रिपोर्ट - बबलू वेद, झाड़ोल
मोहम्मद फलासिया (झाड़ोल/उदयपुर)।
ग्रामीण क्षेत्रों में अक्सर आमजन को अपने बुनियादी प्रशासनिक कार्यों, जैसे भूमि के पट्टे और सामाजिक सुरक्षा पेंशन के सत्यापन के लिए सरकारी दफ्तरों के चक्कर काटने पड़ते हैं। ग्रामीणों की इसी बरसों पुरानी समस्या के त्वरित समाधान और सरकारी योजनाओं को सीधे उनके दरवाजे तक पहुंचाने के उद्देश्य से मंगलवार को ग्राम पंचायत मोहम्मद फलासिया में 'ग्रामीण सेवा शिविर' का भव्य और बेहद सफल आयोजन किया गया।
यह शिविर इस बात का जीवंत उदाहरण बन गया है कि जब प्रशासन संवेदनशीलता और जवाबदेही के साथ सीधे जनता के बीच पहुँचता है, तो धरातल पर बदलाव कितनी तेजी से आता है।
जागरूकता का दिखा असर, उमड़ी ग्रामीणों की भीड़
शिविर का आगाज बेहद व्यवस्थित ढंग से हुआ। शुरुआत में शिविर प्रभारी द्वारा वहाँ उपस्थित सभी ग्रामीणों को शिविर में दी जाने वाली विभिन्न सेवाओं और होने वाले जनकल्याणकारी कार्यों की संपूर्ण जानकारी विस्तार से दी गई। प्रशासन की इस अनूठी पहल और जागरूकता का असर यह हुआ कि ग्रामीण भारी उत्साह के साथ अपनी-अपनी समस्याओं के त्वरित निस्तारण के लिए आगे आए और देखते ही देखते शिविर स्थल पर ग्रामीणों की भारी भीड़ उमड़ पड़ी।
बरसों का इंतजार खत्म: 5 हाथों में सौंपे गए आवासीय पट्टे
इस पूरे शिविर का सबसे भावुक, यादगार और ऐतिहासिक पल वह था, जब वर्षों से अपने आशियाने के कानूनी मालिकाना हक (आवासीय पट्टे) का इंतजार कर रहे गरीब ग्रामीणों का सपना आखिरकार सच हो गया।
शिविर प्रभारी और स्थानीय जनप्रतिनिधियों द्वारा मौके पर ही संवेदनशीलता दिखाते हुए नियमानुसार त्वरित कार्रवाई की गई। बरसों की कागजी औपचारिकता को मिनटों में सुलझाकर मौके पर ही इन लाभार्थियों के हाथों में मकान के सरकारी पट्टे सौंपे गए:
श्री मांगीलाल (पिता रामा)
श्री राजेन्द्र (पिता बद्रीलाल)
श्री नवलराम (पिता बद्रीलाल)
श्री बदा (पिता पुना)
श्री देवीलाल (पिता नीमा)
अपने ही घर का कानूनी दस्तावेज हाथ में पाकर इन सभी के चेहरों पर बरसों की चिंता की लकीरें, एक झटके में तसल्ली और ख़ुशी की मुस्कान में बदल गईं।
तीन विभागों ने मिलकर सुलझाया तकनीकी पेच: धर्मी बाई को मिला न्याय
आवासीय पट्टों के वितरण के साथ-साथ शिविर में सामाजिक सुरक्षा को भी शीर्ष प्राथमिकता दी गई। अक्सर तकनीकी दिक्कतों या समय पर भौतिक सत्यापन न होने के अभाव में बुजुर्गों और जरूरतमंदों की रुकी या अटकी हुई पेंशन की समस्याओं का इस शिविर में मौके पर ही निस्तारण किया गया।
शिविर के दौरान श्रीमती अबली (पत्नी हरिया), श्रीमती अम्बावी (पत्नी अमरा) और श्रीमती कानकी (पत्नी रूपा) जैसी जरूरतमंद महिलाओं का पेंशन सत्यापन सफलतापूर्वक किया गया, जिससे उनकी भविष्य की आर्थिक सुरक्षा सुनिश्चित हो सकी।
समन्वय की मिसाल बना धर्मी बाई का मामला
शिविर में एक बेहद जटिल और विशेष मामला श्रीमती धर्मी बाई (पत्नी देवाजी) का सामने आया। वे लंबे समय से सिर्फ तकनीकी कारणों की वजह से सरकार की पेंशन योजना के लाभ से वंचित चल रही थीं। मामले की गंभीरता को देखते हुए प्रशासन ने तुरंत एक्शन लिया।
सबसे पहले ई-मित्र के माध्यम से उनका मोबाइल नंबर अपडेट किया गया।
गहन जांच में सामने आया कि उनके 'जनआधार कार्ड' में वार्षिक आय अपडेट नहीं थी, जिसके कारण सिस्टम बार-बार उनकी पेंशन रोक रहा था।
इस जटिल तकनीकी बाधा को दूर करने के लिए मौके पर मौजूद तीन विभागों ने एक अनूठी मिसाल पेश की:
पंचायती राज विभाग
सांख्यिकी विभाग
सामाजिक न्याय एवं अधिकारिता विभाग
इन तीनों विभागों के अधिकारियों ने बेहतरीन आपसी समन्वय (Coordination) दिखाते हुए मौके पर ही धर्मी बाई की वार्षिक आय को ऑनलाइन अपडेट करवाया और उनकी इस पुरानी तकनीकी समस्या का पूर्ण समाधान कर पेंशन सत्यापन का कार्य पूरा किया।
एक ही छत के नीचे बड़ा बदलाव: मुख्यमंत्री का जताया आभार
इस एक दिवसीय शिविर की सार्थकता का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि मात्र एक ही दिन में, एक ही छत के नीचे पाँच परिवारों को उनके आशियाने की सुरक्षा मिली और चार बुजुर्ग महिलाओं को पेंशन का मजबूत सहारा मिला।
शिविर के अंत में सभी राहत पाए लाभार्थियों और ग्रामीणों ने राज्य सरकार की इस जनहितकारी सोच, ग्रामीण सेवा शिविर की प्रभावी व्यवस्था तथा स्थानीय प्रशासन की इस संवेदनशील कार्यशैली की खुले दिल से सराहना की। ग्रामीणों ने इस राहत के लिए माननीय मुख्यमंत्री महोदय एवं राज्य सरकार का हृदय से धन्यवाद और आभार ज्ञापित किया।
