रिपोर्ट - प्रवीण वेद (बबलू), झाड़ोल
झाड़ोल | सरकार द्वारा गरीब और जरूरतमंद परिवारों के लिए भेजे जाने वाले मुफ्त एवं रियायती राशन में कथित अनियमितता का एक गंभीर मामला झाड़ोल क्षेत्र के माणस उचित मूल्य दुकान केंद्र से सामने आया है। यहां राशन डीलर पन्नालाल पटेल पर उपभोक्ता को निर्धारित गेहूं देने के बजाय जबरन प्याज लेने का दबाव बनाने तथा राशन में हेराफेरी करने का आरोप लगा है। मामले को लेकर ग्रामीणों में भारी रोष व्याप्त है और खाद्य विभाग से कठोर कार्रवाई की मांग उठ रही है।
30 किलो गेहूं की जगह प्याज लेने का दबाव
शिकायतकर्ता श्यामलाल कटारा निवासी सैलाणा ने खाद्य विभाग को दिए लिखित परिवाद में बताया कि वह 13 जून को अपने दो माह के राशन के तहत मिलने वाले 30 किलो गेहूं लेने उचित मूल्य दुकान पहुंचा था। आरोप है कि डीलर ने गेहूं देने से इनकार करते हुए उसके बदले प्याज लेने के लिए दबाव बनाया।
पीड़ित के अनुसार डीलर ने कहा कि उसके पास घर का प्याज पड़ा है और वह उसे 20 रुपये प्रति किलो के हिसाब से ले जाए। जब उपभोक्ता ने गेहूं की आवश्यकता बताते हुए प्याज लेने से मना किया तो कथित रूप से उसे गेहूं के बदले 600 रुपये लेकर मामला खत्म करने का प्रस्ताव दिया गया।
दो घंटे तक बहस, आधा राशन देकर किया रवाना
शिकायत में आरोप लगाया गया है कि पैसे और प्याज दोनों लेने से इंकार करने पर डीलर भड़क गया तथा उसे दुकान से जाने के लिए कहा। काफी देर तक चली बहस और मिन्नतों के बाद उसे केवल 15 किलो गेहूं दिया गया, जबकि शेष 15 किलो गेहूं बकाया रखा गया।
पीड़ित का कहना है कि उसे उसका पूरा हक नहीं दिया गया और राशन वितरण में मनमानी की गई।
वीडियो और शिकायत पत्र बने चर्चा का विषय
घटना से जुड़े वीडियो और लिखित शिकायत सामने आने के बाद पूरे क्षेत्र में मामला चर्चा का विषय बन गया है। ग्रामीणों का आरोप है कि यदि शिकायत सही पाई जाती है तो यह सार्वजनिक वितरण प्रणाली की पारदर्शिता पर गंभीर सवाल खड़े करता है।
ग्रामीणों ने उठाई लाइसेंस निलंबन की मांग
घटना के बाद राशन कार्ड धारकों और ग्रामीणों में नाराजगी है। पीड़ित श्यामलाल कटारा ने खाद्य विभाग से मामले की निष्पक्ष जांच करवाकर दोषी पाए जाने पर डीलर के खिलाफ कठोर कानूनी कार्रवाई तथा लाइसेंस निलंबित करने की मांग की है।
बड़ा सवाल
गरीब परिवारों के लिए सरकार द्वारा भेजे गए खाद्यान्न के वितरण में यदि इस प्रकार की अनियमितताएं हो रही हैं तो जिम्मेदारों पर कब कार्रवाई होगी? क्या विभाग जांच कर सच्चाई सामने लाएगा या गरीबों के हक का राशन इसी तरह विवादों में घिरता रहेगा?
फिलहाल पूरे मामले की निगाहें खाद्य विभाग की कार्रवाई पर टिकी हुई हैं।
