शिक्षा और हक की लड़ाई: उदयपुर में ओबीसी समाज ने छात्रावास, छात्रवृत्ति और आरक्षण की मांग उठाई
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रिपोर्ट - प्रवीण वेद (बबलू) झाड़ोल

उदयपुर। राजस्थान में ओबीसी समाज के हकों और शिक्षा के मुद्दों को लेकर अब आवाज और बुलंद होती नजर आ रही है। सर्व ओबीसी समाज महापंचायत ट्रस्ट (रजि.) उदयपुर की बैठक में समाज के सर्वांगीण विकास को लेकर कई बड़े और निर्णायक प्रस्ताव सामने आए, जिनमें संभाग स्तर पर छात्रावास निर्माण, टीएसपी क्षेत्र में 27% आरक्षण बहाल करने और विद्यार्थियों को एससी-एसटी के समान छात्रवृत्ति देने की मांग प्रमुख रही।

ट्रस्ट अध्यक्ष लोकेश चौधरी ने साफ कहा कि प्रदेश में ओबीसी समाज की आबादी करीब 60% होने के बावजूद शिक्षा और संसाधनों में यह वर्ग अब भी पीछे है। आर्थिक तंगी के कारण बड़ी संख्या में छात्र-छात्राएं पढ़ाई बीच में छोड़ने को मजबूर हैं। ऐसे में संभाग स्तर पर बालक-बालिका छात्रावास खोलना केवल सुविधा नहीं, बल्कि समाज के भविष्य को मजबूत करने का आधार है।

संस्थापक दिनेश माली और प्रवक्ता नरेश पूर्बिया ने बताया कि ओबीसी समाज को संगठित और जागरूक करने के लिए व्यापक अभियान चलाया जाएगा। इसी कड़ी में जागरूकता पोस्टर का विमोचन किया गया। उन्होंने सरकार से मांग की कि ओबीसी विद्यार्थियों को भी एससी-एसटी के समान छात्रवृत्ति का लाभ दिया जाए, ताकि कोई भी छात्र आर्थिक कारणों से शिक्षा से वंचित न रहे।

बैठक में टीएसपी क्षेत्र का मुद्दा भी जोरदार तरीके से उठा। वक्ताओं ने कहा कि यहां ओबीसी का आरक्षण लगभग शून्य कर दिया गया है, जो सामाजिक न्याय के सिद्धांत के विपरीत है। मंडल आयोग की सिफारिश के अनुसार 27% आरक्षण बहाल किया जाना चाहिए।

इसके साथ ही ओबीसी प्रमाण पत्र की वैधता को लाइफटाइम करने या कम से कम 5 वर्ष तक मान्य रखने, क्रीमी लेयर की शर्त को समाप्त करने या आय सीमा बढ़ाकर 15 लाख रुपये वार्षिक करने की मांग भी रखी गई। ट्रस्ट ने यूजीसी बिल 2026 को जल्द लागू करने और 33% महिला आरक्षण में ओबीसी महिलाओं के लिए कम से कम 27% कोटा सुनिश्चित करने की भी मांग उठाई।

एक बड़ी घोषणा करते हुए ट्रस्ट ने कहा कि 90% से अधिक अंक लाने वाले ओबीसी विद्यार्थियों को राजस्थान प्रशासनिक सेवा सहित अन्य प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी के लिए निशुल्क कोचिंग उपलब्ध कराई जाएगी, जिससे समाज के प्रतिभाशाली युवाओं को आगे बढ़ने का अवसर मिल सके।

बैठक में सरंक्षक रमाकांत अजारिया, उपाध्यक्ष पी.एस. पटेल व एडवोकेट रतन लाल गुर्जर, महासचिव सूर्य प्रकाश सुहालका, सचिव भेरूलाल भोई व किशन राव, कोषाध्यक्ष बाल कृष्ण सुहालका, भेरूलाल कलाल, अशोक मेवाड़ा और प्रदेश महिला अध्यक्ष मणी बेन पटेल सहित कई पदाधिकारियों ने महत्वपूर्ण सुझाव रखे।

यह बैठक केवल चर्चा तक सीमित नहीं रही, बल्कि ओबीसी समाज के अधिकारों, शिक्षा और समान अवसर की लड़ाई को नई दिशा देने वाली साबित हुई। आने वाले समय में इन मांगों को लेकर बड़े स्तर पर आंदोलन की रणनीति भी तय किए जाने के संकेत मिले हैं।