रिपोर्ट - बबलू वेद, झाड़ोल
16.75 लाख रुपये के मोबाइल बरामद, CEIR पोर्टल और तकनीकी जांच से अपराधियों की हर चाल हुई नाकाम
झाड़ोल | झाड़ोल थाना पुलिस ने एक बार फिर साबित कर दिया कि तकनीक और तत्परता के दम पर गुमशुदा मोबाइल भी वापस मिल सकते हैं। जिला पुलिस अधीक्षक उदयपुर डॉ. अमृता दुहन के निर्देशन में चलाए गए विशेष अभियान के तहत झाड़ोल पुलिस ने 127 गुमशुदा मोबाइल ट्रेस कर बड़ी सफलता हासिल की, जिनमें से 125 मोबाइल उनके वास्तविक मालिकों को लौटाए जा चुके हैं। बरामद मोबाइलों की कुल अनुमानित कीमत 16.75 लाख रुपये आंकी गई है।
गुरुवार को थाना परिसर में आयोजित कार्यक्रम के दौरान 23 गुमशुदा मोबाइल उनके मालिकों को सुपुर्द किए गए, जिनकी अनुमानित कीमत करीब 3 लाख रुपये है। महीनों से अपने मोबाइल वापस मिलने की उम्मीद छोड़ चुके लोगों के चेहरों पर खुशी साफ दिखाई दी। मोबाइल वापस मिलने पर नागरिकों ने झाड़ोल पुलिस की कार्यशैली की खुले दिल से सराहना करते हुए टीम का आभार व्यक्त किया।
CEIR पोर्टल बना सबसे बड़ा हथियार, तकनीक से मिली शानदार सफलता
बढ़ती मोबाइल गुमशुदगी और चोरी की घटनाओं पर प्रभावी नियंत्रण के लिए जिला पुलिस अधीक्षक डॉ. अमृता दुहन ने विशेष अभियान चलाने के निर्देश दिए थे। अभियान का पर्यवेक्षण अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक रजत बिश्नोई एवं वृताधिकारी विवेक सिंह ने किया। झाड़ोल थाना पुलिस ने सीईआईआर (CEIR) पोर्टल, आधुनिक तकनीकी विश्लेषण और साइबर ट्रैकिंग की मदद से विभिन्न स्थानों से मोबाइल ट्रेस कर बरामद किए और उनके वास्तविक मालिकों तक पहुंचाए।
झाड़ोल पुलिस की मेहनत लाई रंग
इस उल्लेखनीय सफलता के पीछे थाना पुलिस की सतत मेहनत और तकनीकी दक्षता रही। अभियान का नेतृत्व थानाधिकारी करणा राम ने किया। उनके साथ कांस्टेबल सुभाष चंद्र (मुख्य भूमिका), कांस्टेबल बालकृष्ण और कांस्टेबल उमेश कुमार ने लगातार तकनीकी जांच, ट्रैकिंग और समन्वय के माध्यम से मोबाइल बरामद करने में अहम भूमिका निभाई।
जनता का बढ़ा पुलिस पर विश्वास
गुमशुदा मोबाइल वापस मिलने से लोगों का पुलिस पर विश्वास और मजबूत हुआ है। झाड़ोल पुलिस की यह कार्रवाई न केवल तकनीकी दक्षता का उदाहरण है, बल्कि यह संदेश भी देती है कि यदि समय पर शिकायत दर्ज कराई जाए तो गुमशुदा मोबाइल मिलने की संभावना काफी बढ़ जाती है।
झाड़ोल पुलिस की यह उपलब्धि जिले में मोबाइल रिकवरी अभियान की सबसे उल्लेखनीय कार्रवाइयों में से एक मानी जा रही है, जिसने आमजन के बीच पुलिस की सकारात्मक छवि को और मजबूत किया है।
