रिपोर्ट - बबलू वेद, झाड़ोल
झाड़ोल | राज्य सरकार की 'ग्रामीण सेवा शिविर' पहल ग्रामीण अंचलों में सुशासन और जनसेवा का प्रभावी माध्यम बनती जा रही है। पंचायत समिति झाड़ोल की ग्राम पंचायत सैलाणा में मंगलवार को आयोजित ग्रामीण सेवा शिविर ने एक बार फिर साबित कर दिया कि यदि प्रशासन संवेदनशील हो और विभागों में बेहतर समन्वय हो, तो वर्षों नहीं बल्कि कुछ ही घंटों में आमजन की बड़ी से बड़ी समस्या का समाधान संभव है।
शिविर के दौरान सैलाणा निवासी दुर्गा देवी पत्नी शिवा ने अधिकारियों को बताया कि उनकी दिव्यांग सामाजिक सुरक्षा पेंशन पिछले छह महीने से बंद है। पेंशन बंद होने से उन्हें आर्थिक तंगी और मानसिक परेशानी का सामना करना पड़ रहा था। कई बार प्रयास करने के बावजूद समाधान नहीं मिला था, लेकिन ग्रामीण सेवा शिविर में उनकी समस्या को सर्वोच्च प्राथमिकता दी गई।
तकनीकी बाधाएं बनी थीं परेशानी का कारण
अधिकारियों ने तुरंत दस्तावेजों की जांच करवाई, जिसमें सामने आया कि दुर्गा देवी के जनआधार में यूआईडी (दिव्यांगता) कार्ड लिंक नहीं था। ई-मित्र के माध्यम से यूआईडी लिंक कराने के बाद भी प्रक्रिया आगे नहीं बढ़ सकी क्योंकि जनआधार में वार्षिक आय अपडेट नहीं होने से पेंशन का वार्षिक सत्यापन लंबित था।
शिविर में ही हुआ समाधान, विभागों ने दिखाई मिसाल
शिविर प्रभारी के निर्देशन में अधिकारियों ने इसे गंभीरता से लेते हुए तुरंत कार्रवाई शुरू की। मौके पर ही आय प्रमाण पत्र तैयार कराया गया, जनआधार में वार्षिक आय अपडेट करवाई गई और सांख्यिकी विभाग तथा पंचायती राज विभाग के अधिकारियों ने आपसी समन्वय से लेवल-1 और लेवल-2 का सत्यापन भी शिविर स्थल पर ही पूरा कर दिया।
अब मिलेगी रुकी हुई पेंशन भी
पूरी प्रक्रिया सफलतापूर्वक पूरी होने के बाद दुर्गा देवी की छह महीने से रुकी सामाजिक सुरक्षा पेंशन पुनः शुरू होने का रास्ता साफ हो गया। अब उन्हें लंबित पेंशन के साथ नियमित मासिक पेंशन का लाभ भी मिलेगा।
भावुक दुर्गा देवी ने कहा कि पिछले छह महीनों से वे लगातार परेशान थीं, लेकिन ग्रामीण सेवा शिविर में अधिकारियों ने स्वयं आगे बढ़कर उनकी समस्या का समाधान कराया। उन्होंने राज्य सरकार और प्रशासन के प्रति आभार व्यक्त करते हुए कहा कि अब उन्हें समय पर पेंशन मिल सकेगी।
सरकार की जनकल्याणकारी सोच का दिखा असर
सैलाणा का यह मामला केवल एक महिला की पेंशन बहाल होने की कहानी नहीं, बल्कि राज्य सरकार की जनहितकारी नीतियों, पंचायत समिति झाड़ोल की सक्रिय कार्यशैली और प्रशासन की संवेदनशीलता का जीवंत उदाहरण है। ग्रामीण सेवा शिविरों के माध्यम से लोगों की समस्याओं का मौके पर समाधान, विभागों के बीच बेहतर समन्वय और डिजिटल सेवाओं का प्रभावी उपयोग यह साबित कर रहा है कि सरकार की योजनाएं अब कागजों तक सीमित नहीं, बल्कि सीधे आमजन के जीवन में सकारात्मक बदलाव ला रही हैं।
ग्रामीण सेवा शिविरों की यही सफलता बताती है कि सरकार का उद्देश्य केवल योजनाएं बनाना नहीं, बल्कि अंतिम पंक्ति में खड़े जरूरतमंद व्यक्ति तक उनका लाभ समय पर पहुंचाना है। पंचायत समिति झाड़ोल में आयोजित यह शिविर सुशासन, जवाबदेही और जनसेवा का एक प्रेरणादायी उदाहरण बनकर सामने आया।
