रिपोर्ट - बबलू वेद, झाड़ोल
झाड़ोल के कालीगार विद्यालय का हेडपम्प दो महीने से बंद, 20 परिवार भी संकट में; सहायक अभियंता के बार-बार आश्वासन निकले खोखले
झाड़ोल। उदयपुर जिले के झाड़ोल ब्लॉक की ग्राम पंचायत ओड़ा के अंतर्गत स्थित राजकीय प्राथमिक विद्यालय कालीगार में पिछले दो महीनों से पेयजल संकट ने भयावह रूप ले लिया है। विद्यालय का एकमात्र हेडपम्प बंद होने से करीब 60 छात्र-छात्राएं और आसपास के 20 परिवार पानी के लिए दर-दर भटकने को मजबूर हैं। सबसे चिंताजनक बात यह है कि मासूम बच्चों को अपनी प्यास बुझाने के लिए खुले कुएं तक जाना पड़ रहा है, जहां हर पल किसी बड़े हादसे का खतरा मंडरा रहा है।
गांव और विद्यालय परिवार का आरोप है कि कई बार शिकायत करने के बावजूद जलदाय विभाग ने समस्या का समाधान नहीं किया। ऐसे में सवाल उठ रहा है कि क्या विभाग किसी अनहोनी का इंतजार कर रहा है?
शिकायतें होती रहीं, जिम्मेदार सोते रहे
विद्यालय के शिक्षकों ने बताया कि हेडपम्प खराब होने की सूचना ग्राम पंचायत ओड़ा की प्रशासक रमिला देवी तथा पीईईओ सत्यनारायण को समय पर दे दी गई थी। इसके बावजूद दो महीने बीत जाने के बाद भी न तो हेडपम्प चालू हुआ और न ही कोई स्थायी व्यवस्था की गई।
10 दिन तक केवल आश्वासन... धरातल पर शून्य कार्रवाई
जब इस गंभीर मामले को लेकर पत्रकार ने झाड़ोल जलदाय विभाग के सहायक अभियंता पन्नालाल गरासिया से लगातार संपर्क किया तो हर बार नया आश्वासन मिला, लेकिन परिणाम आज भी शून्य रहा।
आश्वासनों की पूरी कहानी—
पहला दिन: "भेजकर चेक करवाता हूं, क्या समस्या है, ठीक करवाता हूं।"
दूसरा दिन: "मिस्त्री भेजा था, पाइप अंदर चले गए हैं, सामान मंगवाया है, एक-दो दिन में ठीक कर देंगे।"
तीसरे दिन: "आज पाइप आ जाएंगे, आज ही ठीक करवा देता हूं।"
चौथे दिन: "सामान आ गया है, आज हेडपम्प चालू हो जाएगा।"
तीन दिन बाद: "मिस्त्री भेज रहा हूं,i दूसरे हेडपम्प से सामान निकालकर दो घंटे में ठीक कर देंगे, फोटो भी भेज दूंगा।"
पांच घंटे बाद: "मिस्त्री का फोन नहीं लग रहा, संपर्क करके बताता हूं।"
इसके बाद न कोई फोन आया, न कोई संदेश और न ही हेडपम्प ठीक हुआ। पत्रकार द्वारा भेजे गए संदेशों का भी जवाब नहीं दिया गया।
मासूमों की जान से बड़ा क्या है?
आज स्थिति यह है कि छोटे-छोटे बच्चे खुले कुएं से पानी पीने जा रहे हैं। यदि पानी भरते समय कोई बच्चा कुएं में गिर जाए या कोई अन्य दुर्घटना हो जाए तो उसकी जिम्मेदारी कौन लेगा? क्या विभाग और प्रशासन किसी बड़ी त्रासदी का इंतजार कर रहे हैं?
जनता पूछ रही है... जवाब कौन देगा?
दो महीने से बंद हेडपम्प आखिर क्यों नहीं सुधारा गया?
बार-बार आश्वासन देने के बावजूद कार्रवाई क्यों नहीं हुई?
क्या जलदाय विभाग के लिए मासूम बच्चों की सुरक्षा कोई मायने नहीं रखती?
यदि हादसा हुआ तो जिम्मेदार अधिकारी जवाबदेह होंगे या नहीं?
क्या लापरवाह अधिकारियों पर कार्रवाई होगी या फिर मामला फाइलों में दबा दिया जाएगा?
ग्रामीणों की चेतावनी
ग्रामीणों, अभिभावकों और विद्यालय परिवार ने जिला प्रशासन से तत्काल हस्तक्षेप कर हेडपम्प चालू करवाने, विद्यालय में सुरक्षित पेयजल की व्यवस्था करने तथा लापरवाही बरतने वाले जिम्मेदार अधिकारियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की मांग की है।
◆ बड़ी बात
"दो महीने से प्यासे हैं मासूम... लेकिन जिम्मेदार विभाग के पास केवल आश्वासन हैं। अब सवाल यह नहीं कि हेडपम्प कब चलेगा, सवाल यह है कि क्या प्रशासन किसी मासूम की जान जोखिम में पड़ने के बाद ही जागेगा?"
