एनपी न्यूज 24/ गजेन्द्र मालवीय, डेस्क
मध्य प्रदेश में ओबीसी आरक्षण को लेकर चल रहा विवाद एक बार फिर सुप्रीम कोर्ट में पहुंच गया है। राज्य सरकार ने ओबीसी आयोग की रिपोर्ट में देरी का हवाला देते हुए सुप्रीम कोर्ट से छह महीने का अतिरिक्त समय मांगा है। इस मामले में 28 फरवरी को सुनवाई निर्धारित की गई है, जिस पर सबकी नजरें टिकी हुई हैं।
दरअसल, मध्य प्रदेश सरकार अन्य पिछड़ा वर्ग (ओबीसी) को 27 प्रतिशत आरक्षण देने की पक्षधर है। सरकार का तर्क है कि सामाजिक और शैक्षणिक रूप से पिछड़े वर्गों को उचित प्रतिनिधित्व मिलना चाहिए। हालांकि, हाई कोर्ट ने पूर्व में आरक्षण की सीमा 14 प्रतिशत तय कर दी थी। इसी निर्णय को लेकर कानूनी विवाद जारी है।
राज्य सरकार का कहना है कि ओबीसी आयोग की अंतिम रिपोर्ट आने के बाद ही आरक्षण प्रतिशत पर ठोस निर्णय संभव होगा। रिपोर्ट तैयार करने में हुई देरी के कारण सरकार ने सर्वोच्च न्यायालय से छह माह का समय मांगा है, ताकि आयोग के आंकड़ों और सिफारिशों के आधार पर अपना पक्ष मजबूती से रखा जा सके।
इस पूरे मामले का राजनीतिक महत्व भी बढ़ गया है, क्योंकि प्रदेश में नवंबर में चुनाव होने की संभावना जताई जा रही है। ऐसे में ओबीसी आरक्षण का मुद्दा चुनावी समीकरणों को प्रभावित कर सकता है। फिलहाल अंतिम निर्णय सुप्रीम कोर्ट की सुनवाई के बाद ही स्पष्ट हो पाएगा।
28 फरवरी की सुनवाई को लेकर प्रदेश की राजनीति और ओबीसी वर्ग दोनों की निगाहें अब सर्वोच्च न्यायालय पर टिकी हुई हैं।
