पंचायती राज चुनाव 2026: आरक्षण प्रक्रिया शुरू, सरकार ने जारी किए आदेश; जिला कलेक्टर और एसडीएम करेंगे आरक्षण निर्धारण
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एनपी न्यूज 24/ गजेन्द्र लोहार, डेस्क

जयपुर। राजस्थान में प्रस्तावित पंचायती राज चुनाव-2026 की तैयारियां अब तेज हो गई हैं। ग्रामीण विकास एवं पंचायती राज विभाग ने पंचायत चुनाव के लिए आरक्षण निर्धारण और श्रेणीवार आवंटन की प्रक्रिया शुरू करने के आदेश जारी कर दिए हैं। शासन सचिव एवं आयुक्त की ओर से जारी अधिसूचना के अनुसार अब जिला कलेक्टर और उपखण्ड अधिकारियों को अपने-अपने अधिकार क्षेत्र में आरक्षण तय करने के अधिकार सौंप दिए गए हैं।

24 जुलाई 2026 को जारी अधिसूचना में राजस्थान पंचायती राज अधिनियम, 1994 की धारा 98 के तहत प्रदत्त शक्तियों का उपयोग करते हुए राज्य सरकार ने सभी जिला कलेक्टरों एवं उपखण्ड अधिकारियों को पंचायत चुनाव-2026 के लिए आरक्षण निर्धारण की प्रक्रिया पूरी करने के निर्देश दिए हैं।

आदेश के अनुसार जिला कलेक्टर अपने जिले की सभी पंचायत समितियों एवं जिला परिषदों के वार्डों (एकल निर्वाचन क्षेत्र) तथा प्रधान पदों का आरक्षण निर्धारित कर श्रेणीवार आवंटन करेंगे। वहीं उपखण्ड अधिकारी (एसडीएम) अपने क्षेत्र की ग्राम पंचायतों के वार्डों (एकल निर्वाचन क्षेत्र) एवं सरपंच पदों का आरक्षण तय करेंगे।

सरकार ने स्पष्ट किया है कि आरक्षण का निर्धारण राजस्थान पंचायती राज अधिनियम, 1994 तथा राजस्थान पंचायती राज (निर्वाचन) नियम, 1994 के नियम 5, 6, 7, 8 और 9 के अनुसार किया जाएगा। इसी प्रक्रिया के तहत अनुसूचित जाति, अनुसूचित जनजाति, अन्य पिछड़ा वर्ग तथा महिलाओं के लिए आरक्षित सीटों का निर्धारण और लॉटरी प्रक्रिया पूरी की जाएगी।

इस अधिसूचना को पंचायत चुनाव की दिशा में एक महत्वपूर्ण प्रशासनिक कदम माना जा रहा है। आरक्षण प्रक्रिया पूरी होने के बाद वार्डों और पदों की अंतिम आरक्षण सूची जारी होगी, जिसके आधार पर चुनाव कार्यक्रम घोषित करने की प्रक्रिया आगे बढ़ेगी।

उल्लेखनीय है कि राज्य सरकार पहले ही राजस्थान हाईकोर्ट में पंचायत चुनाव कराने का प्रस्तावित कार्यक्रम प्रस्तुत कर चुकी है। यदि चुनाव आयोग निर्धारित समय-सारिणी के अनुसार आगे बढ़ता है तो प्रदेश में पहले नगरीय निकाय चुनाव और उसके बाद पंचायत चुनाव कराए जा सकते हैं।

आरक्षण प्रक्रिया शुरू होने के साथ ही पंचायत चुनाव लड़ने के इच्छुक संभावित उम्मीदवारों की नजर अब आरक्षण सूची पर टिक गई है। प्रदेशभर में पंचायत स्तर पर राजनीतिक गतिविधियां तेज हो रही हैं और संभावित दावेदार अपने-अपने क्षेत्रों में सक्रिय हो गए हैं।