगा।

प्रधानमंत्री-राष्ट्रपति तक भेजा गया ज्ञापन

प्रदर्शन के बाद सिटी मजिस्ट्रेट जितेंद्र ओझा को ज्ञापन सौंपा गया, जो प्रधानमंत्री, राष्ट्रपति, गृहमंत्री और भारत सरकार के जनगणना आयोग के नाम भेजा गया है।

ज्ञापन में स्पष्ट मांग रखी गई कि जनगणना प्रपत्र में ओबीसी का अलग कॉलम तत्काल जोड़ा जाए।

दूसरा बड़ा मुद्दा: “चुनाव में मिले ओबीसी को पूरा हक”

धरने के दौरान दूसरा ज्ञापन भी सौंपा गया, जिसमें आगामी पंचायत और नगर निकाय चुनावों में ओबीसी को सुप्रीम कोर्ट के निर्देशानुसार आरक्षण देने की मांग की गई।

एडवोकेट रतन लाल गुर्जर और महामंत्री सूर्य प्रकाश सुहालका ने बताया कि सुप्रीम कोर्ट द्वारा तय ट्रिपल टेस्ट प्रक्रिया का सही तरीके से पालन नहीं किया जा रहा है।

उन्होंने आरोप लगाया कि अधिकारियों ने घर-घर सर्वे करने के बजाय केवल औपचारिक रिपोर्ट तैयार कर दी, जिससे आयोग को वास्तविक आंकड़े नहीं मिल पा रहे हैं।

“फर्जी आंकड़ों से नहीं मिलेगा हक”

नेताओं ने चेतावनी दी कि यदि सही सर्वे नहीं हुआ और ओबीसी को उनका संवैधानिक अधिकार नहीं मिला, तो आंदोलन और तेज किया जाएगा।

बड़ी संख्या में समाजजन रहे मौजूद

इस विशाल प्रदर्शन में रमाकांत अजारिया, सुखलाल साहू, तुलसीराम लोहार, पी.एस. पटेल, बालकृष्ण सुहालका, करोड़ी लाल पूर्बिया, भंवरलाल पूर्बिया, डी.पी. लक्षकार, कमलेश गुर्जर, दिवाकर माली, शंकरलाल गुर्जर, पर्था डांगी, मोहनलाल पटेल, खेमराज पटेल, रामलाल पटेल, सीएम टांक, अशोक मेवाड़ा, सोहनलाल सुहालका सहित कई समाजजन मौजूद रहे।

महिला संगठन से मणी बेन पटेल, गंगा देवी माली, पूजा टेलर, तारा पूर्बिया, कल्पना पूर्बिया, मांगी देवी डांगी और नर्बदा डांगी समेत बड़ी संख्या में महिलाओं की भागीदारी भी देखने को मिली।

साफ चेतावनी: “अब चुप नहीं बैठेगा ओबीसी”

प्रदर्शन के अंत में समाज ने एक स्वर में ऐलान किया— “अगर सरकार ने जल्द ही ओबीसी का अलग कॉलम नहीं जोड़ा, तो प्रदेशभर में उग्र आंदोलन होगा और इसकी पूरी जिम्मेदारी सरकार की होगी।”

 उदयपुर से उठी यह आवाज अब प्रदेश और देश की राजनीति में बड़ा मुद्दा बनने के संकेत दे रही है।