रिपोर्ट - बबलू वेद, झाड़ोल
झाड़ोल | राजस्थान सरकार के जनहितैषी संकल्पों को धरातल पर उतारने और ग्रामीणों के जीवन में खुशहाली लाने के उद्देश्य से आयोजित हो रहे ग्रामीण सेवा शिविर विकास का नया कीर्तिमान रच रहे हैं। इसी कड़ी में मंगलवार को पंचायत समिति झाड़ोल की ग्राम पंचायत रोहीमाला में आयोजित शिविर आमजन के लिए मददगार उभरा, जहाँ वर्षों की जटिल प्रशासनिक समस्याओं का निपटारा मिनटों में कर दिया गया। यह शिविर इस बात का जीवंत प्रमाण बना कि जब प्रशासन संवेदनशील हो और नेतृत्व मजबूत हो, तो जनता की हर परेशानी का अंत तय है।
शिविर की यह अभूतपूर्व सफलता ग्राम पंचायत, पंचायत समिति की सजगता और विकास अधिकारी जितेंद्र सिंह राजावत की असाधारण कार्यशैली के कारण संभव हो सकी है।
जागरूक प्रशासन: द्वार पर आई सरकार
शिविर की शुरुआत में ही विकास अधिकारी जितेंद्र सिंह राजावत एवं शिविर प्रभारी ने ग्रामीणों को राजस्थान सरकार की तमाम जनकल्याणकारी योजनाओं और शिविर में होने वाले कार्यों की विस्तार से जानकारी दी। पंचायत समिति और ग्राम पंचायत प्रशासन का मुख्य उद्देश्य यही था कि गाँव का कोई भी पात्र व्यक्ति, बुजुर्ग या असहाय अपनी सुविधाओं और लाभ से वंचित न रह जाए।
जब संकटमोचक बने विकास अधिकारी जितेंद्र सिंह राजावत
शिविर के दौरान दो बेहद भावुक और गंभीर मामले सामने आए, जहाँ तकनीकी पेचीदगियों के कारण बुजुर्गों को अपनी पेंशन के लिए लंबे समय से दर-दर भटकना पड़ रहा था।
आनंद सिंह (पिता नानसिंह) और पुनसिंह (पिता किशन सिंह) की पेंशन काफी समय से रुकी हुई थी, जिससे उन्हें आर्थिक तंगी का सामना करना पड़ रहा था।
विकास अधिकारी जितेंद्र सिंह राजावत ने जब स्वयं दोनों मामलों की मौके पर जांच की, तो पता चला कि बायोमेट्रिक (फिंगरप्रिंट) मैच न होने और फेस ऐप (Face App) से सत्यापन विफल रहने जैसी तकनीकी बाधाओं के कारण उनकी पेंशन अटक गई थी।
ऑन-द-स्पॉट संवेदनशीलता: बुजुर्गों की इस लाचारी और परेशानी को देखकर विकास अधिकारी जितेंद्र सिंह राजावत ने तुरंत संवेदनशीलता दिखाई। उन्होंने नियमों और तकनीक का मानवीय चेहरा सामने रखते हुए स्वयं के आधिकारिक ओटीपी (OTP) का उपयोग किया और मौके पर ही दोनों बुजुर्गों का सफलतापूर्वक भौतिक सत्यापन सुनिश्चित कर दिया। बंद पड़ी पेंशन दोबारा शुरू होते ही बुजुर्गों की आंखों में खुशी के आंसू छलक आए।
नए लाभार्थियों को हाथों-हाथ मिला पीपीओ (PPO)
ग्राम पंचायत रोहीमाला का यह शिविर केवल पुरानी समस्याओं को सुलझाने तक सीमित नहीं रहा, बल्कि पंचायत समिति के कुशल प्रबंधन से नए चेहरों पर मुस्कान लाने का जरिया भी बना।
शिविर में आईं काली बाई (पत्नी धर्मीलाल) और मंजू बाई (पत्नी वाल सिंह) के नए पेंशन मामलों को तुरंत स्वीकृति दी गई। विकास अधिकारी और ग्राम पंचायत प्रशासन द्वारा उन्हें मौके पर ही पेंशन पीपीओ (PPO) प्रदान किए गए। नया पीपीओ हाथ में आते ही दोनों महिलाओं के चेहरे खिल उठे।
ग्रामीणों ने जताया आभार: "हमारे लिए वरदान हैं ये शिविर"
शिविर में बिना किसी भाग-दौड़ और बिना किसी दफ्तर के चक्कर काटे मिली इस त्वरित राहत से गद्गद होकर सभी लाभार्थियों, ग्रामीणों और ग्राम पंचायत परिवार ने माननीय मुख्यमंत्री महोदय, राजस्थान सरकार एवं पंचायत समिति प्रशासन का सहृदय आभार व्यक्त किया।
गद्गद ग्रामीणों ने एक स्वर में कहा:
"सरकार और प्रशासन का यह शिविर हम गरीबों और बुजुर्गों के लिए किसी वरदान से कम नहीं है। आज विकास अधिकारी जितेंद्र सिंह राजावत और हमारी ग्राम पंचायत की सजगता के कारण प्रशासन खुद चलकर जनता के द्वार आया है और हमारी तकलीफों को दूर किया है।"
ग्राम पंचायत रोहीमाला और पंचायत समिति के इस साझा व सराहनीय प्रयास ने यह साबित कर दिया है कि सुशासन केवल कागजों में नहीं, बल्कि जनता के दिलों में उतर रहा है। विकास अधिकारी जितेंद्र सिंह राजावत के इस त्वरित और संवेदनशील फैसले की आज पूरे क्षेत्र में जमकर सराहना हो रही है।
