रिपोर्ट - बबलू वेद, झाड़ोल
विकास अधिकारी जितेंद्र सिंह राजावत के नेतृत्व में संवेदनशील प्रशासन की मिसाल, एकल महिला को मिला आवासीय पट्टा तो वंचित परिवार को मिला रोजगार का सहारा
झाड़ोल। पंचायत समिति झाड़ोल की ग्राम पंचायत माणस में मंगलवार को आयोजित ग्रामीण सेवा शिविर केवल सरकारी योजनाओं के क्रियान्वयन का कार्यक्रम नहीं रहा, बल्कि यह संवेदनशील प्रशासन, सुशासन और महिला सशक्तिकरण की ऐसी मिसाल बन गया जिसने वर्षों से संघर्ष कर रही दो महिलाओं के जीवन में नई उम्मीद का दीप जला दिया। शिविर प्रभारी एवं विकास अधिकारी जितेंद्र सिंह राजावत के नेतृत्व में प्रशासन ने मौके पर ही समस्याओं का समाधान कर यह संदेश दिया कि सरकार की योजनाओं का वास्तविक उद्देश्य अंतिम पंक्ति में खड़े जरूरतमंद व्यक्ति तक न्याय और अधिकार पहुंचाना है।
शिविर का सबसे भावुक दृश्य उस समय देखने को मिला जब एकल महिला गीता देवी, पत्नी स्वर्गीय चेतन कुमार, को वर्षों से लंबित आवासीय भूमि का पट्टा सौंपा गया। पट्टा हाथ में मिलते ही उनकी आंखों में खुशी के आंसू छलक पड़े। लंबे समय से अपने आशियाने का सपना संजोए बैठी गीता देवी को आखिरकार अपने अधिकार की जमीन मिल गई। उपस्थित ग्रामीणों ने इस पल का तालियों से स्वागत किया और इसे प्रशासन की संवेदनशील कार्यशैली का जीवंत उदाहरण बताया।
इसी शिविर में फूला, पत्नी सुरेश मेघवाल, के निष्क्रिय पड़े मनरेगा जॉब कार्ड को पुनः सक्रिय किया गया। इतना ही नहीं, उन्हें मनरेगा कार्यों में मेट के रूप में पंजीकृत कर रोजगार के साथ जिम्मेदारी भी सौंपी गई। अब वे स्वयं रोजगार प्राप्त करने के साथ अन्य श्रमिकों का मार्गदर्शन भी करेंगी। यह निर्णय एक जरूरतमंद परिवार के लिए आर्थिक संबल ही नहीं, बल्कि आत्मसम्मान और आत्मनिर्भरता की नई शुरुआत भी बना।
विकास अधिकारी जितेंद्र सिंह राजावत ने शिविर के दौरान स्पष्ट निर्देश दिए कि किसी भी पात्र व्यक्ति को सरकारी योजनाओं के लाभ के लिए अनावश्यक कार्यालयों के चक्कर नहीं लगाने पड़ें। सभी विभागों के अधिकारियों ने समन्वय के साथ मौके पर ही प्रकरणों का निस्तारण कर प्रशासन की जवाबदेही और कार्यकुशलता का परिचय दिया। शिविर में कई अन्य जनसमस्याओं का भी त्वरित समाधान किया गया, जिससे ग्रामीणों का सरकारी व्यवस्था पर विश्वास और मजबूत हुआ।
लाभान्वित महिलाओं ने राज्य सरकार और प्रशासन का आभार व्यक्त करते हुए कहा कि ग्रामीण सेवा शिविर उनके जीवन में नई रोशनी लेकर आया है। ग्रामीणों का कहना था कि माणस का यह शिविर केवल योजनाओं का वितरण नहीं, बल्कि सम्मान, सुरक्षा, रोजगार और आत्मनिर्भरता का उत्सव बन गया।
ग्रामीणों ने विकास अधिकारी जितेंद्र सिंह राजावत की कार्यशैली की सराहना करते हुए कहा कि यदि हर शिविर में इसी तरह संवेदनशीलता, तत्परता और पारदर्शिता के साथ समस्याओं का समाधान होता रहा तो सरकार की जनकल्याणकारी योजनाओं का लाभ वास्तव में अंतिम व्यक्ति तक पहुंचेगा। माणस का यह ग्रामीण सेवा शिविर सुशासन और जनसेवा का ऐसा उदाहरण बन गया, जिसने यह साबित कर दिया कि संवेदनशील प्रशासन केवल फैसले नहीं करता, बल्कि लोगों की जिंदगी बदल देता है।
