मृत्युभोज में घी के मालपुए नहीं बनने पर पंचायत के कथित फैसले से बढ़ा विवाद, पीड़ित परिवारों ने प्रशासन से कार्रवाई की मांग
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एनपी न्यूज 24/ गजेन्द्र मालवीय, डेस्क

सादा भोजन पर सामाजिक बहिष्कार का आरोप, 43 परिवारों ने न्याय की लगाई गुहार

सिरोही। जिले के बरलूट थाना क्षेत्र के मंडावरिया गांव में सामाजिक बहिष्कार को लेकर विवाद सामने आया है। पीड़ित परिवारों का आरोप है कि मृत्युभोज में परंपरा के अनुसार घी के मालपुए नहीं बनाए जाने पर पंचायत के कुछ लोगों ने परिवार सहित कुल 43 परिवारों के सामाजिक बहिष्कार का कथित फैसला सुना दिया। मामले को लेकर प्रभावित परिवारों ने प्रशासन से हस्तक्षेप और न्याय की मांग की है।

पीड़ितों के अनुसार, 5 जून को एक परिजन का निधन हुआ था। आर्थिक तंगी के कारण 17 जून को आयोजित मृत्युभोज में केवल सादा भोजन कराया गया। आरोप है कि इसके अगले दिन पंचायत की बैठक में इस बात को लेकर नाराजगी जताई गई और सामाजिक बहिष्कार जैसा निर्णय सुनाया गया।

राशन, पानी और रोजगार प्रभावित होने का आरोप

प्रभावित परिवारों का कहना है कि कथित फैसले के बाद गांव के कुछ दुकानदारों ने राशन देना बंद कर दिया, सार्वजनिक कुएं से पानी भरने में भी दिक्कतें आने लगीं और कई लोगों को मजदूरी तक नहीं मिल रही है। उनका कहना है कि इससे परिवारों के सामने आजीविका का संकट खड़ा हो गया है।

शादी-ब्याह और सामाजिक कार्यक्रमों पर भी असर

पीड़ितों का दावा है कि इस निर्णय के कारण रिश्तेदार भी सामाजिक कार्यक्रमों में आने से कतराने लगे हैं। कुछ लोगों ने आरोप लगाया कि पंचायत के कथित आदेश के डर से कई रिश्तेदार शादी समारोहों में शामिल नहीं हुए। इससे परिवार सामाजिक और मानसिक रूप से भी प्रभावित हुए हैं।

पीड़ितों ने सुनाई आपबीती

प्रभावित लोगों का कहना है कि कथित सामाजिक बहिष्कार के कारण गांव में उनसे बातचीत कम हो गई है और सामान्य सामाजिक संबंध भी प्रभावित हुए हैं। उनका आरोप है कि वे लगातार भय और दबाव के माहौल में जीवन जी रहे हैं।

कानूनी पहलू भी उठा

मामले में कुछ विधि विशेषज्ञों का कहना है कि यदि किसी व्यक्ति या परिवार का सामाजिक बहिष्कार कर उनके मूल अधिकारों में बाधा पहुंचाई जाती है, तो ऐसे मामलों में संबंधित कानूनों के तहत कार्रवाई का प्रावधान हो सकता है। हालांकि, इसकी पुष्टि जांच और उपलब्ध तथ्यों के आधार पर ही होगी।

पुलिस और प्रशासन से कार्रवाई की मांग

पीड़ित परिवारों ने पहले स्थानीय थाने में शिकायत देने और बाद में जिला प्रशासन को ज्ञापन सौंपकर पूरे मामले की निष्पक्ष जांच कराने तथा दोषियों के विरुद्ध उचित कानूनी कार्रवाई करने की मांग की है।