एनपी न्यूज 24/ गजेन्द्र लोहार, डेस्क
आवारा पशु नहीं, पंचायत व्यवस्था को लेकर नाराजगी का अनोखा प्रतीकात्मक प्रदर्शन; ग्रामीणों ने व्यंग्य के जरिए उठाए भ्रष्टाचार और कामकाज से जुड़े सवाल
रायपुर, पाली। पाली जिले के रायपुर क्षेत्र के कुशालपुरा गांव में पंचायत भवन के अंदर सांड को गद्दी पर बैठाकर ग्रामीणों ने अनोखे अंदाज में अपना विरोध दर्ज कराया। पहली नजर में यह मामला आवारा पशुओं से जुड़ा दिखाई देता है, लेकिन ग्रामीणों का कहना है कि उनका निशाना सांड नहीं, बल्कि पंचायत की कथित व्यवस्था और भ्रष्टाचार को लेकर उनकी नाराजगी है।
ग्रामीणों ने सांड को पंचायत भवन में लाकर एक गद्दी पर बैठाया और उसके चारों ओर घेरा बना लिया। इसके बाद व्यंग्यात्मक अंदाज में आवाजें उठीं—“सरपंच साहब को कॉफी पिलाओ।” पंचायत भवन का यह नजारा देखते ही देखते गांव में चर्चा का विषय बन गया।
गद्दी पर सांड, चारों ओर ग्रामीणों का घेरा
ग्रामीणों ने सांड को पंचायत भवन में बैठाकर ऐसा दृश्य बनाया, मानो पंचायत की कुर्सी पर नया ‘सरपंच’ बैठा हो और गांव के लोग उसके चारों ओर अपनी समस्याएं लेकर खड़े हों। गद्दी पर बैठे सांड के सामने चारा-पानी की व्यवस्था भी की गई।
ग्रामीणों का कहना है कि यह किसी पशु के खिलाफ कार्रवाई नहीं थी, बल्कि व्यंग्य के माध्यम से पंचायत की कार्यप्रणाली पर सवाल उठाने का प्रतीकात्मक तरीका था।
“जनता सांड से नहीं, व्यवस्था से परेशान है”
ग्रामीणों के अनुसार, गांव में आवारा पशुओं की समस्या अपनी जगह हो सकती है, लेकिन इस प्रदर्शन का मुख्य मुद्दा वह नहीं है। ग्रामीणों का आरोप है कि पंचायत के कामकाज और कथित भ्रष्टाचार को लेकर लोगों में नाराजगी है।
इसी नाराजगी को अलग तरीके से सामने रखने के लिए सांड को पंचायत की ‘गद्दी’ पर बैठाने का प्रयोग किया गया। ग्रामीणों का कहना है कि जब जनता बार-बार अपनी बात रखने के बाद भी खुद को अनसुना महसूस करती है, तो विरोध के ऐसे प्रतीकात्मक तरीके सामने आते हैं।
“जब जनता थकती है, तो व्यंग्य में जवाब देती है”
ग्रामीणों का कहना है कि यह प्रदर्शन किसी एक व्यक्ति को निशाना बनाने के लिए नहीं किया गया। उनका कहना है कि पंचायत व्यवस्था में पारदर्शिता, विकास कार्यों और सरकारी राशि के उपयोग से जुड़े सवालों का जवाब रिकॉर्ड और जांच के माध्यम से मिलना चाहिए।
प्रदर्शन के दौरान ग्रामीणों ने व्यंग्य करते हुए कहा कि “खेत चरने वाला सांड तो दिखाई देता है, लेकिन पंचायत की व्यवस्था में क्या चर रहा है, इसका हिसाब कौन देगा?”
इसी तरह “सरपंच साहब को कॉफी पिलाओ” जैसे तंज के जरिए ग्रामीणों ने अपनी नाराजगी को हास्य के रूप में सामने रखा।
पंचायत भवन बना प्रतीकात्मक ‘दरबार’
सांड को गद्दी पर बैठाकर चारों तरफ ग्रामीणों का घेरा बनाना अपने आप में इस प्रदर्शन का सबसे बड़ा संदेश रहा। ग्रामीणों ने मानो यह दिखाने की कोशिश की कि गद्दी पर कोई भी बैठे, जनता को अपने सवालों के जवाब और अपने काम का हिसाब चाहिए।
ग्रामीणों का कहना है कि पंचायत में विकास कार्यों, सरकारी योजनाओं और खर्च से संबंधित यदि कोई शिकायत या संदेह है तो उसकी निष्पक्ष जांच होनी चाहिए। इससे वास्तविक स्थिति सामने आ सकती है और किसी निर्दोष व्यक्ति पर आरोप लगाने की स्थिति भी नहीं बनेगी।
सवाल आवारा पशुओं से आगे का
कुशालपुरा में हुआ यह प्रदर्शन इसलिए भी चर्चा में है क्योंकि इसमें सांड को केंद्र में रखकर पंचायत व्यवस्था पर व्यंग्य किया गया। ग्रामीणों ने साफ तौर पर यह संदेश देने का प्रयास किया कि मामला केवल सड़क पर घूमते पशुओं का नहीं, बल्कि पंचायत के कामकाज को लेकर पैदा हुई नाराजगी का भी है।
हालांकि ग्रामीणों द्वारा लगाए गए भ्रष्टाचार संबंधी आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है। इन आरोपों की वास्तविकता संबंधित पंचायत के रिकॉर्ड, विकास कार्यों के दस्तावेज और सरकारी जांच से ही स्पष्ट हो सकती है।
फिलहाल पंचायत भवन में गद्दी पर बैठा सांड और चारों तरफ खड़े ग्रामीणों का घेरा गांव की राजनीति और पंचायत व्यवस्था पर एक अनोखा व्यंग्य जरूर बन गया है।
