अंतर्राष्ट्रीय नर्सेज दिवस विशेष: मानवता की सेवा का संकल्प और 'लेडी विद द लैंप' की विरासत
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रिपोर्ट - प्रवीण वेद (बबलू) झाड़ोल

उदयपुर। हर साल 12 मई का दिन दुनिया भर में उन 'सेवा के दूतों' को समर्पित होता है, जो अपनी परवाह किए बिना दूसरों का जीवन बचाते हैं। अंतर्राष्ट्रीय नर्सेज दिवस आधुनिक नर्सिंग की जननी फ्लोरेंस नाइटेंगल के जन्मदिन के उपलक्ष्य में मनाया जाता है। उदयपुर सहित पूरे देश में इस दिन को "मानव सेवा ही नर्सिंग का मूल सिद्धांत" के भाव के साथ हर्षोल्लास से मनाया जाएगा।

​फ्लोरेंस नाइटेंगल: एक दीया, जिसने बदल दी नर्सिंग की दुनिया

​12 मई 1820 को जन्मी फ्लोरेंस नाइटेंगल मात्र एक नर्स नहीं, बल्कि एक महान समाज सुधारक थीं। उनके जीवन के कुछ मुख्य पहलू जिन्होंने चिकित्सा जगत को नई दिशा दी:

​लेडी विद द लैंप: क्रीमियन युद्ध (1853-1856) के दौरान फ्लोरेंस ने 38 नर्सों की टीम के साथ तुर्की के स्कूटरी अस्पताल में घायल सैनिकों की सेवा की। वे रात के अंधेरे में भी हाथ में लालटेन (लैंप) लेकर मरीजों की सुध लेने निकलती थीं, इसीलिए उन्हें यह नाम मिला।

​स्वच्छता से जीवन की रक्षा: उन्होंने साबित किया कि दवा के साथ-साथ स्वच्छता और शुद्ध वातावरण मृत्यु दर को कम करने में निर्णायक होते हैं।

​नर्सिंग को बनाया सम्मानजनक पेशा: 1860 में पहले नर्सिंग स्कूल की स्थापना कर उन्होंने इस क्षेत्र को एक पेशेवर और सम्मानजनक दर्जा दिलाया।

​"नर्सिंग एक कला है; और यदि इसे एक कला बनाना है, तो इसके लिए एक अनन्य भक्ति की आवश्यकता होती है।" — फ्लोरेंस नाइटेंगल

​भारत के प्रति उनका समर्पण

​भले ही फ्लोरेंस नाइटेंगल ब्रिटिश मूल की थीं, लेकिन भारत के स्वास्थ्य ढांचे को सुधारने में उनका बड़ा योगदान रहा। उन्होंने भारत के ग्रामीण क्षेत्रों में स्वच्छ पानी और स्वास्थ्य शिक्षा पर जोर दिया। साथ ही, भारत में अकाल के समय राहत कार्यों के लिए मजबूती से पैरवी की। उनके इन्ही कार्यों के लिए 1907 में उन्हें 'ऑर्डर ऑफ द मेरिट' से सम्मानित किया गया।

​आधुनिक समय के 'नाइटेंगल': सेवा की अनूठी मिसाल (नरेश पूर्बिया)

​आज के दौर में भी फ्लोरेंस नाइटेंगल के पदचिह्नों पर चलते हुए कई नर्सेज समाज के लिए प्रेरणा बन रहे हैं। उदयपुर के एमबी हॉस्पिटल के सीनियर नर्सिंग ऑफिसर नरेश पूर्बिया इसका जीवंत उदाहरण हैं।

​नरेश पूर्बिया के सेवा कार्य एक नजर में:

​कोरोना काल का संघर्ष: बिना किसी अवकाश के निरंतर मरीजों की जान बचाने में जुटे रहे।

​रक्तवीर की पहचान: मरीजों के लिए अब तक 13 बार रक्तदान और 2 बार एसडीपी (सिंगल डोनर प्लेटलेट्स) डोनेट कर चुके हैं।

​बहुआयामी सामाजिक सरोकार: वे न केवल अस्पताल में मार्गदर्शन देते हैं, बल्कि योग, यज्ञ, पर्यावरण संरक्षण (वृक्षारोपण) और गौ सेवा जैसे कार्यों में भी अग्रणी रहते हैं।

​सम्मान और प्रोत्साहन

​नर्सिंग समुदाय के इस अतुलनीय योगदान को देखते हुए राज्य सरकार ने इस वर्ष एक विशेष घोषणा की है। अंतर्राष्ट्रीय नर्सेज दिवस के कार्यक्रमों में भाग लेने वाले नर्सेज को एक दिन का विशेष अवकाश दिया जाएगा। जिला और प्रांत स्तर पर होने वाले कार्यक्रमों में उत्कृष्ट कार्य करने वाले नर्सिंग कर्मियों को सम्मानित भी किया जाएगा।

फ्लोरेंस नाइटेंगल द्वारा लिखी गई 200 से अधिक पुस्तकें (जैसे नोट्स ऑन नर्सिंग) आज भी चिकित्सा जगत का मार्गदर्शन कर रही हैं। यह दिन हमें याद दिलाता है कि एक नर्स केवल उपचार नहीं करती, बल्कि वह मरीज को उम्मीद और नया जीवन देती है।