झाड़ोल के पीएम श्री महात्मा गांधी राजकीय विद्यालय में सजा बाल प्रतिभाओं का संसार, खेल-खेल में सीखने का मिला अनूठा मंच
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रिपोर्ट - बबलू वेद, झाड़ोल

झाड़ोल। शिक्षा का वास्तविक उद्देश्य केवल पुस्तकों तक सीमित ज्ञान देना नहीं, बल्कि बच्चों की प्रतिभा को निखारना, उनकी रचनात्मक क्षमता को विकसित करना और उन्हें जीवन की व्यावहारिक परिस्थितियों से परिचित कराना भी है। इसी उद्देश्य को साकार करने की दिशा में पीएम श्री महात्मा गांधी राजकीय विद्यालय, झाड़ोल में बुधवार को बाल मेले का आयोजन हर्षोल्लास, उत्साह और उमंग के साथ किया गया। मेले में नन्हे-मुन्ने विद्यार्थियों ने विभिन्न सांस्कृतिक एवं शैक्षिक गतिविधियों में उत्साहपूर्वक भाग लेकर अपनी प्रतिभा का प्रदर्शन किया। बच्चों की सक्रिय भागीदारी, शिक्षकों के मार्गदर्शन और अभिभावकों के सहयोग ने कार्यक्रम को विशेष बना दिया।


बाल मेले का शुभारंभ विद्यालय की प्रधानाचार्य संगीता वैष्णव ने फीता काटकर किया। इस अवसर पर विद्यालय परिसर में उत्सव जैसा माहौल नजर आया। वहीं, अतिरिक्त मुख्य ब्लॉक शिक्षा अधिकारी सुधीर जोशी ने वर्चुअल माध्यम से मेले का अवलोकन किया। कार्यक्रम के माध्यम से विद्यार्थियों को अपनी प्रतिभा प्रदर्शित करने, नई चीजें सीखने और पढ़ाई को रोचक तरीके से समझने का अवसर मिला।


बाल प्रतिभाओं को मिला अपनी क्षमता दिखाने का अवसर


बाल मेले में विद्यार्थियों ने विभिन्न शैक्षिक एवं सांस्कृतिक गतिविधियों में भाग लेकर अपनी रचनात्मक सोच, उत्साह और सीखने की ललक का परिचय दिया। इस प्रकार के आयोजन बच्चों को कक्षा-कक्ष की नियमित पढ़ाई से आगे बढ़कर व्यवहारिक अनुभव प्राप्त करने का अवसर प्रदान करते हैं। गतिविधियों में सहभागिता से विद्यार्थियों में आत्मविश्वास, सहयोग की भावना, निर्णय लेने की क्षमता और सामूहिक रूप से कार्य करने जैसे गुणों को विकसित करने में मदद मिलती है।


मेले में बच्चों के साथ उनके अभिभावकों ने भी विभिन्न स्टॉल लगाकर उत्साहपूर्वक भागीदारी निभाई। अभिभावकों की ओर से लगाए गए स्टॉल आकर्षण का केंद्र रहे। बच्चों, शिक्षकों और अभिभावकों की सामूहिक सहभागिता ने आयोजन को एक ऐसा मंच प्रदान किया, जहां शिक्षा के साथ रचनात्मकता और सहभागिता का सुंदर संगम देखने को मिला।


खेल-खेल में शिक्षा, सर्वांगीण विकास पर विशेष जोर


विद्यालय के बाल वाटिका प्रभारी दिलीप सिंह परमार ने बताया कि बाल मेले का मुख्य उद्देश्य बच्चों का सर्वांगीण विकास करना है। उन्होंने कहा कि बच्चों को खेल-खेल में शिक्षा प्रदान करना सीखने की प्रक्रिया को सरल, सहज और रुचिकर बनाने का प्रभावी माध्यम है। विभिन्न नवाचारों के माध्यम से बच्चों को अधिक से अधिक लाभान्वित करने और उनकी सीखने की क्षमता को विकसित करने पर जोर दिया जा रहा है।


