एनपी न्यूज 24/ गजेन्द्र मालवीय, डेस्क
सरकार पेश करेगी चुनावी रोडमैप, ओबीसी आरक्षण से लेकर चुनाव कार्यक्रम तक होगी चर्चा; नए विकास कार्य, तबादले और सरकारी घोषणाओं पर लग सकती है रोक
जयपुर। राजस्थान में लंबे समय से लंबित पंचायत राज संस्थाओं और शहरी निकाय चुनावों को लेकर सोमवार की सुनवाई बेहद महत्वपूर्ण मानी जा रही है। राज्य सरकार सोमवार को राजस्थान हाईकोर्ट में चुनाव संबंधी विस्तृत रिपोर्ट पेश करेगी। इस रिपोर्ट में चुनाव कराने की समय-सीमा, ओबीसी आरक्षण की स्थिति, परिसीमन, मतदाता सूची, चुनावी तैयारियों और प्रस्तावित कार्यक्रम का पूरा ब्यौरा शामिल रहेगा। माना जा रहा है कि इस सुनवाई के बाद प्रदेश में पंचायत और निकाय चुनाव की दिशा काफी हद तक स्पष्ट हो जाएगी।
प्रदेश में पंचायत समितियों, जिला परिषदों, नगर निगमों, नगर परिषदों और नगरपालिकाओं के चुनाव समय पर नहीं हो पाने के कारण लगातार राजनीतिक और प्रशासनिक स्तर पर चर्चा चल रही है। कई जनहित याचिकाओं की सुनवाई के दौरान राजस्थान हाईकोर्ट ने भी चुनाव में हो रही देरी पर गंभीर टिप्पणी करते हुए राज्य सरकार और राज्य निर्वाचन आयोग से स्पष्ट जवाब मांगा था। अदालत ने सरकार से पूछा था कि चुनाव कराने में आखिर बाधा क्या है और चुनाव कब तक कराए जाएंगे।
मुख्यमंत्री स्तर पर कई दौर की बैठकें
हाईकोर्ट के निर्देशों के बाद मुख्यमंत्री कार्यालय में लगातार उच्चस्तरीय बैठकों का दौर चला। मुख्यमंत्री, मुख्य सचिव, महाधिवक्ता, पंचायत राज विभाग, स्वायत्त शासन विभाग और राज्य निर्वाचन आयोग के वरिष्ठ अधिकारियों ने रिपोर्ट के प्रत्येक बिंदु पर विस्तार से मंथन किया। सरकार ने अदालत में कोई अधूरी जानकारी न जाए, इसके लिए कानूनी और प्रशासनिक पहलुओं पर भी विस्तार से विचार किया गया।
सूत्रों के अनुसार सरकार ने अदालत के समक्ष यह प्रस्ताव रखने की तैयारी की है कि पंचायत एवं शहरी निकाय चुनाव 15 अगस्त से 15 नवंबर के बीच संपन्न कराए जा सकते हैं। हालांकि अंतिम निर्णय हाईकोर्ट की सुनवाई और उसके बाद राज्य निर्वाचन आयोग की कार्रवाई पर निर्भर करेगा।
ओबीसी आरक्षण सबसे बड़ा मुद्दा
इस बार चुनावी प्रक्रिया में सबसे अहम विषय ओबीसी आरक्षण को माना जा रहा है। सरकार को अदालत के समक्ष यह भी बताना होगा कि ट्रिपल टेस्ट की प्रक्रिया, आयोग की रिपोर्ट और आरक्षण निर्धारण की स्थिति क्या है। इसी आधार पर आगे चुनाव कार्यक्रम तय किया जाएगा। यदि अदालत सरकार की प्रक्रिया से संतुष्ट होती है तो चुनाव कार्यक्रम जारी होने का रास्ता आसान हो जाएगा।
आचार संहिता कभी भी हो सकती है लागू
जैसे ही राज्य निर्वाचन आयोग चुनाव कार्यक्रम घोषित करेगा, संबंधित पंचायतों और शहरी निकायों में आदर्श आचार संहिता तत्काल प्रभाव से लागू हो जाएगी। इसके साथ ही सरकार और जनप्रतिनिधियों की कई शक्तियों पर अस्थायी रोक लग जाएगी।
