रिपोर्ट - बबलू वेद, झाड़ोल
संवेदनशील प्रशासन का असर: तकनीकी अड़चनें मिनटों में दूर, पात्र ग्रामीणों को मिला योजनाओं का लाभ, शिविर में दिखा सुशासन का सशक्त मॉडल
झाड़ोल। राज्य सरकार की जनकल्याणकारी योजनाओं को अंतिम छोर तक पहुंचाने की मंशा के साथ गुरुवार को ग्राम पंचायत कितावतो का वास में आयोजित ग्रामीण सेवा शिविर आमजन के लिए राहत और विश्वास का केंद्र बन गया। शिविर में वर्षों से लंबित समस्याओं का मौके पर समाधान कर प्रशासन ने यह संदेश दिया कि अब आमजन को छोटी-छोटी समस्याओं के लिए सरकारी दफ्तरों के चक्कर नहीं लगाने पड़ेंगे।
शिविर के दौरान कई बुजुर्गों की बंद सामाजिक सुरक्षा पेंशन को तत्काल बहाल कर उन्हें बड़ी राहत दी गई। वर्षों से तकनीकी कारणों से परेशान ग्रामीणों की समस्याओं का समाधान मौके पर ही किया गया, जिससे उनके चेहरों पर संतोष और खुशी साफ दिखाई दी।
कार्यक्रम में राज्य सरकार के कैबिनेट मंत्री बाबूलाल खराड़ी ने स्वयं लाभार्थियों को पेंशन पीपीओ वितरित किए। रामी बाई, रघुनाथ सिंह, मंगल सिंह एवं पुष्पा कंवर सहित कई पात्र लाभार्थियों को सामाजिक सुरक्षा योजनाओं से जोड़ा गया।
शिविर में कितावतो का वास निवासी भूरा अपनी लंबे समय से बंद पड़ी पेंशन की समस्या लेकर पहुंचे। शिविर प्रभारी और तकनीकी टीम ने तुरंत रिकॉर्ड की जांच कर तकनीकी त्रुटि दूर की तथा मौके पर ही उनकी पेंशन पुनः शुरू कर दी। वर्षों बाद पेंशन बहाल होने की सूचना मिलते ही भूरा ने राज्य सरकार, कैबिनेट मंत्री एवं शिविर प्रशासन का आभार व्यक्त किया।
इसी प्रकार ग्राम सांडमारी निवासी हिमा की पेंशन वार्षिक सत्यापन नहीं होने से रुकी हुई थी। पहले बायोमेट्रिक सत्यापन का प्रयास किया गया, लेकिन सफलता नहीं मिली। इसके बाद अधिकारियों ने फेस रिकग्निशन तकनीक का उपयोग कर ऑनलाइन सत्यापन पूरा किया और उनकी पेंशन भी तत्काल बहाल कर दी। यह पहल प्रशासन की संवेदनशीलता और आधुनिक तकनीक के प्रभावी उपयोग का उदाहरण बनी।
ग्रामीण सेवा शिविर में सरकार की विभिन्न जनकल्याणकारी योजनाओं की विस्तृत जानकारी भी ग्रामीणों को दी गई, ताकि कोई भी पात्र व्यक्ति योजना के लाभ से वंचित न रहे।
कितावतो का वास का यह ग्रामीण सेवा शिविर सुशासन, संवेदनशील प्रशासन और त्वरित जनसेवा का उत्कृष्ट उदाहरण बनकर सामने आया, जहां प्रशासन ने साबित कर दिया कि सरकार की योजनाओं का वास्तविक लाभ अब सीधे जरूरतमंदों तक पहुंच रहा है।
