रिपोर्ट - बबलू वेद, झाड़ोल
झाड़ोल। अपराधियों और फरार आरोपियों के खिलाफ झाड़ोल पुलिस की कार्रवाई लगातार तेज होती नजर आ रही है। एक ओर उंडावेला में हथियारों के बल पर लूट की वारदात के बाद फरार चल रहे 2000 रुपए के इनामी आरोपी को करीब 28 दिनों तक लगातार पीछा करने के बाद सूरत-मुंबई तक पहुंचकर गिरफ्तार किया गया, वहीं दूसरी ओर चेक बाउंस के मामले में करीब तीन माह से फरार चल रहे गिरफ्तारी वारंटी को भी पुलिस ने तकनीकी सहयोग और सूचना तंत्र के जरिए दबोच लिया। दोनों कार्रवाइयों ने झाड़ोल पुलिस की निगरानी, तकनीकी अनुसंधान और फरार आरोपियों तक पहुंचने की रणनीति को सामने रखा है।
उंडावेला लूट के बाद बदलता रहा ठिकाना, पुलिस ने नहीं टूटने दी जांच की कड़ी
उंडावेला में हथियारों के बल पर लूट की वारदात के बाद आरोपी पुलिस से बचने के लिए लगातार ठिकाने बदलता रहा। मामला 26 अगस्त 2026 की रात करीब 9 से 10 बजे का है। परिवादी मुकेश कुमार सोनी अपनी बहन लक्ष्मी के साथ मोटरसाइकिल से उदयपुर से झाड़ोल की ओर आ रहे थे। उंडावेला पहुंचने पर तीन मोटरसाइकिलों पर सवार युवकों ने रास्ता रोककर उनके साथ मारपीट की और हथियार दिखाकर भय पैदा किया।
आरोप है कि बदमाशों ने तलवार से वार किया और चाकू दिखाकर परिवादी व उसकी बहन को डराया। इसके बाद परिवादी का पर्स और मोबाइल तथा उसकी बहन का मंगलसूत्र, लेडीज पर्स और अन्य सामान लूट लिया गया। पर्स में नकदी के साथ महत्वपूर्ण दस्तावेज और एटीएम कार्ड भी बताए गए हैं।
घटना के बाद पीड़ित की रिपोर्ट पर झाड़ोल थाने में प्रकरण संख्या 146/2026 दर्ज किया गया। पुलिस ने घटनास्थल का निरीक्षण करने के साथ पीड़ितों और गवाहों के बयान लिए तथा घायलों का मेडिकल करवाकर चोट प्रतिवेदन प्राप्त किया। इसके बाद पुलिस ने पारंपरिक जांच के साथ तकनीकी माध्यमों को भी जांच का महत्वपूर्ण हिस्सा बनाया।
28 दिन तक चला पीछा, सूरत से मुंबई तक तलाश
जांच के दौरान पुलिस को पता चला कि वारदात के बाद आरोपी स्थानीय क्षेत्र से निकलकर सूरत और मुंबई की ओर फरार हो गया था। गिरफ्तारी से बचने के लिए वह लगातार अपने ठिकाने बदल रहा था। ऐसे में पुलिस के सामने चुनौती केवल आरोपी की पहचान करने की नहीं, बल्कि उसके लगातार बदलते ठिकानों तक पहुंचने की भी थी।
जिला पुलिस अधीक्षक डॉ. अमृता दुहन के निर्देशन में पुलिस ने तकनीकी सहायता और निगरानी के आधार पर जांच को आगे बढ़ाया। टीम ने करीब 28 दिनों तक लगातार आरोपी का पीछा किया और उसकी गतिविधियों पर नजर बनाए रखी। जांच की कड़ी सूरत से मुंबई तक पहुंची और आखिरकार पुलिस टीम ने आरोपी को डिटेन कर लिया।
पुलिस ने आरोपी मगनलाल उर्फ मोनू पुत्र नाना लाल, जाति भगोरा, उम्र 23 वर्ष, निवासी ढिकलिया, थाना झाड़ोल को गिरफ्तार किया। पूछताछ और अनुसंधान के बाद उसके खिलाफ बीएनएस 2023 की धारा 310(2) एवं 127(2) के तहत कार्रवाई की गई और उसे न्यायालय में पेश किया गया।
पहले चार आरोपी गिरफ्तार, एक विधि-विरुद्ध बालक भी पुलिस की कार्रवाई में
पुलिस के अनुसार इस मामले में इससे पहले चार आरोपियों को गिरफ्तार किया जा चुका है। इनमें प्रेमा उर्फ प्रेमचंद उर्फ लांईगर बड़गोता, हिरालाल पुत्र नवलराम चौहान, दिनेश चौहान तथा ईश्वर पुत्र मोहनलाल वडेरा शामिल हैं। एक विधि-विरुद्ध बालक को भी डिटेन कर बाल संप्रेषण गृह उदयपुर में दाखिल कराया गया है।
