एनपी न्यूज 24/ गजेन्द्र मालवीय, डेस्क
कन्हैयालाल हत्याकांड के चार वर्ष: देश को झकझोर देने वाली घटना, आज भी न्याय का इंतजार
28 जून 2022 को उदयपुर में हुई थी नृशंस हत्या, चार साल बाद भी एनआईए कोर्ट में लंबित है मामला, पूर्व मुख्यमंत्री अशोक गहलोत और पूर्व कलेक्टर ताराचंद मीणा ने उठाए सवाल
उदयपुर। 28 जून 2022 को उदयपुर में हुई दर्जी कन्हैयालाल की नृशंस हत्या को आज चार वर्ष पूरे हो गए। इस घटना ने न केवल राजस्थान बल्कि पूरे देश को झकझोर दिया था। दिनदहाड़े दुकान में घुसकर हुई हत्या, उसके बाद आरोपियों द्वारा वीडियो जारी किए जाने और पूरे घटनाक्रम ने देशभर में आक्रोश पैदा कर दिया था। घटना के बाद राजस्थान के कई जिलों में कर्फ्यू लगाया गया, इंटरनेट सेवाएं अस्थायी रूप से बंद की गईं तथा कानून-व्यवस्था बनाए रखने के लिए अतिरिक्त सुरक्षा बल तैनात किए गए। मामले की गंभीरता को देखते हुए केंद्र सरकार ने जांच राष्ट्रीय जांच एजेंसी (एनआईए) को सौंप दी, जिसकी जांच के बाद यह प्रकरण जयपुर स्थित एनआईए की विशेष अदालत में विचाराधीन है।
कन्हैयालाल उदयपुर के धानमंडी क्षेत्र में सिलाई का कार्य करते थे। पुलिस जांच के अनुसार एक सोशल मीडिया पोस्ट को लेकर विवाद के बाद उन्हें धमकियां मिली थीं। 28 जून 2022 को दो व्यक्ति ग्राहक बनकर उनकी दुकान में पहुंचे और धारदार हथियार से उनकी हत्या कर दी। घटना में बीच-बचाव करने वाले एक कर्मचारी भी घायल हुए थे। वारदात के बाद आरोपियों ने वीडियो जारी किया, जिसके बाद पूरे देश में रोष फैल गया। राजस्थान पुलिस ने कुछ ही घंटों में मुख्य आरोपियों को गिरफ्तार कर लिया था और बाद में जांच एनआईए को सौंप दी गई।
घटना के बाद उदयपुर सहित राजस्थान के कई हिस्सों में बाजार बंद रहे। कानून-व्यवस्था बनाए रखने के लिए कर्फ्यू लागू किया गया और इंटरनेट सेवाएं बंद कर दी गईं। देशभर में विभिन्न सामाजिक, धार्मिक और व्यापारिक संगठनों ने घटना की निंदा की तथा दोषियों के खिलाफ कठोर कार्रवाई की मांग की। इस घटना की गूंज अंतरराष्ट्रीय स्तर तक सुनाई दी और कई विदेशी मीडिया संस्थानों ने भी इसे प्रमुखता से प्रकाशित किया। संयुक्त राष्ट्र सहित कई अंतरराष्ट्रीय संगठनों एवं विभिन्न धार्मिक संगठनों ने भी हिंसा की निंदा करते हुए शांति बनाए रखने की अपील की थी।
चार वर्ष बीत जाने के बाद भी मामला एनआईए की विशेष अदालत में विचाराधीन है। उपलब्ध न्यायालयीन जानकारी के अनुसार इस प्रकरण में कुल 180 गवाह प्रस्तावित हैं, लेकिन अब तक केवल 21 गवाहों के बयान ही दर्ज हो सके हैं। ऐसे में पीड़ित परिवार सहित समाज के विभिन्न वर्गों द्वारा समयबद्ध न्याय की मांग लगातार उठाई जाती रही है।
चार वर्ष पूरे होने पर पूर्व मुख्यमंत्री अशोक गहलोत ने भी इस मामले को लेकर बयान जारी किया। उन्होंने कहा कि जांच एनआईए के पास है, सुनवाई एनआईए की विशेष अदालत में चल रही है और केंद्र व राज्य दोनों जगह भाजपा की सरकार है, इसके बावजूद न्यायिक प्रक्रिया अपेक्षित गति से आगे नहीं बढ़ रही है। उन्होंने आरोप लगाया कि घटना के समय इस मामले को राजनीतिक रूप से प्रमुखता से उठाया गया, लेकिन अब पीड़ित परिवार को शीघ्र न्याय दिलाने की दिशा में अपेक्षित प्रगति दिखाई नहीं दे रही। उन्होंने कहा कि कन्हैयालाल के परिवार को न्याय दिलाना सरकार की नैतिक जिम्मेदारी है।
वहीं उदयपुर के पूर्व जिला कलेक्टर एवं सांसद प्रत्याशी ताराचंद मीणा ने कहा कि जब यह घटना हुई थी, उस समय वे उदयपुर के जिला कलेक्टर थे। उस दौरान प्रशासन की पहली प्राथमिकता कानून-व्यवस्था बनाए रखना, शांति कायम रखना और दोषियों के खिलाफ तत्काल कानूनी कार्रवाई सुनिश्चित करना थी। उन्होंने कहा कि चार वर्ष बाद भी मुकदमे की धीमी सुनवाई चिंता का विषय है। उनके अनुसार जब जांच केंद्रीय एजेंसी के पास है और सुनवाई विशेष अदालत में चल रही है, तब पीड़ित परिवार को समयबद्ध न्याय मिलना चाहिए।
चार वर्ष बाद भी कन्हैयालाल हत्याकांड देश के सबसे चर्चित आपराधिक मामलों में शामिल है। पीड़ित परिवार की मांग है कि मामले की सुनवाई में तेजी लाई जाए, शेष गवाहों के बयान शीघ्र पूरे कराए जाएं और न्यायालय से जल्द अंतिम फैसला आए, ताकि लंबे समय से न्याय की प्रतीक्षा कर रहे परिवार को राहत मिल सके।
