राजस्थान में जर्जर स्कूल भवनों पर सरकार सख्त अब शिक्षक नहीं, इंजीनियर तय करेंगे कौन-सा स्कूल सुरक्षित और कौन खतरे में
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रिपोर्ट - बबलू वेद/डेस्क

जयपुर। राजस्थान में सरकारी स्कूलों के जर्जर भवनों को लेकर राज्य सरकार ने बड़ा और सख्त कदम उठाया है। अब किसी भी स्कूल भवन को सुरक्षित या असुरक्षित घोषित करने का अधिकार केवल तकनीकी विशेषज्ञों और इंजीनियरों के पास होगा। शिक्षा विभाग ने स्पष्ट किया है कि शिक्षक या स्थानीय स्तर पर बिना तकनीकी जांच के भवनों को सुरक्षित नहीं माना जाएगा।

सरकार ने प्रदेशभर के पुराने, क्षतिग्रस्त और जर्जर स्कूल भवनों का तकनीकी सर्वे कराने के निर्देश जारी किए हैं। इसके तहत सार्वजनिक निर्माण विभाग (PWD) और संबंधित इंजीनियरिंग टीमों द्वारा स्कूल भवनों की जांच कर रिपोर्ट तैयार की जाएगी। रिपोर्ट के आधार पर ही तय होगा कि भवन में बच्चों की पढ़ाई जारी रहेगी या उसे तत्काल खाली कराया जाएगा।

प्रदेश में कई बार स्कूल भवनों की छत गिरने और दीवार ढहने जैसी घटनाओं के बाद सरकार ने यह निर्णय लिया है। बरसात के मौसम को देखते हुए शिक्षा विभाग ने विशेष सतर्कता बरतने के निर्देश दिए हैं, ताकि विद्यार्थियों की सुरक्षा से कोई समझौता न हो।

सूत्रों के अनुसार जिन स्कूलों की इमारतें खतरनाक श्रेणी में पाई जाएंगी, वहां वैकल्पिक व्यवस्था कर बच्चों की कक्षाएं संचालित की जाएंगी। साथ ही मरम्मत और नए भवन निर्माण के प्रस्ताव भी तेजी से तैयार किए जाएंगे।

शिक्षा विभाग ने जिला शिक्षा अधिकारियों, प्रधानाचार्यों और स्थानीय प्रशासन को निर्देश दिए हैं कि किसी भी जर्जर भवन में बच्चों को बैठाने में लापरवाही नहीं बरती जाए। सरकार का कहना है कि विद्यार्थियों की सुरक्षा सर्वोच्च प्राथमिकता है और किसी भी स्तर पर जोखिम स्वीकार नहीं किया जाएगा।