इस तरह पुलिस की कार्रवाई के बाद मामले में फरार चल रहे आरोपियों पर शिकंजा लगातार कसता जा रहा है। पुलिस अब वारदात से जुड़े अन्य पहलुओं और संभावित बरामदगी को लेकर भी अनुसंधान आगे बढ़ा रही है।
टीम ने दूसरे राज्य तक पहुंचकर दिखाई सक्रियता
कार्रवाई में अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक खेरवाड़ा रजत विश्नोई एवं वृत्ताधिकारी वृत्त झाड़ोल विवेक सिंह के सुपरविजन में झाड़ोल थाना पुलिस ने महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। थानाधिकारी बुधाराम विश्नोई, हेड कांस्टेबल प्रदीप सिंह नं. 2822, कांस्टेबल ओमप्रकाश नं. 1173, बालकृष्ण नं. 3196, जितेन्द्र नं. 3359, लक्ष्मीलाल नं. 3043 तथा मदनलाल नं. 2600 के साथ जिला उदयपुर की साइबर सेल टीम कार्रवाई में शामिल रही।
तीन माह से फरार गिरफ्तारी वारंटी भी पुलिस के शिकंजे में
इसी क्रम में झाड़ोल पुलिस ने चेक बाउंस के मामले में करीब तीन माह से फरार चल रहे गिरफ्तारी वारंटी रमेश कुमार को भी गिरफ्तार कर लिया। वरिष्ठ सिविल न्यायाधीश एवं अतिरिक्त मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट झाड़ोल के प्रकरण संख्या 218/2023 में जारी गिरफ्तारी वारंट पर कार्रवाई करते हुए पुलिस ने शिवपुरा निवासी 44 वर्षीय रमेश कुमार पुत्र सरदारा, जाति चौहान को गिरफ्तार किया।
न्यायालय से गिरफ्तारी वारंट प्राप्त होने के बाद पुलिस ने उसकी तलाश शुरू की। जिला पुलिस अधीक्षक डॉ. अमृता दुहन के निर्देशन में अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक रजत विश्नोई तथा वृत्ताधिकारी झाड़ोल विवेक सिंह के निर्देश पर थाना प्रभारी बुधाराम विश्नोई ने टीम गठित कर कार्रवाई शुरू की।
पुलिस ने सूचना तंत्र को सक्रिय करने के साथ तकनीकी सहयोग लिया। लगातार निगरानी और प्रयासों के बाद करीब तीन माह से फरार चल रहे वारंटी को गिरफ्तार कर लिया गया। गिरफ्तारी के बाद उसे विधिक प्रक्रिया के तहत न्यायालय में पेश किया गया।
तकनीकी निगरानी बनी दोनों कार्रवाइयों की अहम कड़ी
झाड़ोल पुलिस की इन दोनों कार्रवाइयों को देखा जाए तो सबसे महत्वपूर्ण पहलू तकनीकी सहयोग और सूचना तंत्र का समन्वित इस्तेमाल सामने आता है। एक मामले में हथियारों के साथ लूट के बाद आरोपी दूसरे राज्य तक फरार हो गया और लगातार ठिकाने बदलता रहा, जबकि दूसरे मामले में न्यायालय के गिरफ्तारी वारंट के बावजूद आरोपी करीब तीन माह तक पुलिस की पकड़ से बाहर रहा।
इसके बावजूद पुलिस ने दोनों मामलों में जांच की कड़ी को टूटने नहीं दिया। लूट के आरोपी के मामले में करीब 28 दिनों तक लगातार पीछा कर सूरत-मुंबई तक पहुंचना और वारंटी के मामले में लंबे समय से लंबित गिरफ्तारी वारंट की तामील कराना पुलिस की सक्रियता को दर्शाता है।
झाड़ोल पुलिस की इन दो कार्रवाइयों से साफ संकेत गया है कि फरार होकर दूसरे शहर या राज्य में छिपना अथवा लंबे समय तक गिरफ्तारी से बचना आसान नहीं होगा। तकनीकी संसाधनों, साइबर सेल और जमीनी सूचना तंत्र के समन्वय से पुलिस फरार आरोपियों तक पहुंच बनाने में जुटी है।