आचार संहिता लागू होने के बाद किसी भी नए विकास कार्य की घोषणा नहीं की जा सकेगी। नए शिलान्यास, उद्घाटन और लोकार्पण कार्यक्रम रद्द माने जाएंगे। नई सड़क, भवन, पेयजल योजना, सीसी रोड, नाली, सामुदायिक भवन, पुलिया या अन्य विकास कार्यों की स्वीकृति नहीं दी जाएगी। केवल वे कार्य जारी रह सकेंगे जिनकी प्रशासनिक और वित्तीय स्वीकृति पहले से जारी हो चुकी होगी और जिन पर कार्य प्रारंभ हो चुका होगा।
तबादलों पर लगेगी पूरी रोक
चुनाव प्रक्रिया के दौरान हजारों अधिकारियों और कर्मचारियों की आवश्यकता होगी। ऐसे में पंचायत राज, नगर निकाय, शिक्षा, राजस्व, चिकित्सा, पुलिस, कृषि, जलदाय और अन्य विभागों के अधिकारियों एवं कर्मचारियों के स्थानांतरण और नई पदस्थापनाओं पर तत्काल रोक लग जाएगी। जिन कर्मचारियों के स्थानांतरण आदेश पहले जारी हो चुके होंगे, उन्हें भी निर्वाचन आयोग की अनुमति के बिना कार्यमुक्त नहीं किया जाएगा।
मंत्रियों के सरकारी कार्यक्रमों पर भी रहेगा नियंत्रण
आचार संहिता लागू होने के बाद मंत्री संबंधित निर्वाचन क्षेत्रों में सरकारी कार्यक्रमों में भाग नहीं ले सकेंगे। सरकारी वाहन, सरकारी संसाधन और सायरन का चुनावी उपयोग प्रतिबंधित रहेगा। यदि किसी आपात स्थिति में मंत्री का दौरा आवश्यक होगा तो इसकी सूचना राज्य निर्वाचन आयोग को देनी होगी।
सरकारी विश्राम गृह, डाक बंगले और सरकारी आवासों का उपयोग चुनावी कार्यालय के रूप में नहीं किया जा सकेगा। चुनाव कार्य में लगे अधिकारी किसी मंत्री के स्वागत, प्रोटोकॉल या राजनीतिक बैठक में शामिल नहीं होंगे।
चुनाव में देरी से बढ़ रहा सरकारी खर्च
चुनाव में देरी का आर्थिक असर भी सामने आ रहा है। चुनाव के लिए खरीदी गई बड़ी संख्या में ईवीएम, बैलेट यूनिट और कंट्रोल यूनिट लंबे समय से वेयरहाउस में रखी हुई हैं। इनके रखरखाव, सुरक्षा और भंडारण पर सरकार को हर महीने लाखों रुपये खर्च करने पड़ रहे हैं। ऐसे में सरकार भी जल्द चुनाव कराने के पक्ष में दिखाई दे रही है।
राजनीतिक दलों ने भी बढ़ाई सक्रियता
संभावित चुनाव कार्यक्रम को देखते हुए भाजपा, कांग्रेस सहित अन्य राजनीतिक दलों ने भी संगठन स्तर पर तैयारियां तेज कर दी हैं। पंचायत और निकाय स्तर पर संभावित प्रत्याशी सक्रिय हो चुके हैं। कई स्थानों पर स्थानीय स्तर पर बैठकों और जनसंपर्क अभियान की शुरुआत भी हो गई है। अंतिम कार्यक्रम घोषित होते ही प्रत्याशियों के चयन और चुनाव प्रचार को गति मिलने की संभावना है।
प्रदेशभर की निगाहें कल की सुनवाई पर
सोमवार को होने वाली हाईकोर्ट की सुनवाई केवल एक कानूनी प्रक्रिया नहीं, बल्कि प्रदेश की स्थानीय सरकारों के गठन की दिशा तय करने वाली सुनवाई मानी जा रही है। यदि सरकार अदालत को संतोषजनक रोडमैप प्रस्तुत करने में सफल रहती है तो पंचायत और शहरी निकाय चुनाव का रास्ता लगभग साफ हो सकता है। इसके बाद राज्य निर्वाचन आयोग कभी भी चुनाव कार्यक्रम जारी कर सकता है और उसी के साथ प्रदेश में आदर्श आचार संहिता लागू होने की संभावना भी प्रबल हो जाएगी।
अब पूरे राजस्थान की निगाहें सोमवार को हाईकोर्ट में होने वाली सुनवाई पर टिकी हैं, जहां से पंचायत और शहरी निकाय चुनाव की उल्टी गिनती शुरू होने की उम्मीद है।
