एनपी न्यूज 24/ गजेन्द्र मालवीय, डेस्क
जयपुर। राजस्थान की पूर्व मुख्यमंत्री व वरिष्ठ भाजपा नेता वसुंधरा राजे ने विधानसभा के विशेष सत्र के दौरान राजनीति में मर्यादा, संवेदनशीलता और लोकतांत्रिक मूल्यों पर जोर देते हुए कहा कि राजनीति की लक्ष्मण रेखा से कहीं बड़ी इंसानियत की भावना होती है। उन्होंने बताया कि कांग्रेस के पूर्व सांसद डॉ. अबरार अहमद के निधन के बाद जब वे कांग्रेस कार्यालय श्रद्धांजलि देने पहुंचीं, तब कई लोगों ने सवाल उठाया। इस पर उन्होंने स्पष्ट कहा कि विचारधाराएं अलग हो सकती हैं, लेकिन मानवीय संवेदनाएं हमेशा सर्वोपरि रहती हैं।
अपने संबोधन में वसुंधरा राजे ने कहा कि पहले विधानसभा में ऐसे नेता होते थे, जिनके तर्क और अनुभव को पूरा सदन गंभीरता से सुनता था। उन्होंने गुलाब चंद कटारिया, राजेंद्र राठौड़, डॉ. सी.पी. जोशी, प्रद्युम्न सिंह, घनश्याम तिवाड़ी, डॉ. नाथू सिंह गुर्जर और राजपाल शेखावत जैसे वरिष्ठ नेताओं का उल्लेख करते हुए कहा कि उनके भाषण लोकतांत्रिक परंपराओं को मजबूत करते थे।
उन्होंने पूर्व मुख्यमंत्री भैरों सिंह शेखावत और हरिदेव जोशी के संबंधों का उदाहरण देते हुए कहा कि राजनीतिक प्रतिस्पर्धा के बावजूद दोनों नेताओं के बीच परस्पर सम्मान बना रहा। उन्होंने सिकंदर और पोरस की ऐतिहासिक कथा का उल्लेख करते हुए कहा कि सच्चा लोकतंत्र वही है, जहां मतभेद हों लेकिन मनभेद न हों।
वसुंधरा राजे ने देश की राजनीति का उदाहरण देते हुए कहा कि जब जिनेवा में पाकिस्तान ने भारत पर मानवाधिकार उल्लंघन के आरोप लगाए थे, तब तत्कालीन प्रधानमंत्री पी.वी. नरसिम्हा राव ने विपक्ष के वरिष्ठ नेता अटल बिहारी वाजपेयी को भारत का पक्ष रखने भेजा था। इससे स्पष्ट होता है कि उस दौर में राष्ट्रहित दलगत राजनीति से ऊपर था।
उन्होंने वर्तमान राजनीतिक माहौल पर चिंता व्यक्त करते हुए कहा कि राजनीतिक विरोध अपनी जगह है, लेकिन संवाद और सम्मान की गुंजाइश हमेशा बनी रहनी चाहिए। उन्होंने कहा, "दुश्मनी जमकर करो, लेकिन थोड़ी-सी खिड़की खुली छोड़ दो, ताकि भविष्य में एक-दूसरे के सामने आने पर शर्मिंदगी महसूस न हो।"
अपने संबोधन के अंत में वसुंधरा राजे ने मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा द्वारा "वन स्टेट, वन इलेक्शन" की पहल का स्वागत किया। साथ ही उन्होंने पंचायत राज संस्थाओं में महिलाओं को 50 प्रतिशत आरक्षण, 24 घंटे घरेलू बिजली, ईआरसीपी, नदियों को जोड़ने की योजना तथा सर्वश्रेष्ठ विधायक चयन जैसी योजनाओं का उल्लेख करते हुए कहा कि जनहित में लिए गए निर्णय किसी एक दल या सरकार के नहीं, बल्कि पूरे प्रदेश की सामूहिक प्रगति के प्रतीक होते हैं।
