एनपी न्यूज 24/ गजेन्द्र लोहार, डेस्क
फलासिया। किसानों की आय बढ़ाने, तिलहन फसलों का स्थानीय स्तर पर प्रसंस्करण करने और कृषि उत्पादों का मूल्य संवर्धन सुनिश्चित करने के उद्देश्य से भारत सरकार की राष्ट्रीय खाद्य तेल-तिलहन मिशन (NMEO-OS) योजना के अंतर्गत फलासिया तहसील क्षेत्र की ग्राम पंचायत आमोड स्थित फलासिया फार्मर प्रोड्यूसर कंपनी लिमिटेड (एफपीओ) को आधुनिक तेल निष्कर्षण (ऑयल एक्सट्रैक्शन) एवं प्रसंस्करण इकाई की स्थापना के लिए 33 प्रतिशत सब्सिडी स्वीकृत की गई। कृषि विभाग की ओर से यह अनुदान 31 मार्च को एफपीओ को प्राप्त हुआ।
एफपीओ के सीईओ सुन्दर सिंह गरासिया ने बताया कि इस इकाई का मुख्य उद्देश्य क्षेत्र के किसानों द्वारा उत्पादित मूंगफली, तिल, सरसों एवं अन्य तिलहन फसलों का स्थानीय स्तर पर प्रसंस्करण कर उन्हें बेहतर बाजार मूल्य उपलब्ध कराना है। पहले किसानों को अपनी उपज बेचने के लिए बाहरी बाजारों पर निर्भर रहना पड़ता था, लेकिन अब स्थानीय स्तर पर ही तेल निकालने और पैकेजिंग की सुविधा उपलब्ध होने से किसानों को अधिक लाभ मिलने की उम्मीद है।
कृषि अधिकारी अजय जोशी, गौरी शंकर जोशी ने बताया कि किसान उत्पादक संगठन (एफपीओ) किसानों को संगठित कर आधुनिक तकनीक, बेहतर विपणन व्यवस्था और सरकारी योजनाओं का लाभ दिलाने का कार्य कर रहा है। इस परियोजना से न केवल किसानों की आय में वृद्धि होगी, बल्कि ग्रामीण क्षेत्र में रोजगार के नए अवसर भी सृजित होंगे तथा स्थानीय स्तर पर गुणवत्तापूर्ण खाद्य तेल उपलब्ध कराया जा सकेगा।
परियोजना की स्वीकृति से पूर्व कृषि विभाग की ओर से कृषि अधिकारी अजय जोशी एवं कृषि अधिकारी गौरीशंकर जोशी ने स्थल निरीक्षण कर इकाई का भौतिक सत्यापन किया था। निरीक्षण रिपोर्ट एवं विभागीय प्रक्रिया पूर्ण होने के बाद एफपीओ को सब्सिडी स्वीकृत की गई।
कृषि विशेषज्ञों के अनुसार राष्ट्रीय खाद्य तेल-तिलहन मिशन का उद्देश्य देश में खाद्य तेलों के उत्पादन को बढ़ावा देना, किसानों को तिलहन फसलों के प्रति प्रोत्साहित करना तथा आयातित खाद्य तेलों पर निर्भरता कम करना है। इसी उद्देश्य से किसान उत्पादक संगठनों को प्रसंस्करण इकाइयों की स्थापना के लिए अनुदान उपलब्ध कराया जा रहा है।
फलासिया फार्मर प्रोड्यूसर कंपनी लिमिटेड की इस पहल से क्षेत्र के किसानों को अपनी उपज का स्थानीय स्तर पर मूल्य संवर्धन करने का अवसर मिलेगा। इससे किसानों को बेहतर आर्थिक लाभ मिलने के साथ-साथ एफपीओ मॉडल भी मजबूत होगा, जिससे कृषि आधारित ग्रामीण अर्थव्यवस्था को नई गति मिलने की उम्मीद है।
