एनपी न्यूज 24/ गजेन्द्र मालवीय, डेस्क
सितंबर में शहरी निकाय और अक्टूबर में पंचायत चुनाव की संभावना, ओबीसी आरक्षण, वार्ड आरक्षण और कानूनी प्रक्रिया तय करेगी चुनाव की अंतिम तारीख
जयपुर। राजस्थान में लंबे समय से लंबित पंचायत राज संस्थाओं और शहरी निकायों के चुनाव अब निर्णायक मोड़ पर पहुंच चुके हैं। सोमवार को राजस्थान हाईकोर्ट में होने वाली सुनवाई को प्रदेश की स्थानीय सरकारों के भविष्य के लिए सबसे महत्वपूर्ण माना जा रहा है। राज्य सरकार और राज्य निर्वाचन आयोग अदालत के समक्ष चुनाव संबंधी विस्तृत रिपोर्ट पेश करेंगे। इसी रिपोर्ट के आधार पर चुनाव कराने की समय-सीमा स्पष्ट होगी और यह तय होगा कि प्रदेश में पंचायत और निकाय चुनाव कब होंगे।
सरकार की तैयारियों और प्रशासनिक स्तर पर चल रही कवायद को देखते हुए संकेत मिल रहे हैं कि शहरी निकाय चुनाव सितंबर के पहले सप्ताह से शुरू हो सकते हैं, जबकि पंचायत चुनाव अक्टूबर के दूसरे सप्ताह में कराए जाने की संभावना सबसे अधिक है। हालांकि अंतिम कार्यक्रम राज्य निर्वाचन आयोग ही जारी करेगा और यह हाईकोर्ट की सुनवाई के बाद तय होगा।
यह मामला केवल चुनाव की तारीख तय करने तक सीमित नहीं है। इसके पीछे कई संवैधानिक, कानूनी और प्रशासनिक प्रक्रियाएं जुड़ी हुई हैं, जिन्हें पूरा किए बिना चुनाव कराना संभव नहीं माना जा रहा। यही कारण है कि सरकार अदालत के समक्ष पूरा चुनावी रोडमैप प्रस्तुत कर रही है।
पंचायत चुनाव अक्टूबर तक पहुंचने का सबसे बड़ा कारण ओबीसी आरक्षण प्रक्रिया है। सुप्रीम कोर्ट के निर्देशों के अनुरूप चुनाव कराने के लिए राज्य सरकार ने ओबीसी प्रतिनिधित्व आयोग का गठन किया है। आयोग को स्थानीय निकायों और पंचायतों में ओबीसी आबादी तथा प्रतिनिधित्व का अध्ययन कर रिपोर्ट तैयार करनी है। जानकारी के अनुसार आयोग अपनी रिपोर्ट अगस्त के पहले सप्ताह में सरकार को सौंप सकता है। इसके बाद सरकार रिपोर्ट का परीक्षण करेगी और राज्य निर्वाचन आयोग को भेजेगी।
ओबीसी रिपोर्ट मिलने के बाद वार्डों और सीटों का आरक्षण तय होगा। इसके लिए लॉटरी प्रक्रिया अपनाई जाएगी। ग्राम पंचायत, पंचायत समिति, जिला परिषद, नगर पालिका, नगर परिषद और नगर निगमों के वार्डों का आरक्षण घोषित किया जाएगा। आरक्षण सूची पर यदि कोई आपत्ति आती है तो उसका निस्तारण भी करना होगा। इन सभी प्रक्रियाओं में कई दिन का समय लगना तय है।
इसके बाद राज्य निर्वाचन आयोग अंतिम मतदाता सूची का प्रकाशन करेगा। मतदान केन्द्रों का निर्धारण, मतदान दलों की नियुक्ति, चुनाव सामग्री की व्यवस्था, अधिकारियों और कर्मचारियों का प्रशिक्षण तथा सुरक्षा व्यवस्था जैसी तैयारियां भी पूरी करनी होंगी। पंचायत चुनाव कई चरणों में कराए जाते हैं, इसलिए पूरा कार्यक्रम अक्टूबर तक पहुंचना स्वाभाविक माना जा रहा है।
राजस्थान हाईकोर्ट ने पिछली सुनवाई के दौरान चुनाव में हो रही देरी पर कड़ी नाराजगी जताई थी। अदालत ने स्पष्ट कहा था कि लोकतांत्रिक संस्थाओं के चुनाव अनिश्चितकाल तक टाले नहीं जा सकते। सरकार और राज्य निर्वाचन आयोग से पूछा गया था कि आखिर चुनाव कराने में देरी क्यों हो रही है और चुनाव कब तक कराए जाएंगे। अदालत ने सरकार को विस्तृत रिपोर्ट पेश करने के निर्देश दिए थे।
हाईकोर्ट की सख्ती के बाद मुख्यमंत्री स्तर पर कई दौर की बैठकें हुईं। मुख्य सचिव, महाधिवक्ता, पंचायत राज विभाग, स्वायत्त शासन विभाग और राज्य निर्वाचन आयोग के वरिष्ठ अधिकारियों ने चुनावी तैयारियों की समीक्षा की और अदालत में प्रस्तुत किए जाने वाले जवाब को अंतिम रूप दिया। माना जा रहा है कि सरकार अदालत को यह भरोसा दिलाएगी कि सभी आवश्यक प्रक्रियाएं तय समय में पूरी कर चुनाव जल्द कराए जाएंगे।
यदि हाईकोर्ट सरकार की कार्ययोजना से संतुष्ट होता है तो राज्य निर्वाचन आयोग चुनाव कार्यक्रम जारी करने की प्रक्रिया शुरू कर देगा। चुनाव कार्यक्रम जारी होते ही संबंधित जिलों और निर्वाचन क्षेत्रों में आदर्श आचार संहिता तत्काल प्रभाव से लागू हो जाएगी। इसके बाद नए विकास कार्यों की घोषणा, शिलान्यास, उद्घाटन, लोकार्पण, नई योजनाओं की स्वीकृति और नए कार्यादेश जारी नहीं किए जा सकेंगे। केवल पहले से स्वीकृत और प्रगति पर चल रहे कार्य ही जारी रहेंगे।
आचार संहिता लागू होने के साथ ही पंचायत राज, नगर निकाय, शिक्षा, राजस्व, चिकित्सा, पुलिस तथा अन्य विभागों के अधिकारियों और कर्मचारियों के तबादलों पर भी रोक लग जाएगी। चुनाव ड्यूटी के लिए बड़ी संख्या में कर्मचारियों की आवश्यकता होने के कारण निर्वाचन आयोग की अनुमति के बिना किसी भी कर्मचारी को कार्यमुक्त नहीं किया जाएगा।
