रिपोर्ट - बबलू वेद, झाड़ोल
पहाड़ों के बीच बहती रहस्यमयी धारा, हरियाली की चादर और शिवधाम के दर्शन से मिलता है मन को सुकून
झाड़ोल। अरावली की सुरम्य वादियों और घने जंगलों के बीच बसे झाड़ोल उपखंड के माणस गांव से करीब तीन किलोमीटर दूर स्थित अंबासिया महादेव मंदिर सावन के महीने में आस्था, प्रकृति और रोमांच का अनूठा संगम बन जाता है। चारों ओर ऊंचे-ऊंचे पहाड़, कल-कल बहती प्राकृतिक जलधारा, हरियाली से आच्छादित वन क्षेत्र और शांत वातावरण यहां पहुंचने वाले श्रद्धालुओं एवं प्रकृति प्रेमियों को मंत्रमुग्ध कर देता है।
श्रावण मास में विशेषकर सोमवार को यहां बड़ी संख्या में श्रद्धालु भगवान भोलेनाथ के दर्शन के लिए पहुंचते हैं। मंदिर परिसर में गूंजते 'हर-हर महादेव' के जयकारे और प्राकृतिक सौंदर्य श्रद्धालुओं को आध्यात्मिक शांति का अद्भुत अनुभव कराते हैं।
370 मंदिरों की ऐतिहासिक विरासत से जुड़ी है मान्यता
स्थानीय मान्यताओं के अनुसार प्राचीन काल में इस क्षेत्र में 370 मंदिर स्थापित थे, जहां एक साथ पूजा-अर्चना के दौरान घंटियों, झालरों और शंखनाद की गूंज पूरे वन क्षेत्र में सुनाई देती थी। समय के साथ यह क्षेत्र वीरान हो गया, लेकिन बाद में माणस गांव पुनः बसने पर जंगलों में खोज के दौरान अनेक प्राचीन मंदिरों के अवशेष मिले। इन्हीं में से एक अंबासिया महादेव मंदिर भी है, जहां पिछले लगभग 150 वर्षों से नियमित पूजा-अर्चना की परंपरा चली आ रही है। वर्ष 2013 में मंदिर का जीर्णोद्धार कर इसे नया स्वरूप प्रदान किया गया।
रोमांच से भर देता है मंदिर तक पहुंचने का सफर
अंबासिया महादेव तक पहुंचना अपने आप में एक यादगार अनुभव है। माणस गांव से लगभग तीन किलोमीटर डामर सड़क के बाद करीब एक किलोमीटर कच्चे रास्ते से होकर श्रद्धालुओं को गुजरना पड़ता है। रास्ते में बहता प्राकृतिक नाला, घने जंगल, ऊंची पहाड़ियां, पक्षियों की मधुर आवाज और हरियाली से सजा वातावरण यात्रा को रोमांचक बना देता है। प्रकृति का यह अनुपम दृश्य यहां आने वाले हर व्यक्ति के मन को मोह लेता है।
सावन में उमड़ती है आस्था की भीड़
श्रावण मास में विशेषकर सोमवार को दूर-दराज़ के गांवों से बड़ी संख्या में श्रद्धालु जलाभिषेक और पूजा-अर्चना के लिए पहुंचते हैं। श्रद्धालुओं का मानना है कि यहां सच्चे मन से की गई प्रार्थना भगवान शिव अवश्य स्वीकार करते हैं। धार्मिक आस्था के साथ-साथ यह स्थान पर्यटन की दृष्टि से भी तेजी से पहचान बना रहा है।
विशेष
घने जंगलों के बीच स्थित प्राचीन शिवधाम।
370 मंदिरों की ऐतिहासिक मान्यता से जुड़ा क्षेत्र।
करीब 150 वर्षों से लगातार हो रही पूजा-अर्चना।
वर्ष 2013 में हुआ मंदिर का जीर्णोद्धार।
पहाड़, झरना, हरियाली और प्राकृतिक सौंदर्य बनाते हैं यात्रा को यादगार।
श्रावण सोमवार पर उमड़ती है श्रद्धालुओं की भारी भीड़।
अंबासिया महादेव केवल एक मंदिर नहीं, बल्कि झाड़ोल की प्राकृतिक धरोहर, प्राचीन आस्था और आध्यात्मिक शांति का ऐसा संगम है, जहां पहुंचकर हर श्रद्धालु और प्रकृति प्रेमी स्वयं को प्रकृति की गोद में होने का सुखद अनुभव करता है।