उन्होंने बताया कि बाल्यावस्था बच्चों के मानसिक, सामाजिक, भावनात्मक और बौद्धिक विकास की दृष्टि से अत्यंत महत्वपूर्ण होती है। ऐसे में गतिविधि आधारित शिक्षा बच्चों को विषयों को बेहतर ढंग से समझने और अपने अनुभवों से सीखने में मदद करती है। बाल मेले जैसे आयोजन बच्चों को अपनी कल्पनाशक्ति का उपयोग करने, सवाल पूछने, नई चीजें सीखने और अपनी प्रतिभा को खुलकर सामने लाने का अवसर देते हैं।


नई शिक्षा पद्धति को जमीन पर उतारने की पहल


पीएम श्री महात्मा गांधी राजकीय विद्यालय, झाड़ोल में आयोजित यह बाल मेला शिक्षा को अधिक आनंददायक और विद्यार्थी-केंद्रित बनाने की दिशा में महत्वपूर्ण पहल के रूप में सामने आया। नई शिक्षा पद्धति में बच्चों को केवल जानकारी देने के बजाय उन्हें गतिविधियों के माध्यम से सीखने के अवसर उपलब्ध कराने पर विशेष बल दिया जाता है। बाल मेले के माध्यम से इसी सोच को प्रोत्साहित करने का प्रयास दिखाई दिया।


इस तरह के आयोजनों से विद्यालय और परिवार के बीच बेहतर समन्वय स्थापित होता है। जब अभिभावक बच्चों की शैक्षिक गतिविधियों में सक्रिय भागीदारी निभाते हैं, तो विद्यार्थियों को प्रोत्साहन मिलता है और विद्यालय के प्रति उनका जुड़ाव भी मजबूत होता है। बाल मेले में अभिभावकों की सहभागिता ने इसी सकारात्मक संदेश को आगे बढ़ाया।


विजेताओं को पुरस्कार एवं प्रमाण पत्र देकर किया प्रोत्साहित


मेले के दौरान विभिन्न गतिविधियों में भाग लेने वाले विजेताओं को पारितोषिक एवं प्रमाण पत्र प्रदान किए गए। सम्मान मिलने से बच्चों का उत्साह बढ़ा और उन्हें भविष्य में भी नई गतिविधियों में भाग लेने की प्रेरणा मिली। ऐसे अवसर विद्यार्थियों के प्रयासों को पहचान देने के साथ-साथ उनमें प्रतिस्पर्धा की स्वस्थ भावना और बेहतर प्रदर्शन करने का संकल्प भी विकसित करते हैं।


कार्यक्रम का संचालन दीपिका व्यास ने किया। आयोजन में विद्यालय के समस्त स्टाफ की गरिमामय उपस्थिति रही। शिक्षकों के मार्गदर्शन, बच्चों के उत्साह और अभिभावकों के सहयोग से बाल मेला सफलतापूर्वक संपन्न हुआ।


शिक्षा के साथ संस्कार, प्रतिभा और आत्मविश्वास विकसित करने का संदेश


झाड़ोल के पीएम श्री महात्मा गांधी राजकीय विद्यालय में आयोजित बाल मेले ने यह संदेश दिया कि विद्यालय केवल पढ़ाई का केंद्र नहीं, बल्कि बच्चों के व्यक्तित्व निर्माण की महत्वपूर्ण आधारशिला भी है। यहां मिलने वाले अनुभव बच्चों को अपनी प्रतिभा पहचानने, दूसरों के साथ मिलकर काम करने और आत्मविश्वास के साथ आगे बढ़ने के लिए प्रेरित करते हैं।


बाल मेले के माध्यम से खेल-खेल में शिक्षा, नवाचार, अभिभावक सहभागिता और विद्यार्थियों के सर्वांगीण विकास को केंद्र में रखा गया। विद्यालय परिवार की सहभागिता से आयोजित यह कार्यक्रम नन्हे विद्यार्थियों के लिए सीखने, समझने और अपनी क्षमताओं को सामने लाने का यादगार अवसर बना।