"शिक्षा विभाग की पूर्व निदेशक बोलीं - आर्य वीर दल शिविर प्राचीन गुरुकुल का जीवंत स्वरूप, अखबारों से बढ़कर है यहाँ का अनुशासन"
Total Views : 42
Zoom In Zoom Out Read Later Print

एनपी न्यूज 24/ गजेन्द्र मालवीय, डेस्क

पाली, 19 जून 2026 भारत विकास परिषद पाली की अध्यक्ष एवं शिक्षा विभाग की पूर्व अतिरिक्त निदेशक श्रीमती नूतन बाला कपिला तथा सेवा निवृत्त सीबीईओ रायपुर सुश्री पुष्पा परिहार ने आज आर्य वीर दल के आत्मरक्षा एवं चरित्र निर्माण प्रशिक्षण शिविर का अवलोकन किया। बौद्धिक सत्र में श्रीमती कपिला ने कहा - "जीवन में शिक्षा का महत्व तभी है जब वह चरित्र और संस्कार दे। केवल डिग्री नहीं, स्वामी दयानंद जी के आदर्शों पर चलकर राष्ट्र निर्माण में योगदान देने वाले नागरिक बनना है। आर्य वीर दल जैसी पवित्र संस्था में प्रतिदिन आना हर बच्चे का सौभाग्य है।" उन्होंने वेदों के महत्व पर प्रकाश डालते हुए बच्चों को वेद-पथ पर चलने का आह्वान किया। पूर्व सीबीईओ सुश्री पुष्पा परिहार ने कहा "चरित्र निर्माण के बिना शिक्षा अधूरी है। व्यक्ति के निर्माण से ही राष्ट्र का निर्माण होता है। आज के भटके हुए समाज को दिशा देने के लिए ऐसे शिविरों की महती आवश्यकता है।"

"अखबार से अधिक, प्रत्यक्ष प्रमाण"

दोनों अतिथियों ने एक घंटे से अधिक समय तक शिविर की गतिविधियों - ध्यान, योग, लाठी, नियुद्धम्, भोजन से पूर्व बच्चों द्वारा किया गया मंत्रोच्चार एवं अनुशासित दिनचर्या का सूक्ष्म अवलोकन किया। अवलोकन के पश्चात मुक्त कंठ से उद्गार व्यक्त किए: "अखबारों में शिविर के बारे में जैसा छपता है, प्रत्यक्ष उससे कहीं अधिक प्रभावशाली है। यहां का वातावरण, बच्चों का अनुशासन और संस्कार देखकर ऐसा प्रतीत होता है मानो हम आज किसी प्राचीन गुरुकुल में उपस्थित हैं। 

शिविर में 5 से 16 वर्ष के 110+ बच्चे ध्यान-योग-शस्त्र और शास्त्र की चतुर्विध शिक्षा ग्रहण कर रहे हैं। सुबह 5:30 से रात्रि 9:00 बजे तक गुरुकुल पद्धति से प्रशिक्षण प्राप्त कर रहे हैं। शिविर में आज महेश मुखी, पाली की ओर से सभी 110+ बच्चों एवं अभिभावकों के लिए विशेष स्वादिष्ट दूध की खीर का वितरण किया गया। खीर निर्माण में श्री मुकेश देवड़ा एवं श्री विनोद सिंह तोमर का सक्रिय सहयोग रहा।

शिविर में पधारीं श्रीमती नूतन बाला कपिला तथा सुश्री पुष्पा परिहार सहित उपस्थित अभिभावकों ने खीर का स्वाद चखकर मुक्त कंठ से सराहना की। अतिथियों ने कहा - "इस खीर के सामने सरकारी स्कूलों का पोषाहार फीका है। इसमें केवल दूध-चावल नहीं, सेवा का भाव और संस्कार का स्वाद घुला है। ऐसे पौष्टिक एवं सात्विक भोजन से ही चरित्रवान पीढ़ी का निर्माण संभव है।" खीर ग्रहण करने के बाद एक अभिभावक ने भावुक होकर कहा - "सरकारी स्कूल में बच्चा मिड-डे मील नखरे करके खाता है, यहां दो-दो बार मांग रहा है। अंतर साफ है वहां योजना है, यहां प्रार्थना है।"

प्रचार मंत्री घेवरचन्द आर्य ने बताया कि प्रतिभागियों और उनके अभिभावकों की मांग पर आर्य समाज मंत्री विजयराज आर्य, उपमंत्री कुन्दन चौहान, आर्य वीर दल संरक्षक धनराज आर्य, अध्यक्ष दिलीप परिहार, वरिष्ठ उपाध्यक्ष शंकर हंस, सचिव हनुमान जांगिड़, कोषाध्यक्ष महेन्द्र प्रजापत, सहित पदाधिकारियों ने विचार विमर्श कर शिविर का समापन 20 जून के स्थान पर 7 दिन आगे बढ़ाकर 27 जून को करने का निर्णय लिया है।

संस्कारों से चरित्र निर्माण का यह शिविर अत्यंत प्रशंसनीय एवं अनुकरणीय है।"

श्रीमती नूतन बाला कपिला,

पूर्व अतिरिक्त निदेशक, शिक्षा विभाग

आर्य वीर दल शिविर में चरित्र निर्माण से राष्ट्र निर्माण का प्रयास सराहनीय है।

सुश्री पुष्पा परिहार 

सेवानिवृत्त सीबीईओ रायपुर

प्रचार मंत्री आर्य वीर दल पाली