​झाड़ोल के गोराणा में ग्रामीण सेवा शिविर का आयोजन: जनसमस्याओं का मौके पर हुआ त्वरित निस्तारण ​
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रिपोर्ट - प्रवीण वेद (बबलू), झाड़ोल

​प्रशासनिक मुस्तैदी और जनप्रतिनिधियों की मौजूदगी में बांटे 7 आबादी पट्टे, पेंशन पीपीओ व जॉब कार्ड जारी

​झाड़ोल। पंचायत समिति झाड़ोल के अंतर्गत आने वाली ग्राम पंचायत गोराणा में सोमवार को 'ग्रामीण सेवा शिविर' का आयोजन किया गया। शिविर में बड़ी संख्या में स्थानीय ग्रामीणों ने पहुंचकर राज्य व केंद्र सरकार की विभिन्न जनहितैषी और कल्याणकारी योजनाओं का सीधा लाभ उठाया। शिविर की अध्यक्षता तहसीलदार सीताराम बोरीवाल ने की, जिन्होंने मौके पर ही राजस्व एवं प्रशासनिक स्तर की समस्याओं का निपटारा कर आमजन को राहत प्रदान की।

​वरिष्ठ जनप्रतिनिधियों और प्रशासनिक अधिकारियों की रही गरिमामय उपस्थिति

​शिविर में भारतीय जनता पार्टी के देहात पूर्व जिला अध्यक्ष भंवर सिंह पवार मुख्य अतिथि के रूप में उपस्थित रहे। उनके साथ मंच पर विशिष्ट अतिथियों में ये सभी शामिल रहे:

​कन्हैयालाल कटेरिया (ग्राम पंचायत प्रशासक)

​शंकर लाल गायरी (भाजपा मंडल अध्यक्ष)

​नीलम राजपुरोहित (भाजपा जिला प्रवक्ता)

​मनीष पुरोहित (मंडल महामंत्री)

​देवीलाल गायरी (किसान मोर्चा अध्यक्ष)

​भंवरलाल कटेरिया (पंचायत समिति सदस्य)

​प्रशासनिक स्तर पर विभागीय कार्यों को सुचारू रूप से संपन्न कराने में सहायक विकास अधिकारी शांता भुदरा एवं ग्राम विकास अधिकारी प्रवीण जोशी ने महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।

​शिविर की मुख्य उपलब्धियां और मौके पर हुआ वितरण:

​शिविर के दौरान विभिन्न सरकारी विभागों के अधिकारी एवं कर्मचारी अपने काउंटरों पर मुस्तैद नजर आए, जिससे ग्रामीणों को एक ही छत के नीचे सभी सेवाएं मिल सकीं:

​आबादी भूमि के पट्टे: लंबे समय से लंबित ग्राम पंचायत क्षेत्र की आबादी भूमि के कुल 7 पट्टे तैयार कर लाभार्थियों को सुपुर्द किए गए।

​सामाजिक सुरक्षा पेंशन: पात्र वृद्धजनों, विधवाओं और दिव्यांगों को मौके पर ही नए पेंशन पीपीओ पत्र सौंपे गए।

​महात्मा गांधी नरेगा रोजगार: रोजगार की मांग करने वाले ग्रामीण परिवारों के लिए तुरंत नए जॉब कार्ड जारी किए गए।

​विभागीय कार्य: बिजली, पानी, राजस्व और कृषि विभागों से जुड़े दर्जनों लंबित मामलों का निपटारा किया गया।

​जनता ने जताया आभार

​पेंशन और अपने घर का पट्टा पाकर ग्रामीणों के चेहरे खिल उठे। ग्रामीणों ने प्रशासन और जनप्रतिनिधियों का आभार व्यक्त करते हुए कहा कि इस प्रकार के शिविरों से समय और धन दोनों की बचत होती है और सरकारी दफ्तरों के चक्कर काटने से मुक्ति मिलती है।